NTPC का Nuclear Power पर बड़ा प्लान, 2047 तक 30 GW क्षमता के लिए UP समेत कई राज्यों में तलाश

NTPC का Nuclear Power पर बड़ा प्लान, 2047 तक 30 GW क्षमता के लिए UP समेत कई राज्यों में तलाश

 देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी एनटीपीसी परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने वर्ष 2047 तक देश में 30 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इसी लक्ष्य के तहत कंपनी उत्तर प्रदेश सहित कई अन्य राज्यों में परमाणु बिजली परियोजनाओं के लिए संभावित स्थलों की तलाश करेगी। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, नए राज्यों में परियोजनाओं की व्यवहार्यता का अध्ययन जल्द शुरू किया जाएगा। एनटीपीसी की यह पहल देश में गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों से बिजली उत्पादन बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। 

कंपनी वर्ष 2032 तक कम से कम दो गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। वहीं, दीर्घकालिक योजना के तहत वर्ष 2047 तक 30 गीगावाट की परमाणु ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य है। इससे केंद्र सरकार के 2047 तक देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक पहुंचाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को भी बढ़ावा मिलेगा। एनटीपीसी बिहार, मध्य प्रदेश और ओडिशा में परमाणु बिजली परियोजनाओं के लिए व्यवहार्यता अध्ययन पूरा कर चुकी है। अध्ययन के आधार पर बिहार के बांका, मध्य प्रदेश के बसई और ओडिशा के नबरंगपुर को संभावित स्थल के रूप में चिह्नित किया गया है। 

अब कंपनी अन्य राज्यों में भी उपयुक्त स्थानों की तलाश करेगी। कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश भी इस सूची में शामिल है। नए राज्यों में परमाणु परियोजनाओं की संभावनाओं का अध्ययन जल्द शुरू किया जाएगा। हालांकि, संभावित स्थल चिह्नित किए जाने का अर्थ परियोजना को अंतिम मंजूरी मिलना नहीं है। इसके लिए निर्धारित तकनीकी और नियामकीय प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा। एनटीपीसी की योजना औसतन 1,400 मेगावाट क्षमता वाली परमाणु बिजली परियोजनाएं स्थापित करने की है। प्रत्येक परियोजना में 700-700 मेगावाट की दो इकाइयां प्रस्तावित हैं। परियोजनाओं को आगे बढ़ाने से पहले उनके तकनीकी पक्ष, पानी की उपलब्धता, भूमि और अन्य जरूरी संसाधनों का आकलन किया जाएगा। परमाणु परियोजना के लिए तैयार व्यवहार्यता अध्ययन परमाणु ऊर्जा विभाग को सौंपा जाता है।

 इसके बाद स्थल चयन के लिए गठित स्थायी समिति प्रस्ताव की समीक्षा करती है। तकनीकी रूप से उपयुक्त पाए जाने पर प्रस्ताव को आगे की प्रक्रिया के लिए परमाणु ऊर्जा आयोग के समक्ष भेजा जाता है। उद्योग के अनुमानों के अनुसार, एक गीगावाट परमाणु बिजली उत्पादन क्षमता स्थापित करने के लिए लगभग 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत हो सकती है। किसी परियोजना को शुरुआती अवधारणा से चालू होने तक कम से कम तीन साल या उससे अधिक समय लग सकता है। एक यूनिट परमाणु ऊर्जा के उत्पादन के लिए पांच लीटर पानी की जरूरत होती है। परमाणु परियोजनाओं के लिए पर्याप्त भूमि और निरंतर जलापूर्ति भी अहम आवश्यकताएं हैं। 

परियोजना के आकार के आधार पर भूमि की जरूरत अलग-अलग हो सकती है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत संयंत्र के आसपास लगभग एक वर्ग किलोमीटर का निषिद्ध क्षेत्र भी निर्धारित किया जाता है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के अनुमान के मुताबिक, देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता को मौजूदा लगभग 8.8 गीगावाट से बढ़ाकर 100 गीगावाट तक पहुंचाने के लिए करीब 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता होगी। इसके लिए लगभग 91 गीगावाट अतिरिक्त क्षमता विकसित करनी होगी। 

परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए प्रौद्योगिकी और विशेषज्ञता हासिल करने के उद्देश्य से एनटीपीसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ सहयोग की संभावनाएं भी तलाश रही है। इनमें अमेरिका की वेस्टिंगहाउस, रूस की रोसाटॉम और फ्रांस की ईडीएफ शामिल हैं। कंपनी भारत में बड़े दबावयुक्त जल रिएक्टर पर आधारित परमाणु बिजली संयंत्रों की स्थापना के लिए संभावित सहयोग पर विचार कर रही है।

 पांच दशक से अधिक समय से बिजली उत्पादन के क्षेत्र में सक्रिय एनटीपीसी ने पारंपरिक ताप विद्युत उत्पादन से आगे बढ़ते हुए अपने ऊर्जा पोर्टफोलियो का विस्तार किया है। कंपनी अब कोयला, गैस, तरल ईंधन, जलविद्युत और सौर ऊर्जा सहित विभिन्न स्रोतों से बिजली का उत्पादन कर रही है। 91,000 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ एनटीपीसी देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी है। 

यह देश की कुल बिजली मांग का लगभग 25 प्रतिशत पूरा करती है। ऐसे में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में उसका प्रस्तावित विस्तार भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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