मप्र के सरकारी विभागों, निगम-मंडलों, बोर्डों और स्थानीय निकायों में काम कर रहे करीब 8 लाख आउटसोर्स और ठेका कर्मचारियों को अब नियमित बोनस देना होगा। यह नियम पहले से है, लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा था। इसको लेकर कर्मचारी संगठन बार-बार मांग कर रहे थे। इस पर श्रम विभाग की विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी पी. जैसमीन अली सितारा ने श्रमायुक्त को पत्र जारी कर कार्रवाई करने और उसकी जानकारी विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इसके दायरे में मप्र में काम करने वाली करीब 5 हजार एजेंसियां आ जाएंगी। इससे सरकारी खजाने पर कोई अप्रत्याशित अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। नियमानुसार सरकारी टेंडर में मैनपावर के लिए जो बजट स्वीकृत होता है, उसमें श्रम कानूनों के तहत वैधानिक देयताएं (न्यूनतम वेतन, ईपीएफ, ईएसआईसी और बोनस) पहले से ही नीतिगत रूप से सम्मिलित मानी जाती हैं। इस मामले में सबसे अधिक मैन पॉवर सप्लाई करने वाले सेडमैप ने इस निर्णय को सही बताया और कहा कि इससे कर्मचारियों का फायदा हाेगा। कर्मचारी संगठन कर रहे थे मांग… टेंडर में पहले से शामिल है बोनस का प्रावधान नियम क्या है और धरातल पर क्या हो रहा है? बोनस भुगतान अधिनियम 1965 के तहत 21 हजार रुपए तक मूल वेतन पाने वाले व वर्ष में कम से कम 30 दिन काम करने वाले हर श्रमिक को न्यूनतम 8.33% यानी अधिकतम 7 हजार रुपए वार्षिक बोनस पाने का कानूनी अधिकार है। ठेका श्रम अधिनियम, 1970 के अनुसार यदि ठेकेदार या एजेंसी भुगतान में विफल रहती है, तो मुख्य नियोक्ता की सीधी जिम्मेदारी बनती है। इसलिए नहीं मिलता है कर्मचारियों को बोनस विभागों का तर्क है कि एजेंसी बोनस का क्लेम करेगी तो भुगतान होगा। लेकिन, सेडमैप और निजी मैनपावर फर्में बिलों में बोनस मांगती ही नहीं हैं। आरोप हैं कि कई जगह कागजों पर अधिक कर्मचारी दिखाकर कम लोगों से काम लिया जाता है और पीएफ व ईएसआईसी में भी हेरफेर होता है। जब हक मांगा तो हुई यह कार्रवाई मप्र के अलग-अलग जिलों में आउटसोर्स कर्मचारियों ने बोनस और पूरा वेतन मांगा तो उन पर कार्रवाई हो गई। नरसिंहपुर में 7 कर्मचारियों को सीधे काम से हटा दिया गया। ग्वालियर में अस्पताल में विरोध जताने पर 18 कर्मचारियों को सेवा से पृथक कर दिया गया। इन विभागों में सबसे ज्यादा कर्मचारी लंबे समय से पत्राचार कर रहे थे, अब जाकर निर्देश हुए। अभी केवल बिजली कंपनियों और पर्यटन निगम में काम करने वालों को ही बोनस मिल रहा है। यदि इसका पालन नहीं होगा, तो आंदोलन किया जाएगा। -अनिल वाजपेयी, प्रांताध्यक्ष, सेमी गवर्मेंट एम्पलाइज फेडरेशन

