जमुई जिले को पूरी तरह नक्सल मुक्त घोषित किए जाने के बाद सुरक्षा बलों ने बिहार-झारखंड सीमा से सटे विशनपुर-रुझनिया के जंगली इलाके में एक नक्सली स्मारक को जेसीबी मशीन से ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई मंगलवार को चलाए गए एक सघन सर्च अभियान के दौरान की गई, जिसका उद्देश्य नक्सलियों की बची-खुची पहचान को मिटाना है। नक्सली संगठन अपने मारे गए सदस्यों को ‘शहीद’ का दर्जा देते थे। उनके अंतिम संस्कार के बाद, वे जंगलों में ऐसे स्मारक बनाते थे और हर साल उन्हें याद करते थे। ये स्मारक नक्सलियों की गतिविधियों और उनके प्रभाव के प्रतीक माने जाते थे। नक्सलियों की शेष मौजूदगी का संकेत खत्म
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन स्मारकों के ध्वस्तीकरण से न केवल नक्सलियों की शेष मौजूदगी का संकेत खत्म होगा, बल्कि इलाके में उनकी वैचारिक पकड़ भी कमजोर पड़ेगी। इसी उद्देश्य से अभियान चलाकर ऐसे सभी प्रतीकों को मिटाया जा रहा है। चरका पत्थर थाना अध्यक्ष रंजीत कुमार ने बताया कि सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों की अंतिम निशानी के रूप में बने इस स्मारक को चिन्हित किया गया था। बाद में इसे जेसीबी की मदद से पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। विकास कार्यों को और गति दी जाएगी
इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर भरोसा और मजबूत हुआ है। प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में विकास कार्यों को और गति दी जाएगी, ताकि पहले नक्सल प्रभावित रहे इन इलाकों में स्थायी शांति कायम रह सके। जमुई जिले को पूरी तरह नक्सल मुक्त घोषित किए जाने के बाद सुरक्षा बलों ने बिहार-झारखंड सीमा से सटे विशनपुर-रुझनिया के जंगली इलाके में एक नक्सली स्मारक को जेसीबी मशीन से ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई मंगलवार को चलाए गए एक सघन सर्च अभियान के दौरान की गई, जिसका उद्देश्य नक्सलियों की बची-खुची पहचान को मिटाना है। नक्सली संगठन अपने मारे गए सदस्यों को ‘शहीद’ का दर्जा देते थे। उनके अंतिम संस्कार के बाद, वे जंगलों में ऐसे स्मारक बनाते थे और हर साल उन्हें याद करते थे। ये स्मारक नक्सलियों की गतिविधियों और उनके प्रभाव के प्रतीक माने जाते थे। नक्सलियों की शेष मौजूदगी का संकेत खत्म
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन स्मारकों के ध्वस्तीकरण से न केवल नक्सलियों की शेष मौजूदगी का संकेत खत्म होगा, बल्कि इलाके में उनकी वैचारिक पकड़ भी कमजोर पड़ेगी। इसी उद्देश्य से अभियान चलाकर ऐसे सभी प्रतीकों को मिटाया जा रहा है। चरका पत्थर थाना अध्यक्ष रंजीत कुमार ने बताया कि सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों की अंतिम निशानी के रूप में बने इस स्मारक को चिन्हित किया गया था। बाद में इसे जेसीबी की मदद से पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। विकास कार्यों को और गति दी जाएगी
इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर भरोसा और मजबूत हुआ है। प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में विकास कार्यों को और गति दी जाएगी, ताकि पहले नक्सल प्रभावित रहे इन इलाकों में स्थायी शांति कायम रह सके।


