Nail Biting : नाखून चबाने की आदत पड़ सकती है भारी! उंगली काटने तक की आ सकती है नौबत, डॉक्टर से जानें क्या है Paronychia

Nail Biting : नाखून चबाने की आदत पड़ सकती है भारी! उंगली काटने तक की आ सकती है नौबत, डॉक्टर से जानें क्या है Paronychia

Nail Biting Side Effects: आपने कई लोगों को देखा होगा कि वे अक्सर टहलते हुए, बैठे हुए या फिर तनाव की स्थिति में नाखून चबाते रहते हैं। अगर आप भी इन लोगों में से हैं तो जरा संभल जाइए! आपकी उंगली कट सकती है। ऐसा पहले भी हो चुका है, ब्रिटेन के एक 28 साल के युवक, ल्यूक हैमन जिसको बचपन से नाखून चबाने की आदत थी। एक दिन नाखून चबाते वक्त उनकी उंगली में एक छोटा सा घाव हो गया। उन्होंने इसे मामूली समझा, लेकिन अगले ही दिन उनकी उंगली सूजकर नीली पड़ गई और पूरे हाथ में असहनीय दर्द होने लगा।

डॉक्टर के पास गए, तो पता चला कि उन्हें Paronychia (पैरानोशिया) नाम का गंभीर इन्फेक्शन हो गया। डॉक्टरों को इमरजेंसी में उनकी उंगली की सर्जरी करनी पड़ी ताकि इन्फेक्शन शरीर के बाकी हिस्सों में न फैले। आइए डॉक्टर राहुल यादव (फिजिशियन) से जानते हैं कि पैरानोशिया क्या होता है? इसके कारण, लक्षण और बचाव के क्या उपाय हैं?

क्या होता है पैरानोशिया (Paronychia)?

जब बहुत देर तक नाखून चबाते हैं और उसके आस-पास की खाल में इन्फेक्शन हो जाता है। यही इन्फेक्शन पैरानोशिया (Paronychia) कहलाता है। वहां से बैक्टीरिया या फंगस शरीर के अंदर घुस जाते हैं। इसकी वजह से नाखून के किनारे वाला हिस्सा लाल हो जाता है, सूज जाता है और उसमें बहुत दर्द होता है। गंभीर स्थिति में उंगली काटने तक की नौबत आ जाती है।

पैरानोशिया के कारण क्या होते हैं?

  • बहुत ज्यादा नाखून चबाना।
  • बार-बार मैनीक्योर या पैडीक्योर करवाना।
  • ज्यादा देर पानी में हाथ रहना।
  • सूखी खाल को हाथ से खींच लेना।

पैरानोशिया के लक्षण क्या होते हैं?

  • नाखून की खाल का लाल होना।
  • तेज दर्द और गर्माहट होना।
  • उंगली में सूजन आना।
  • नाखून का रंग बदलना
  • नाखून का ढीला पड़ जाना।
  • खुजली या सफेद निशान होना।

पैरानोशिया (Paronychia) से बचने के क्या उपाय होते हैं?

  • नाखून चबाना बंद करें।
  • नाखून छोटे रखें।
  • खाल न खींचें।
  • हाथ सूखे रखें।
  • मॉइस्चराइजर लगाएं।
  • नाखूनों का खास ख्याल रखें।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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