पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) से आठवीं, दसवीं व 12 वीं परीक्षा पास करने वाले स्टूडेंट्स के सर्टिफिकेट में गलतियां नहीं होंगी। बोर्ड ने सर्टिफिकेट को गलती फ्रूफ बनाने के लिए नई पहल शुरू की है। स्कूल स्टूडेंट्स का रजिस्ट्रेशन करते वक्त जैसे ही पर्टिकुलर बोर्ड के पोर्टल अपलोड करेंगे वैसे ही पेरेंट्स के मोबाइल पर बोर्ड की तरफ से एक SMS आएगा। उसमें स्टूडेंट्स के सभी पर्टिकुलर होंगे। खास बात यह है कि पर्टिकुलर में करेक्शन के लिए पेरेंट्स या स्कूल संचालकों को अब बोर्ड दफ्तर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सात दिन के भीतर पेरेंट्स को स्कूल में जाकर प्रिंसिपल से मिलना होगा और उन्हें सही जानकारी देकर करेक्शन करवा सकेंगे। PSEB के इस फैसले से सर्टिफिकेट में नाम, पिता का नाम, मां का नाम, डेथ ऑफ बर्थ में किसी तरह की गलतियां नहीं होंगे। बोर्ड के पोर्टल में स्टूडेंट के सही पर्टिकुलर एक बार अपलोड हो जाएंगे वो हमेशा के लिए दर्ज रहेंगे। इससे स्टूडेंट्स व पेरेंट्स से किसी तरह की फीस नहीं वसूली जाएगी। नए सिस्टिम से स्टूडेंट्स को होंगे ये फायदे; जानिए… अभी तक बोर्ड लेता है करेक्शन की फीस यदि स्कूल का प्रिंसिपल रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरते समय ही गलती पकड़ लेता है, तो तय समय सीमा के अंदर गलती सुधारने की फीस प्रति गलती 200 रुपए बोर्ड को जमा करवानी पड़ती है। यदि सर्टिफिकेट जारी होने के 6 महीने के अंदर यह पता चलता है कि गलती स्कूल के क्लर्क से फॉर्म भरते समय हुई थी, तो इसकी फीस केवल ₹50 होती है। यदि स्टूडेंट के नाम, माता-पिता के नाम या जन्म तिथि में सामान्य सुधार करवाना हो, तो बोर्ड की बेस फीस ₹300 से ₹500 के बीच होती है। यदि आप रिजल्ट आने या सर्टिफिकेट मिलने के एक साल या उसके बाद सुधार के लिए अप्लाई करते हैं, तो मुख्य फीस के साथ ₹200 की लेट फीस जुड़ जाती है। इसके बाद भी जितने साल की देरी होगी, हर साल के हिसाब से ₹100 अतिरिक्त जुड़ते जाते हैं। अगर पूरा नाम या माता-पिता का नाम बदलना हो और नया डिजिटल सर्टिफिकेट/मार्कशीट जारी करवाना हो, तो कुल खर्च ₹1000 तक चला जाता है। 26000 स्कूलों के 57 लाख स्टूडेंट्स को मिलेगा फायदा पंजाब में शिक्षा विभाग और PSEB के तहत आने वाले लगभग 19,243 सरकारी स्कूल हैं। इनमें प्राइमरी, मिडल, हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं। इसके अलावा लगभग 7,589 अनएडेड प्राइवेट स्कूल हैं। कुल मिलाकर 26.7 हजार स्कूलों के करीब 50 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स को इसका फायदा मिलेगा। पहली क्लास में दाखिले के साथ ही स्कूलों को बच्चों का पूरा रिकार्ड एडमिशन विड्रोल रजिस्टर में अपलोड करना होगा।


