पुलिस एनकाउंटर में मारे गए आमिर का पोस्टमॉर्टम के बाद जब पुलिस ने शव को परिजनों को सौंपने की कोशिश की तो परिवार ने उसे लेने से साफ इनकार कर दिया। परिजनों का कहना था कि जिस बेटे ने 5 बेगुनाहों की खून बहाया तो उससे उनका कोई रिश्ता नहीं। मामला तब और पेचीदा हो गया जब स्थानीय इमान ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया। इमाम और उसके चाचा ताज मोहम्मद ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया कि ऐसे जघन्य अपराधी के जनाजे की नमाज नहीं पढ़ी जाएगी और न ही उसकी कब्र पर फातिहा पढ़ा जाएगा।
पुलिस की पहल के बाद बदला फैसला
स्थिति को देखते हुए पुलिस खुद अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गई। लेकिन काफी समझाने के बाद परिवार मान गया और सामाजिक दबाव के चलते सुपुर्द-ए-खाक में शामिल होने को तैयार हुआ। पुलिस अधिकारी के अनुसार, पहले परिजन मना कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्होंने ही दफनाने की प्रक्रिया पूरी की।
कैसे हुआ था खौफनाक हत्याकांड
मामला अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र के मीरानपुर इलाके का है। 2 मई को आमिर ने एक महिला और उसके 4 बच्चों की बेरहमी से हत्या कर दी थी। जांच में सामने आया कि वह महिला से शादी कर उसकी जमीन पर कब्जा करना चाहता था। महिला के इनकार करने पर उसने पहले मारपीट की, फिर चारों बच्चों की हत्या कर दी। बाद में महिला को भी मौत के घाट उतार दिया और शव को नाले में फेंक दिया।
शुरुआत में पुलिस को लगा कि महिला ने ही बच्चों की हत्या की है, लेकिन अगले दिन उसका शव मिलने के बाद पूरा मामला पलट गया और जांच में आमिर का नाम सामने आया।
एनकाउंटर में मारा गया आरोपी
पुलिस के मुताबिक, आरोपी को पकड़ने के लिए घेराबंदी की गई थी। नेवतरिया बाईपास के पास जब उसे रोकने की कोशिश की गई, तो उसने भागने की कोशिश की और पुलिस पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में उसके सीने में गोली लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इस मुठभेड़ में एक अधिकारी की बुलेटप्रूफ जैकेट पर गोली लगी, जबकि एक दरोगा और एक सिपाही घायल हो गए।


