मुरादपुर स्कूल भवन 3 साल से अधूरा:667 छात्र जर्जर कमरों में पढ़ने को मजबूर, जनगणना की वजह से शिक्षक अनुपस्थित

मुरादपुर स्कूल भवन 3 साल से अधूरा:667 छात्र जर्जर कमरों में पढ़ने को मजबूर, जनगणना की वजह से शिक्षक अनुपस्थित

खगड़िया के परबत्ता प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय मुरादपुर का भवन शिलान्यास के तीन साल बाद भी अधूरा है। इसके चलते 667 बच्चों को खुले आसमान के नीचे या जर्जर कमरों में पढ़ाई करनी पड़ रही है। विद्यालय भवन का निर्माण कार्य समग्र शिक्षा अभियान के तहत शुरू हुआ था। पुराने भवन को गिराकर नया भवन बनाया जाना था, लेकिन तीन साल बाद भी यह कार्य नींव से आगे नहीं बढ़ पाया है। यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है। सोमवार को विद्यालय की स्थिति और भी चिंताजनक दिखी। सुबह 6:30 बजे खुलने के बजाय 8 बजे तक स्कूल का ताला नहीं खुला था। प्रधानाध्यापक सतीश चंद्र झा को छोड़कर आठ शिक्षक जनगणना प्रशिक्षण में गए हुए थे, जिससे पूरे विद्यालय की जिम्मेदारी अकेले प्रधानाध्यापक पर थी। प्रधानाध्यापक सतीश चंद्र झा ने बताया कि सीमित संसाधनों के कारण इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो गया है। सैकड़ों बच्चों को केवल दो कमरों में पढ़ाया जा रहा है, जबकि बड़ी संख्या में छात्र खुले में बैठने को मजबूर हैं। ग्रामीणों, जिनमें गुलशन कुमार, मनोज सिंह, बमबम कुमार और सनोज कुमार शामिल हैं, ने आरोप लगाया है कि स्थानीय राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण भवन निर्माण कार्य रुका हुआ है। उन्होंने शिक्षा विभाग को चेतावनी दी है कि यदि जल्द निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो वे विद्यालय में तालाबंदी करेंगे। यह विद्यालय 1939 में स्थापित हुआ था और कभी क्षेत्र में शिक्षा का प्रमुख केंद्र माना जाता था। आज यह बदहाल स्थिति में है। एक तरफ सरकार नामांकन बढ़ाने के लिए अभियान चला रही है, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी सुविधाओं का अभाव शिक्षा व्यवस्था की कमियों को उजागर कर रहा है। खगड़िया के परबत्ता प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय मुरादपुर का भवन शिलान्यास के तीन साल बाद भी अधूरा है। इसके चलते 667 बच्चों को खुले आसमान के नीचे या जर्जर कमरों में पढ़ाई करनी पड़ रही है। विद्यालय भवन का निर्माण कार्य समग्र शिक्षा अभियान के तहत शुरू हुआ था। पुराने भवन को गिराकर नया भवन बनाया जाना था, लेकिन तीन साल बाद भी यह कार्य नींव से आगे नहीं बढ़ पाया है। यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है। सोमवार को विद्यालय की स्थिति और भी चिंताजनक दिखी। सुबह 6:30 बजे खुलने के बजाय 8 बजे तक स्कूल का ताला नहीं खुला था। प्रधानाध्यापक सतीश चंद्र झा को छोड़कर आठ शिक्षक जनगणना प्रशिक्षण में गए हुए थे, जिससे पूरे विद्यालय की जिम्मेदारी अकेले प्रधानाध्यापक पर थी। प्रधानाध्यापक सतीश चंद्र झा ने बताया कि सीमित संसाधनों के कारण इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो गया है। सैकड़ों बच्चों को केवल दो कमरों में पढ़ाया जा रहा है, जबकि बड़ी संख्या में छात्र खुले में बैठने को मजबूर हैं। ग्रामीणों, जिनमें गुलशन कुमार, मनोज सिंह, बमबम कुमार और सनोज कुमार शामिल हैं, ने आरोप लगाया है कि स्थानीय राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण भवन निर्माण कार्य रुका हुआ है। उन्होंने शिक्षा विभाग को चेतावनी दी है कि यदि जल्द निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो वे विद्यालय में तालाबंदी करेंगे। यह विद्यालय 1939 में स्थापित हुआ था और कभी क्षेत्र में शिक्षा का प्रमुख केंद्र माना जाता था। आज यह बदहाल स्थिति में है। एक तरफ सरकार नामांकन बढ़ाने के लिए अभियान चला रही है, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी सुविधाओं का अभाव शिक्षा व्यवस्था की कमियों को उजागर कर रहा है।  

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