जमुई की गिद्धेश्वर पहाड़ियों में निओलिथिक रॉक पेंटिंग मिले:वन विभाग के सर्वे में प्रीहिस्टोरिक चित्र दिखे, सांस्कृतिक विरासत को नया आयाम

जमुई की गिद्धेश्वर पहाड़ियों में निओलिथिक रॉक पेंटिंग मिले:वन विभाग के सर्वे में प्रीहिस्टोरिक चित्र दिखे, सांस्कृतिक विरासत को नया आयाम

जमुई जिले की गिद्धेश्वर पहाड़ियों में स्थित शैलाश्रयों (रॉक शेल्टर्स) में नवपाषाण काल से प्रारंभिक इतिहास काल के महत्वपूर्ण शैल चित्रों की खोज की गई है। जमुई वन प्रमंडल के प्रयासों से यह उपलब्धि हासिल हुई है, जिसे क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए एक बड़ी खोज माना जा रहा है।वन विभाग द्वारा किए गए सर्वेक्षण में विभिन्न शैलाश्रयों में प्राचीन मानव द्वारा बनाए गए चित्रों के साक्ष्य मिले हैं। इन शैल चित्रों में मानव जीवन, उनके दैनिक क्रियाकलापों और वन्य जीवों से संबंधित आकृतियों का स्पष्ट चित्रण है। विशेषज्ञों के अनुसार, ये चित्र नवपाषाण काल से प्रारंभिक इतिहास काल के बीच के हैं, जो उस समय की मानव सभ्यता की महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं। स्थायी निवास, कृषि और पशुपालन की शुरुआत हुई थी प्रागैतिहासिक काल मानव इतिहास का वह दौर था जब लिखित अभिलेख उपलब्ध नहीं थे। उस समय मानव अपने विचारों, अनुभवों और परिवेश को शैल चित्रों के माध्यम से व्यक्त करता था। नवपाषाण काल, लगभग 10,000 ईसा पूर्व से 2,000 ईसा पूर्व के बीच का समय, मानव सभ्यता के विकास का एक महत्वपूर्ण चरण रहा है। इसी काल में स्थायी निवास, कृषि और पशुपालन की शुरुआत हुई थी। संरक्षण और संवर्धन के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही वन प्रमंडल जमुई ने इस खोज को क्षेत्र की अमूल्य धरोहर बताया है। विभाग ने इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही है। विभाग का मानना है कि यह खोज न केवल जमुई जिले बल्कि पूरे बिहार राज्य के लिए गर्व का विषय है, जिससे क्षेत्र की प्राचीन सांस्कृतिक पहचान को नई पहचान मिलेगी। इस महत्वपूर्ण सर्वेक्षण का नेतृत्व वन प्रमंडल पदाधिकारी (DFO) तेजस जायसवाल ने किया। उनके साथ फॉरेस्टर मिथिलेश कुमार, वनरक्षक दीपु रविदास, धीरेंद्र कुमार और वन विभाग की टीम के अन्य कर्मियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। जमुई जिले की गिद्धेश्वर पहाड़ियों में स्थित शैलाश्रयों (रॉक शेल्टर्स) में नवपाषाण काल से प्रारंभिक इतिहास काल के महत्वपूर्ण शैल चित्रों की खोज की गई है। जमुई वन प्रमंडल के प्रयासों से यह उपलब्धि हासिल हुई है, जिसे क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए एक बड़ी खोज माना जा रहा है।वन विभाग द्वारा किए गए सर्वेक्षण में विभिन्न शैलाश्रयों में प्राचीन मानव द्वारा बनाए गए चित्रों के साक्ष्य मिले हैं। इन शैल चित्रों में मानव जीवन, उनके दैनिक क्रियाकलापों और वन्य जीवों से संबंधित आकृतियों का स्पष्ट चित्रण है। विशेषज्ञों के अनुसार, ये चित्र नवपाषाण काल से प्रारंभिक इतिहास काल के बीच के हैं, जो उस समय की मानव सभ्यता की महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं। स्थायी निवास, कृषि और पशुपालन की शुरुआत हुई थी प्रागैतिहासिक काल मानव इतिहास का वह दौर था जब लिखित अभिलेख उपलब्ध नहीं थे। उस समय मानव अपने विचारों, अनुभवों और परिवेश को शैल चित्रों के माध्यम से व्यक्त करता था। नवपाषाण काल, लगभग 10,000 ईसा पूर्व से 2,000 ईसा पूर्व के बीच का समय, मानव सभ्यता के विकास का एक महत्वपूर्ण चरण रहा है। इसी काल में स्थायी निवास, कृषि और पशुपालन की शुरुआत हुई थी। संरक्षण और संवर्धन के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही वन प्रमंडल जमुई ने इस खोज को क्षेत्र की अमूल्य धरोहर बताया है। विभाग ने इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही है। विभाग का मानना है कि यह खोज न केवल जमुई जिले बल्कि पूरे बिहार राज्य के लिए गर्व का विषय है, जिससे क्षेत्र की प्राचीन सांस्कृतिक पहचान को नई पहचान मिलेगी। इस महत्वपूर्ण सर्वेक्षण का नेतृत्व वन प्रमंडल पदाधिकारी (DFO) तेजस जायसवाल ने किया। उनके साथ फॉरेस्टर मिथिलेश कुमार, वनरक्षक दीपु रविदास, धीरेंद्र कुमार और वन विभाग की टीम के अन्य कर्मियों ने सक्रिय भूमिका निभाई।  

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