हार्ट अटैक का नया कारण! AIIMS के डॉक्टर से जानें कैसे सुबह की ये आदत ब्लड प्रेशर को बना सकती है बम

हार्ट अटैक का नया कारण! AIIMS के डॉक्टर से जानें कैसे सुबह की ये आदत ब्लड प्रेशर को बना सकती है बम

Mouthwash and Heart Health: अक्सर हम मुंह की बदबू दूर करने या दांतों को चमकाने के लिए माउथवॉश का इस्तेमाल करते हैं। विज्ञापन देखकर हमें लगता है कि ये कीटाणुओं को मारकर हमें हेल्दी रख रहा है। लेकिन हाल ही में हुई एक नई वैज्ञानिक रिसर्च ने सबको चौंका दिया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि रोज-रोज माउथवॉश का इस्तेमाल आपके दिल (Heart) का दुश्मन बन सकता है।

आइए, डॉक्टर अरुण एल नाइक (न्यूरोसर्जन) से जानते हैं कि कैसे यह आपके ब्लड प्रेशर को बढ़ा सकता है और आपको हार्ट अटैक के करीब ले जा सकता है।

रिसर्च क्या कहती है?

Frontiers in Cellular and Infection Microbiology में हुई इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पाया कि माउथवॉश में मौजूद क्लोरहेक्सिडीन (Chlorhexidine) नाम का केमिकल मुंह के उस सिस्टम को बिगाड़ देता है जो हमारे शरीर में ब्लड प्रेशर को नॉर्मल रखता है।

कैसे माउथवॉश बढ़ाता है आपका BP?

जैसे गार्डन में पौधों के लिए पानी जरूरी है, वैसे ही हमारी नसों के लिए नाइट्रिक ऑक्साइड गैस जरूरी है। इसे बनाने वाले बैक्टीरिया हमारी जीभ पर रहते हैं। माउथवॉश का ज्यादा इस्तेमाल इन बैक्टीरिया को खत्म कर देता है। जब ये नहीं रहते, तो नसें सख्त होने लगती हैं और ब्लड प्रेशर (BP) हाई हो जाता है।

1 दिन में दिखने लगता है असर

स्टडी में देखा गया कि जिन लोगों ने दिन में दो बार माउथवॉश किया, उनके ब्लड प्रेशर में बहुत जल्दी बढ़ोतरी देखी गई। डॉक्टरों का मानना है कि अगर यह आदत लंबे समय तक बनी रहे, तो इंसान को हाई बीपी की बीमारी हो सकती है, जो आगे चलकर हार्ट अटैक या स्ट्रोक का कारण बनती है।

क्या माउथवॉश बिल्कुल बंद कर दें?

नहीं, लेकिन इसका इस्तेमाल दवा की तरह करना चाहिए। डेंटिस्ट बताते हैं कि अगर आपके मसूड़ों में खून आ रहा है या कोई इंफेक्शन है, तभी इसका इस्तेमाल करें। बिना वजह माउथ फ्रेशनर की तरह रोज इसका इस्तेमाल करना सेहत के साथ खिलवाड़ है।

बचाव के उपाय

  • जीभ की सफाई (Tongue Clean) करें।
  • ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं।
  • बिना अल्कोहल वाला या नेचुरल माउथवॉश चुनें।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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