बाड़मेर जिले में बुधवार दोपहर बाद शाम 4 बजे अचानक मौसम बदल गया। आसमान में काली घटाएं छा गईं। मेघगर्जना शुरू हो गई। देखते ही देखते ग्रामीण इलाकों में तेज, भीषण अंधड़ के साथ तूफानी बारिश शुरू हुई। इससे ग्रामीण इलाकों में जबरदस्त नुकसान हुआ। खेतों में पड़ी कटी फसलें पानी में डूब गईं। जगह-जगह पेड़ और बिजली पोल टूट गए। इससे बिजली सप्लाई बाधित हो गई। ग्रामीणों को अंधेरे में ही रात गुजारनी पड़ी। गरल, हाथीतला, सनावड़ा, मूढ़ों का तला, कगाऊ समेत कई गांवों में तूफानी हवा के साथ हुई बारिश से जबरदस्त नुकसान हुआ। बाड़मेर शहर में हल्की बूंदाबांदी हुई। शहर में किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ। जबकि गांवों में जमकर तबाही मचाई। मौसम विभाग को इस तूफान की कोई जानकारी नहीं थी। विडम्बना रही कि तूफान आने के बाद जब मौसम साफ हुआ, उसके बाद यलो अलर्ट जारी किया गया। दो बार 60 से 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली तेज हवाएं, पेड़ और पोल गिराए बुधवार शाम को अचानक बदले मौसम के बाद तूफान ने ग्रामीण इलाकों में जमकर तबाही मचाई। मौसम विभाग अलर्ट देने में फेल साबित रहा। शाम 4.45 बजे ग्रामीण इलाकों में भीषण अंधड़ के साथ बारिश का दौर शुरू हुआ। यह करीब दो बार आया। यह अलग-अलग दौर में आया। इस दौरान हवा की रफ्तार करीब 60-80 किमी प्रति घंटा रही। इससे सैकड़ों पेड़ गिर गए। बिजली पोलों को भी नुकसान पहुंचा। मौसम विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। मौसम विभाग ने 6.18 बजे येलो अलर्ट जारी किया। इसमें जैसलमेर, बाड़मेर, बालोतरा, जोधपुर, बीकानेर, फलौदी आदि जिले शामिल रहे। फसलों को नुकसान किसान इन दिनों जली हुई फसल की कटाई कर उसे खेतों में रखे हुए थे। अचानक आए तूफान और बारिश से हाथीतला स्टेशन, डूंगेरो का तला, सनावड़ा, मूढ़ों का तला, गरल, कगाऊ, बूठ जेतमाल सहित कई गांवों में खेतों में कटी फसलें तेज अंधड़ में उड़ गईं। कई जगह वे पानी में डूबकर खराब हो गईं।

