टेंडर मैनेज करने के लिए रिशु श्री अलग-अलग विभागों में सचिव से लेकर नगर आयुक्त तक की पोस्टिंग मैनेज कराता था। ED जांच की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। रिशु श्री राज्य के IAS अधिकारियों को अपनी उंगलियों पर नचाता था। वह सिर्फ टेंडर मैनेज नहीं करता था, बल्कि यह भी तय करता था कि किस विभाग में सचिव कौन होगा और किस शहर का नगर आयुक्त कौन बनेगा। रिशु ने अधिकारियों को उपकृत करने के लिए उन्हें और उनके परिवारों को विदेशों की सैर कराई। संजीव हंस मामले की जांच के दौरान रिशु श्री का नाम सामने आया था। रिशु ने अवैध तरीके से 265.73 करोड़ की संपत्ति बनाई है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा स्वच्छ गंगा मिशन से आया, जहां उसने 185.25 करोड़ रुपए कमाए। वह सारा लेनदेन हवाला के जरिए करता था। रिशु श्री कौन है? किस तरह अधिकारियों से काम निकलवाता था? कैसे कमीशन लेता था? पढ़िए रिपोर्ट…। पहले जानिए कौन है रिशु श्री? रिशु श्री मूल रूप से बिहार के सारण जिले का निवासी है। सीनियर IAS अधिकारी संजीव हंस और अन्य IAS अधिकारियों के खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोपी है। उसके खिलाफ SVU ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है। ED की रिपोर्ट के मुताबिक, रिशु ने सरकारी कर्मचारियों/अधिकारियों को फायदा पहुंचाया। इसके बदले उसे सरकारी टेंडरों से जुड़ी अहम जानकारी पहले ही मिल जाती थी। रिशु अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर टेंडर में फेरबदल करा लेता था। मनचाहे ठेकेदार को टेंडर दिलाता था। इसके बदले कमीशन लेता था। कमीशन का हिस्सा संबंधित अधिकारी तक भी पहुंचता था। टेंडर पाने के लिए अपनी पसंद के अफसरों की पोस्टिंग कराता ED की रिपोर्ट के मुताबिक, रिशु श्री टेंडर हासिल करने के लिए पहले अपनी पसंद के अधिकारियों की पोस्टिंग कराता था। जांच में सामने आया कि मुमुक्षु चौधरी ने स्वीकार किया है कि सीतामढ़ी में नगर आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार पाने के लिए रिशु श्री ने उच्च अधिकारियों को 25 लाख रुपए दिए थे। अधिकारियों को पक्ष में करने के लिए लाखों खर्च किए बुडको के तत्कालीन प्रबंध निदेशक IAS योगेश कुमार सागर भी रिशु श्री से खूब लाभान्वित हुए। ED की जांच में आया कि योगेश और उनके परिवार के कुछ 6 सदस्यों को रिशु श्री ने विदेशों में सैर करवाया। जून 24 में ऑस्ट्रिया की यात्रा इन लोगों को करवाई गई। BMSICL के ठेके भी विदेश यात्राओं के बदले में मिले IAS अधिकारी अभिलाषा शर्मा और उनके परिवार की यात्रा पर रिशु ने 19 लाख खर्च किया था। दोनों के व्हाट्सएप चैट से खुलासा हुआ कि बीएमएसआईसीएल के तत्कालीन एमडी धर्मेंद्र ने भी विदेश यात्राएं की थी। इसके बाद रिशु श्री की संस्थाओं को बीएमएसआईसीएल से ठेके मिले थे। टेंडर मैनेज करने के साथ-साथ पूरा प्रशासनिक ढांचा हाईजैक रिशु श्री का भ्रष्टाचार का मॉडल बेहद शातिर था। उसने केवल टेंडर ही मैनेज नहीं किए, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे को ही हाईजैक कर लिया था। वह अधिकारियों की ‘लक्जरी’ जरूरतों को पूरा करता था। जब अधिकारी एहसान तले दब जाते, तब वह मर्जी के टेंडर नियम बनवाता था। टेंडर जारी होने से पहले ही उसकी शर्तें रिशु के पास होती थीं। 265.73 करोड़ की यह संपत्ति इसी का नतीजा है। ED को फेसटाइम पर दी आत्महत्या की धमकी रिशु श्री जांच से बचने के लिए हर हथकंडा अपना रहा है। 10 सितंबर 2025 को ED ने पटना एसएसपी को पत्र लिखकर बताया कि रिशु श्री फेसटाइम और टेलीग्राम एप के जरिए अधिकारियों को आत्महत्या की धमकी दे रहा है। वह समन से बचने के लिए फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट का भी सहारा ले चुका है। फिलहाल ED सिंडिकेट की गहराई से जांच कर रही है। —————————– ये खबर भी पढ़ें… फ्रांस, दुबई, स्विट्जरलैंड में 12 IAS अफसरों की प्रॉपर्टी बनवाई:हनक ऐसी कि बिना उसकी मर्जी ठेका नहीं मिलता, अफसरों को उंगुलियों पर नचाने वाले रिशु की कहानी बिहार पुलिस की इकाई SVU (Special Vigilance Unit) ने पिछले बुधवार को पटना में रिशु श्री के ठिकाने पर छापेमारी की। गुरुवार को रिशु श्री को गिरफ्तार कर विशेष निगरानी कोर्ट में पेश किया। वहां से उसे 14 दिनों के न्यायिक हिरासत में बेउर जेल भेज दिया गया है। छापेमारी के दौरान रिशु श्री के घर से करोड़ों रुपए के जेवरात और लाखों रुपए कैश मिले हैं। SVU की टीम दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच में जुटी है। पूरी खबर पढ़ें.. टेंडर मैनेज करने के लिए रिशु श्री अलग-अलग विभागों में सचिव से लेकर नगर आयुक्त तक की पोस्टिंग मैनेज कराता था। ED जांच की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। रिशु श्री राज्य के IAS अधिकारियों को अपनी उंगलियों पर नचाता था। वह सिर्फ टेंडर मैनेज नहीं करता था, बल्कि यह भी तय करता था कि किस विभाग में सचिव कौन होगा और किस शहर का नगर आयुक्त कौन बनेगा। रिशु ने अधिकारियों को उपकृत करने के लिए उन्हें और उनके परिवारों को विदेशों की सैर कराई। संजीव हंस मामले की जांच के दौरान रिशु श्री का नाम सामने आया था। रिशु ने अवैध तरीके से 265.73 करोड़ की संपत्ति बनाई है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा स्वच्छ गंगा मिशन से आया, जहां उसने 185.25 करोड़ रुपए कमाए। वह सारा लेनदेन हवाला के जरिए करता था। रिशु श्री कौन है? किस तरह अधिकारियों से काम निकलवाता था? कैसे कमीशन लेता था? पढ़िए रिपोर्ट…। पहले जानिए कौन है रिशु श्री? रिशु श्री मूल रूप से बिहार के सारण जिले का निवासी है। सीनियर IAS अधिकारी संजीव हंस और अन्य IAS अधिकारियों के खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोपी है। उसके खिलाफ SVU ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है। ED की रिपोर्ट के मुताबिक, रिशु ने सरकारी कर्मचारियों/अधिकारियों को फायदा पहुंचाया। इसके बदले उसे सरकारी टेंडरों से जुड़ी अहम जानकारी पहले ही मिल जाती थी। रिशु अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर टेंडर में फेरबदल करा लेता था। मनचाहे ठेकेदार को टेंडर दिलाता था। इसके बदले कमीशन लेता था। कमीशन का हिस्सा संबंधित अधिकारी तक भी पहुंचता था। टेंडर पाने के लिए अपनी पसंद के अफसरों की पोस्टिंग कराता ED की रिपोर्ट के मुताबिक, रिशु श्री टेंडर हासिल करने के लिए पहले अपनी पसंद के अधिकारियों की पोस्टिंग कराता था। जांच में सामने आया कि मुमुक्षु चौधरी ने स्वीकार किया है कि सीतामढ़ी में नगर आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार पाने के लिए रिशु श्री ने उच्च अधिकारियों को 25 लाख रुपए दिए थे। अधिकारियों को पक्ष में करने के लिए लाखों खर्च किए बुडको के तत्कालीन प्रबंध निदेशक IAS योगेश कुमार सागर भी रिशु श्री से खूब लाभान्वित हुए। ED की जांच में आया कि योगेश और उनके परिवार के कुछ 6 सदस्यों को रिशु श्री ने विदेशों में सैर करवाया। जून 24 में ऑस्ट्रिया की यात्रा इन लोगों को करवाई गई। BMSICL के ठेके भी विदेश यात्राओं के बदले में मिले IAS अधिकारी अभिलाषा शर्मा और उनके परिवार की यात्रा पर रिशु ने 19 लाख खर्च किया था। दोनों के व्हाट्सएप चैट से खुलासा हुआ कि बीएमएसआईसीएल के तत्कालीन एमडी धर्मेंद्र ने भी विदेश यात्राएं की थी। इसके बाद रिशु श्री की संस्थाओं को बीएमएसआईसीएल से ठेके मिले थे। टेंडर मैनेज करने के साथ-साथ पूरा प्रशासनिक ढांचा हाईजैक रिशु श्री का भ्रष्टाचार का मॉडल बेहद शातिर था। उसने केवल टेंडर ही मैनेज नहीं किए, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे को ही हाईजैक कर लिया था। वह अधिकारियों की ‘लक्जरी’ जरूरतों को पूरा करता था। जब अधिकारी एहसान तले दब जाते, तब वह मर्जी के टेंडर नियम बनवाता था। टेंडर जारी होने से पहले ही उसकी शर्तें रिशु के पास होती थीं। 265.73 करोड़ की यह संपत्ति इसी का नतीजा है। ED को फेसटाइम पर दी आत्महत्या की धमकी रिशु श्री जांच से बचने के लिए हर हथकंडा अपना रहा है। 10 सितंबर 2025 को ED ने पटना एसएसपी को पत्र लिखकर बताया कि रिशु श्री फेसटाइम और टेलीग्राम एप के जरिए अधिकारियों को आत्महत्या की धमकी दे रहा है। वह समन से बचने के लिए फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट का भी सहारा ले चुका है। फिलहाल ED सिंडिकेट की गहराई से जांच कर रही है। —————————– ये खबर भी पढ़ें… फ्रांस, दुबई, स्विट्जरलैंड में 12 IAS अफसरों की प्रॉपर्टी बनवाई:हनक ऐसी कि बिना उसकी मर्जी ठेका नहीं मिलता, अफसरों को उंगुलियों पर नचाने वाले रिशु की कहानी बिहार पुलिस की इकाई SVU (Special Vigilance Unit) ने पिछले बुधवार को पटना में रिशु श्री के ठिकाने पर छापेमारी की। गुरुवार को रिशु श्री को गिरफ्तार कर विशेष निगरानी कोर्ट में पेश किया। वहां से उसे 14 दिनों के न्यायिक हिरासत में बेउर जेल भेज दिया गया है। छापेमारी के दौरान रिशु श्री के घर से करोड़ों रुपए के जेवरात और लाखों रुपए कैश मिले हैं। SVU की टीम दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच में जुटी है। पूरी खबर पढ़ें..


