Strait of Hormuz Threat: होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बीते दिन खबर आई थी कि अमेरिका-ईरान ने सहमति से इस अहम समुद्री मार्ग को सभी के लिए खोल दिया है। लेकिन 24 घंटे भी नहीं बीते और फिर खबर आई कि ईरान ने इस अहम समुद्री मार्ग पर सख्त नियंत्रण लागू करने का ऐलान कर दिया।
दरअसल, ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसके बंदरगाहों को ब्लॉकेड मुक्त नहीं करता, तब तक यह पाबंदी कायम रहेगी। अब कोई भी तेल-गैस से भरा जहाज होर्मुज स्ट्रेट से नहीं गुजरेगा।
‘मॉस्किटो फ्लीट’ ईरान की ताकत
एक तरफ अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के बाहर नाकाबंदी कर रखी है। इसके लिए उसने दुनिया का सबसे ताकतवर एयरक्राफ्ट कैरियर ‘USS अब्राहम लिंकन’ अरब की खाड़ी में तैनात कर रखा है साथ ही कई वॉरशिप और समरीन वहां मौजूद हैं। लेकिन ऐसी क्या वजह है कि ईरान इन सब के बावजूद नहीं अमेरिका से आंख मिला रहा है।
दरअसल, ईरान का ‘मॉस्किटो फ्लीट’ उसकी समुद्री ताकत का एक अनोखा और खतरनाक हथियार है। असल में, ये कोई बड़ी-बड़ी युद्धपोतों वाली सेना नहीं है, बल्कि छोटी, बेहद तेज और फुर्तीली नावों का झुंड है। इन्हें खास तौर पर दुश्मन के बड़े जहाजों को परेशान करने और शिपिंग रास्तों में बाधा डालने के लिए तैयार किया गया है। जो दुश्मन जहाजों पर अचानक हमला करते हैं।
जब अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के बड़े वॉरशिप बंदरगाहों पर नुकसान झेलते दिखते हैं, तब भी ये ‘मॉस्किटो फ्लीट’ चुपचाप छिपा रहता है… अंधेरे में, सही मौके का इंतज़ार करता हुआ। ये फ्लीट ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड नेवी का अहम हिस्सा है, जो उसकी नियमित नौसेना से अलग काम करती है और ज्यादा आक्रामक रणनीति अपनाती है।
इन छोटी नावों की असली ताकत सिर्फ उनकी रफ्तार नहीं है, बल्कि उन पर लगे हथियार हैं- मिसाइलें और ड्रोन, जिन्हें ये नावें या तट पर छिपे ठिकानों से लॉन्च किया जा सकता है। इसी वजह से, होर्मुज स्ट्रेट जैसे बेहद अहम समुद्री रास्ते में यह फ्लीट एक बड़ा खतरा बना रहता है, क्योंकि यह कभी भी शिपिंग को रोकने या नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है।


