NEET छात्रा के कपड़े पर स्पर्म किसका, बॉडी किसने नोची?:30 लोगों का DNA टेस्ट, 4 अफसर बदले, CBI बोली-सबूत नहीं, आखिर केस क्यों नहीं सुलझा

NEET छात्रा के कपड़े पर स्पर्म किसका, बॉडी किसने नोची?:30 लोगों का DNA टेस्ट, 4 अफसर बदले, CBI बोली-सबूत नहीं, आखिर केस क्यों नहीं सुलझा

NEET स्टूडेंट के कातिल कौन हैं? इसका जवाब शायद अब नहीं मिलेगा। क्योंकि देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी CBI किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है। CBI की क्लोजर रिपोर्ट ने एक बार फिर 27 साल पुराने शिल्पी-गौतम हत्याकांड की याद ताजा दिला दी है। उस केस में भी इसी केस की तरह CBI ने लंबी जांच के बाद पुलिस की लाइन को ही आगे बढ़ाया था। आज के बूझे की नाही में समझिए, कैसे पटना पुलिस और CBI ने NEET स्टूडेंट के रेप-मर्डर मामले को शिल्पी-गौतम हत्याकांड की तरह दबा दिया…। NEET स्टूडेंट केस हो या शिल्पी-गौतम हत्याकांड, दोनों में पुलिस की शुरुआती जांच और कार्रवाई सवालों के घेरे में रही। सबूतों को समय पर सुरक्षित नहीं किया गया, घटनास्थल से अहम कड़ियां गायब रहीं और केस की दिशा तय करने में देर होती रही। शिल्पी-गौतम हत्याकांडः बिना पोस्टमार्टम पुलिस ने बता दिया सुसाइड 3 जुलाई, 1999, नीले सूट में, कंधे पर बैग टांगे शिल्पी जैन रिक्शे पर बैठकर कोचिंग के लिए निकल रही थी। शिल्पी ‘मिस पटना’ रह चुकी थी। वह गौतम की दोस्त थी। रिक्शा अभी उसके घर के कनाल रोड के मोड़ पर पहुंचा ही था कि पीछे से एक सफेद कार धीरे-धीरे पास आई। अंदर से एक जानी-पहचानी आवाज आई- ‘अरे शिल्पी! रिक्शे में क्यों? मेरी गाड़ी में बैठो, छोड़ देता हूं।’ वो गौतम सिंह का दोस्त था। शिल्पी को गौतम पर भरोसा था और उसके दोस्तों पर भी। ‘अच्छा, बस पास तक छोड़ देना’, उसने मुस्कुराते हुए कहा और रिक्शा रुकवा दिया। वो कार में बैठ गई। शुरुआत में सब सामान्य था- कार उसी दिशा में बढ़ी, जहां शिल्पी की कोचिंग थी, लेकिन कुछ मिनट बाद, उसने देखा कि रास्ता बदल गया है। गाड़ी अब शहर से बाहर की तरफ मुड़ चुकी थी। ‘ये रास्ता तो नहीं है मेरे इंस्टीट्यूट का…?’, उसने हैरान होकर पूछा। बगल में बैठा गौतम का दोस्त मुस्कुराया, बोला- ‘अरे, घबराओ मत। वाल्मी गेस्ट हाउस चल रहे हैं। गौतम वहीं है, उसने बुलाया है। कुछ जरूरी बात करनी है।’ उधर, गौतम सिंह को किसी ने बताया, ‘शिल्पी को वाल्मी गेस्ट हाउस ले जाया गया है।’ वो सन्न रह गया। दौड़ा-भागा वहां पहुंचा। पहली मंजिल पर पहुंचा तो गौतम की सांस रुक गई। वो दरवाजे की ओर भागा। दरवाजा आधा खुला था। कमरे में शिल्पी थी- उसके कपड़े आधे फटे हुए, चेहरा आंसुओं से भीगा हुआ। चारों तरफ कुछ लोग खड़े थे- वही चेहरे, जिन्हें गौतम अक्सर अपने साथ राजनीति के दांव-पेच में देखता था। वो लोग अब जानवर बन चुके थे। गौतम ने चिल्लाकर कहा, ‘रुको! छोड़ दो उसे!’ लेकिन उसकी आवाज उनकी गंदी हंसी में गुम हो गई। उसने झपटकर शिल्पी की ओर बढ़ने की कोशिश की, मगर पीछे से किसी ने उसे पकड़ लिया। और अगले ही पल, पहला मुक्का उसके चेहरे पर पड़ा। गौतम लड़ने की कोशिश करता रहा, पर हर तरफ से लातें और घूसे पड़ने लगे। वो बार-बार गिरता, उठता, फिर गिरता। सामने, वही लोग शिल्पी के साथ दरिंदगी करते रहे- और वो कुछ नहीं कर पाया। किसी ने पास रखे गिलास में कुछ मिलाया- कोई कड़वी-सी चीज, शायद जहर। थोड़ी देर बाद वही गिलास शिल्पी के होठों पर लगाया गया। वो बेहोश हो चुकी थी। कमरे में सन्नाटा छा गया। सिर्फ पंखे की आवाज रह गई। दो लोग फर्श पर पड़े थे। (…लोगों की चर्चाओं के आधार पर तब के अखबारों में ऐसा ही छपा था।) गैराज में मिली शिल्पी-गौतम की अर्ध नग्न लाश इधर, घर नहीं पहुंची शिल्पी तो घरवालों ने गांधी मैदान थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। थोड़ी ही देर में पुलिस साधु यादव के क्वार्टर के बाहर पहुंची। वहां पुलिस से पहले कुछ लोग जमा थे- कुछ चौकीदार, कुछ स्थानीय लोग। फुलवारी शरीफ के उस पुराने MLA क्वार्टर के पीछे एक गैराज था- आधा टूटा-फूटा, जिसमें अक्सर सफेद गाड़ियां पॉलिश होती थीं। इसके भीतर से पेट्रोल और धुएं की तेज गंध आ रही थी। थानेदार ने टॉर्च जलाया और धीरे से अंदर कदम रखा। पहली नजर में लगा, कोई हादसा हुआ है, लेकिन जैसे ही रोशनी वहां खड़ी कार के भीतर पड़ी- सबके होश उड़ गए। सामने सफेद कार खड़ी थी। अंदर दो शव पड़े थे- गौतम सिंह और शिल्पी जैन के। गौतम के शरीर पर सिर्फ पैंट थी। बगल में शिल्पी पड़ी थी- उसके ऊपरी हिस्से पर सिर्फ एक टी-शर्ट थी, जो साफ तौर पर गौतम की थी। बाकी कपड़े गायब थे। थानेदार कुछ पल के लिए चुप रहा, लेकिन इससे पहले कि पुलिस और जांच करती, एक जोरदार शोर उठा- गेट के बाहर कुछ गाड़ियों की हेडलाइटें चमक उठीं और भीड़ उमड़ आई। एक गाड़ी के बाहर से भारी आवाज सुनाई दी- ‘क्या हो रहा है यहां? वो साधु यादव थे। पुलिस वालों ने झटपट सलाम ठोका। थानेदार कुछ कहने ही वाला था कि साधु ने इशारे से बात रोक दी। ‘लाश मिली है?’ थानेदार ने सिर झुका लिया, ‘जी… कार में…’ साधु कुछ पल कार की ओर देखते रहे। ‘जांच करो… जो करना है, करो’, उन्होंने कहा, और पीछे हट गए। अब गैराज के भीतर सिर्फ पुलिस थी और दो बेजान जिस्म। एक पुलिस वाले ने धीरे से कहा, ‘गाड़ी को थाने ले चलते हैं।’ ‘लेकिन सर, फिंगर प्रिंट्स…’थानेदार ने डांट दिया, ‘ज्यादा दिमाग मत लगाओ।’ गाड़ी स्टार्ट की गई और थाने ले जाई गई- उसी वक्त दोनों के शरीर भी पोस्टमॉर्टम के लिए भेजे गए। रात के साढ़े 9 बज चुके थे। एक रिपोर्टर ने अफसर से पूछा, ‘साहब, ये मर्डर है या एक्सीडेंट?’ अफसर ने कहा- ना, ना, आत्महत्या लग रही है।’ ‘लेकिन पोस्टमॉर्टम तो हुआ नहीं अभी?’ ‘हम इतने केस देख चुके हैं कि पहली नजर में समझ जाते हैं मौत कैसे हुई।’ अफसर ने जवाब दिया, और किसी को भी अंदर जाने से रोक दिया। रात गहराती गई। पोस्टमॉर्टम उसी रात किया गया, जल्दबाजी में, बिना परिजनों की मौजूदगी के। रात में ही गौतम का अंतिम संस्कार कर दिया गया। NEET स्टूडेंट हत्याकांडः घटना स्थल पर 3 दिन बाद पहुंची पुलिस शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET छात्रा के रेप-मौत मामले की सूचना मिलने के बाद भी 3 दिन तक थाना प्रभारी रोशनी कुमारी घटनास्थल पर पहुंचीं ही नहीं। परिजनों का दावा- कपड़े पर लगा था खून, डॉक्टर ने फेंक दिया परिजनों ने दावा किया- सबसे पहले उनकी बच्ची को हॉस्टल के पास सहज सर्जरी में भर्ती कराया गया। वहां से एक निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां के एक जूनियर डॉक्टर और अस्पताल के स्टाफ ने हमें बताया कि पीड़िता के कपड़े पर खून लगा था। जब हमने बच्ची का कपड़ा मांगा तो डॉक्टर ने थानेदार और हॉस्टल संचालक की मौजूदगी में कहा-फेंक दिया हूं। डॉक्टर ने कहा-तुम्हें बच्ची को बचाना है या उसका कपड़ा रखना है? NEET स्टूडेंट केस हो या शिल्पी-गौतम हत्याकांड। राजनीतिक बयान देर से आए, वो भी औपचारिक। न तत्काल जवाबदेही तय हुई, न अफसरों पर कार्रवाई। सिस्टम ने पहले खुद को बचाया, पीड़ितों को नहीं। शिल्पी गौतम हत्याकांडः पुलिस से पहले पहुंच गए लोग द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों कपल की बॉडी गराज में मिली थी। इस घटना की सूचना मिलते ही वहां पुलिस से पहले तत्कालीन RJD विधायक साधु यादव के समर्थक पहुंच गए और हंगामा करने लगे। नारेबाजी करने लगे। NEET स्टूडेंट हत्याकांडः 3 दिन तक ना कमरा सील हुआ ना हॉस्टल 6 जनवरी 2026 को NEET की तैयारी कर रही छात्रा पटना के शंभू हॉस्टल के कमरे में बेहोश मिली। हॉस्टल के कर्मचारी हॉस्पिटल ले गए। एक हॉस्पिटल, दो हॉस्पिटल और फिर तीसरे हॉस्पिटल में मौत। 6 जनवरी से 9 जनवरी तक चले इस घटनाक्रम में पुलिस सीन से गायब रही। लोगों का आक्रोश भड़का। 15 जनवरी को पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई, जिसमें लिखा था-रेप की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके बाद मीडिया ने पुलिस पर सवाल उठाये तो DGP ने जांच के लिए SIT बनाई। दोनों ही मामलों में पीड़ित परिवार इंसाफ के लिए सड़क पर उतरे। मीडिया, सोशल मीडिया और जन दबाव के बिना जांच आगे बढ़ती नहीं दिखी। और नतीजा सिफर ही रहा। शिल्पी गौतम हत्याकांडः 4 साल बाद CBI ने जहर खाकर आत्महत्या बताया पुलिस के बिना जांच किए सुसाइड करार देने पर विपक्ष सड़क पर उतर गया। प्रदर्शन शुरू हो गए। पटना की गलियां नारों से गूंज उठीं-‘साधु यादव को नहीं बख्शा जाएगा!’ राबड़ी देवी पर दबाव बढ़ा। आखिरकार, सितंबर 1999 में मामला CBI को ट्रांसफर कर दिया गया। द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, CBI से पहले पटना पुलिस ने भी शुरुआती जांच में बताया था कि शिल्पी और गौतम की मौत सेक्स के दौरान हुई है। कार बंद थी। एसी ऑन था। संबंध बनाने के दौरान उन्हें घुटन होने लगी। कार में कार्बन मोनोऑक्साइड गैस फैल गया। दम घुटने की वजह से दोनों की मौत हो गई। NEET स्टूडेंट हत्याकांडः पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पहले पुलिस ने बताया सुसाइड छात्रा की मौत के बाद 14 जनवरी को पटना SSP कार्तिकेय शर्मा ने कहा, ‘नींद की गोली के ओवरडोज से छात्रा की मौत हुई है।’ इस पर हंगामा बढ़ा। लोगों ने प्रदर्शन किया। अपर लोक अभियोजक सुरेश प्रसाद ने बताया, ‘ CBI ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करते हुए कहा है कि इस मामले में किसी के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला है।’ पुलिस की जांच से आगे नहीं बढ़ पाई CBI 12 फरवरी को केस टेकओवर करने के बाद पवन कुमार इस केस के आईओ यानी जांच अधिकारी बने। फिर बाद में विभा कुमारी को आईओ बनाया गया। पटना पुलिस ने जितनी जांच कर CBI को दी थी, उससे एक कदम भी आगे सीबीआई की जांच नहीं पहुंची। करीब 30 लोगों का डीएनए टेस्ट लिया गया था, पर छात्रा के कपड़े पर मिले स्पर्म के डीएनए से किसी का मेल नहीं खाया। मां का बयान तक दर्ज नहीं CBI ने जब जांच हाथ में ली, तब शुरुआत में पॉक्सो एक्ट तक नहीं लगाया गया था। कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद जांच एजेंसी ने पॉक्सो की धाराएं जोड़ीं। इसके बावजूद कानूनन अनिवार्य होने के बाद भी छात्रा की मां का बयान तक दर्ज नहीं किया गया। CBI की क्लोजर रिपोर्ट पर 13 अक्तूबर 2026 को पटना की पॉक्सो अदालत में सुनवाई हुई। विशेष न्यायाधीश राजीव रंजन रमन ने CBI को 68 और छात्रा की मां से 39 सवालों का जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर को होगी। सबसे बड़ा सवाल- छात्रा के कपड़े पर स्पर्म किसके थे? उसके शरीर पर नोचने के निशान किसके थे? NEET स्टूडेंट के कातिल कौन हैं? इसका जवाब शायद अब नहीं मिलेगा। क्योंकि देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी CBI किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है। CBI की क्लोजर रिपोर्ट ने एक बार फिर 27 साल पुराने शिल्पी-गौतम हत्याकांड की याद ताजा दिला दी है। उस केस में भी इसी केस की तरह CBI ने लंबी जांच के बाद पुलिस की लाइन को ही आगे बढ़ाया था। आज के बूझे की नाही में समझिए, कैसे पटना पुलिस और CBI ने NEET स्टूडेंट के रेप-मर्डर मामले को शिल्पी-गौतम हत्याकांड की तरह दबा दिया…। NEET स्टूडेंट केस हो या शिल्पी-गौतम हत्याकांड, दोनों में पुलिस की शुरुआती जांच और कार्रवाई सवालों के घेरे में रही। सबूतों को समय पर सुरक्षित नहीं किया गया, घटनास्थल से अहम कड़ियां गायब रहीं और केस की दिशा तय करने में देर होती रही। शिल्पी-गौतम हत्याकांडः बिना पोस्टमार्टम पुलिस ने बता दिया सुसाइड 3 जुलाई, 1999, नीले सूट में, कंधे पर बैग टांगे शिल्पी जैन रिक्शे पर बैठकर कोचिंग के लिए निकल रही थी। शिल्पी ‘मिस पटना’ रह चुकी थी। वह गौतम की दोस्त थी। रिक्शा अभी उसके घर के कनाल रोड के मोड़ पर पहुंचा ही था कि पीछे से एक सफेद कार धीरे-धीरे पास आई। अंदर से एक जानी-पहचानी आवाज आई- ‘अरे शिल्पी! रिक्शे में क्यों? मेरी गाड़ी में बैठो, छोड़ देता हूं।’ वो गौतम सिंह का दोस्त था। शिल्पी को गौतम पर भरोसा था और उसके दोस्तों पर भी। ‘अच्छा, बस पास तक छोड़ देना’, उसने मुस्कुराते हुए कहा और रिक्शा रुकवा दिया। वो कार में बैठ गई। शुरुआत में सब सामान्य था- कार उसी दिशा में बढ़ी, जहां शिल्पी की कोचिंग थी, लेकिन कुछ मिनट बाद, उसने देखा कि रास्ता बदल गया है। गाड़ी अब शहर से बाहर की तरफ मुड़ चुकी थी। ‘ये रास्ता तो नहीं है मेरे इंस्टीट्यूट का…?’, उसने हैरान होकर पूछा। बगल में बैठा गौतम का दोस्त मुस्कुराया, बोला- ‘अरे, घबराओ मत। वाल्मी गेस्ट हाउस चल रहे हैं। गौतम वहीं है, उसने बुलाया है। कुछ जरूरी बात करनी है।’ उधर, गौतम सिंह को किसी ने बताया, ‘शिल्पी को वाल्मी गेस्ट हाउस ले जाया गया है।’ वो सन्न रह गया। दौड़ा-भागा वहां पहुंचा। पहली मंजिल पर पहुंचा तो गौतम की सांस रुक गई। वो दरवाजे की ओर भागा। दरवाजा आधा खुला था। कमरे में शिल्पी थी- उसके कपड़े आधे फटे हुए, चेहरा आंसुओं से भीगा हुआ। चारों तरफ कुछ लोग खड़े थे- वही चेहरे, जिन्हें गौतम अक्सर अपने साथ राजनीति के दांव-पेच में देखता था। वो लोग अब जानवर बन चुके थे। गौतम ने चिल्लाकर कहा, ‘रुको! छोड़ दो उसे!’ लेकिन उसकी आवाज उनकी गंदी हंसी में गुम हो गई। उसने झपटकर शिल्पी की ओर बढ़ने की कोशिश की, मगर पीछे से किसी ने उसे पकड़ लिया। और अगले ही पल, पहला मुक्का उसके चेहरे पर पड़ा। गौतम लड़ने की कोशिश करता रहा, पर हर तरफ से लातें और घूसे पड़ने लगे। वो बार-बार गिरता, उठता, फिर गिरता। सामने, वही लोग शिल्पी के साथ दरिंदगी करते रहे- और वो कुछ नहीं कर पाया। किसी ने पास रखे गिलास में कुछ मिलाया- कोई कड़वी-सी चीज, शायद जहर। थोड़ी देर बाद वही गिलास शिल्पी के होठों पर लगाया गया। वो बेहोश हो चुकी थी। कमरे में सन्नाटा छा गया। सिर्फ पंखे की आवाज रह गई। दो लोग फर्श पर पड़े थे। (…लोगों की चर्चाओं के आधार पर तब के अखबारों में ऐसा ही छपा था।) गैराज में मिली शिल्पी-गौतम की अर्ध नग्न लाश इधर, घर नहीं पहुंची शिल्पी तो घरवालों ने गांधी मैदान थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। थोड़ी ही देर में पुलिस साधु यादव के क्वार्टर के बाहर पहुंची। वहां पुलिस से पहले कुछ लोग जमा थे- कुछ चौकीदार, कुछ स्थानीय लोग। फुलवारी शरीफ के उस पुराने MLA क्वार्टर के पीछे एक गैराज था- आधा टूटा-फूटा, जिसमें अक्सर सफेद गाड़ियां पॉलिश होती थीं। इसके भीतर से पेट्रोल और धुएं की तेज गंध आ रही थी। थानेदार ने टॉर्च जलाया और धीरे से अंदर कदम रखा। पहली नजर में लगा, कोई हादसा हुआ है, लेकिन जैसे ही रोशनी वहां खड़ी कार के भीतर पड़ी- सबके होश उड़ गए। सामने सफेद कार खड़ी थी। अंदर दो शव पड़े थे- गौतम सिंह और शिल्पी जैन के। गौतम के शरीर पर सिर्फ पैंट थी। बगल में शिल्पी पड़ी थी- उसके ऊपरी हिस्से पर सिर्फ एक टी-शर्ट थी, जो साफ तौर पर गौतम की थी। बाकी कपड़े गायब थे। थानेदार कुछ पल के लिए चुप रहा, लेकिन इससे पहले कि पुलिस और जांच करती, एक जोरदार शोर उठा- गेट के बाहर कुछ गाड़ियों की हेडलाइटें चमक उठीं और भीड़ उमड़ आई। एक गाड़ी के बाहर से भारी आवाज सुनाई दी- ‘क्या हो रहा है यहां? वो साधु यादव थे। पुलिस वालों ने झटपट सलाम ठोका। थानेदार कुछ कहने ही वाला था कि साधु ने इशारे से बात रोक दी। ‘लाश मिली है?’ थानेदार ने सिर झुका लिया, ‘जी… कार में…’ साधु कुछ पल कार की ओर देखते रहे। ‘जांच करो… जो करना है, करो’, उन्होंने कहा, और पीछे हट गए। अब गैराज के भीतर सिर्फ पुलिस थी और दो बेजान जिस्म। एक पुलिस वाले ने धीरे से कहा, ‘गाड़ी को थाने ले चलते हैं।’ ‘लेकिन सर, फिंगर प्रिंट्स…’थानेदार ने डांट दिया, ‘ज्यादा दिमाग मत लगाओ।’ गाड़ी स्टार्ट की गई और थाने ले जाई गई- उसी वक्त दोनों के शरीर भी पोस्टमॉर्टम के लिए भेजे गए। रात के साढ़े 9 बज चुके थे। एक रिपोर्टर ने अफसर से पूछा, ‘साहब, ये मर्डर है या एक्सीडेंट?’ अफसर ने कहा- ना, ना, आत्महत्या लग रही है।’ ‘लेकिन पोस्टमॉर्टम तो हुआ नहीं अभी?’ ‘हम इतने केस देख चुके हैं कि पहली नजर में समझ जाते हैं मौत कैसे हुई।’ अफसर ने जवाब दिया, और किसी को भी अंदर जाने से रोक दिया। रात गहराती गई। पोस्टमॉर्टम उसी रात किया गया, जल्दबाजी में, बिना परिजनों की मौजूदगी के। रात में ही गौतम का अंतिम संस्कार कर दिया गया। NEET स्टूडेंट हत्याकांडः घटना स्थल पर 3 दिन बाद पहुंची पुलिस शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET छात्रा के रेप-मौत मामले की सूचना मिलने के बाद भी 3 दिन तक थाना प्रभारी रोशनी कुमारी घटनास्थल पर पहुंचीं ही नहीं। परिजनों का दावा- कपड़े पर लगा था खून, डॉक्टर ने फेंक दिया परिजनों ने दावा किया- सबसे पहले उनकी बच्ची को हॉस्टल के पास सहज सर्जरी में भर्ती कराया गया। वहां से एक निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां के एक जूनियर डॉक्टर और अस्पताल के स्टाफ ने हमें बताया कि पीड़िता के कपड़े पर खून लगा था। जब हमने बच्ची का कपड़ा मांगा तो डॉक्टर ने थानेदार और हॉस्टल संचालक की मौजूदगी में कहा-फेंक दिया हूं। डॉक्टर ने कहा-तुम्हें बच्ची को बचाना है या उसका कपड़ा रखना है? NEET स्टूडेंट केस हो या शिल्पी-गौतम हत्याकांड। राजनीतिक बयान देर से आए, वो भी औपचारिक। न तत्काल जवाबदेही तय हुई, न अफसरों पर कार्रवाई। सिस्टम ने पहले खुद को बचाया, पीड़ितों को नहीं। शिल्पी गौतम हत्याकांडः पुलिस से पहले पहुंच गए लोग द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों कपल की बॉडी गराज में मिली थी। इस घटना की सूचना मिलते ही वहां पुलिस से पहले तत्कालीन RJD विधायक साधु यादव के समर्थक पहुंच गए और हंगामा करने लगे। नारेबाजी करने लगे। NEET स्टूडेंट हत्याकांडः 3 दिन तक ना कमरा सील हुआ ना हॉस्टल 6 जनवरी 2026 को NEET की तैयारी कर रही छात्रा पटना के शंभू हॉस्टल के कमरे में बेहोश मिली। हॉस्टल के कर्मचारी हॉस्पिटल ले गए। एक हॉस्पिटल, दो हॉस्पिटल और फिर तीसरे हॉस्पिटल में मौत। 6 जनवरी से 9 जनवरी तक चले इस घटनाक्रम में पुलिस सीन से गायब रही। लोगों का आक्रोश भड़का। 15 जनवरी को पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई, जिसमें लिखा था-रेप की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके बाद मीडिया ने पुलिस पर सवाल उठाये तो DGP ने जांच के लिए SIT बनाई। दोनों ही मामलों में पीड़ित परिवार इंसाफ के लिए सड़क पर उतरे। मीडिया, सोशल मीडिया और जन दबाव के बिना जांच आगे बढ़ती नहीं दिखी। और नतीजा सिफर ही रहा। शिल्पी गौतम हत्याकांडः 4 साल बाद CBI ने जहर खाकर आत्महत्या बताया पुलिस के बिना जांच किए सुसाइड करार देने पर विपक्ष सड़क पर उतर गया। प्रदर्शन शुरू हो गए। पटना की गलियां नारों से गूंज उठीं-‘साधु यादव को नहीं बख्शा जाएगा!’ राबड़ी देवी पर दबाव बढ़ा। आखिरकार, सितंबर 1999 में मामला CBI को ट्रांसफर कर दिया गया। द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, CBI से पहले पटना पुलिस ने भी शुरुआती जांच में बताया था कि शिल्पी और गौतम की मौत सेक्स के दौरान हुई है। कार बंद थी। एसी ऑन था। संबंध बनाने के दौरान उन्हें घुटन होने लगी। कार में कार्बन मोनोऑक्साइड गैस फैल गया। दम घुटने की वजह से दोनों की मौत हो गई। NEET स्टूडेंट हत्याकांडः पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पहले पुलिस ने बताया सुसाइड छात्रा की मौत के बाद 14 जनवरी को पटना SSP कार्तिकेय शर्मा ने कहा, ‘नींद की गोली के ओवरडोज से छात्रा की मौत हुई है।’ इस पर हंगामा बढ़ा। लोगों ने प्रदर्शन किया। अपर लोक अभियोजक सुरेश प्रसाद ने बताया, ‘ CBI ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करते हुए कहा है कि इस मामले में किसी के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला है।’ पुलिस की जांच से आगे नहीं बढ़ पाई CBI 12 फरवरी को केस टेकओवर करने के बाद पवन कुमार इस केस के आईओ यानी जांच अधिकारी बने। फिर बाद में विभा कुमारी को आईओ बनाया गया। पटना पुलिस ने जितनी जांच कर CBI को दी थी, उससे एक कदम भी आगे सीबीआई की जांच नहीं पहुंची। करीब 30 लोगों का डीएनए टेस्ट लिया गया था, पर छात्रा के कपड़े पर मिले स्पर्म के डीएनए से किसी का मेल नहीं खाया। मां का बयान तक दर्ज नहीं CBI ने जब जांच हाथ में ली, तब शुरुआत में पॉक्सो एक्ट तक नहीं लगाया गया था। कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद जांच एजेंसी ने पॉक्सो की धाराएं जोड़ीं। इसके बावजूद कानूनन अनिवार्य होने के बाद भी छात्रा की मां का बयान तक दर्ज नहीं किया गया। CBI की क्लोजर रिपोर्ट पर 13 अक्तूबर 2026 को पटना की पॉक्सो अदालत में सुनवाई हुई। विशेष न्यायाधीश राजीव रंजन रमन ने CBI को 68 और छात्रा की मां से 39 सवालों का जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर को होगी। सबसे बड़ा सवाल- छात्रा के कपड़े पर स्पर्म किसके थे? उसके शरीर पर नोचने के निशान किसके थे?  

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