राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत चार दिवसीय प्रवास पर रविवार शाम से मुंगेर में हैं। वे पुराणीगंज स्थित सरस्वती विद्या मंदिर परिसर में आयोजित संघ शिक्षा वर्ग में स्वयंसेवकों को प्रत्यक्ष रूप से प्रशिक्षण दे रहे हैं। प्रशिक्षण सत्र के दौरान सरसंघचालक मोहन भागवत ने कार्यकर्ता विकास के शिक्षार्थी वर्ग प्रथम और बौद्धिक वर्ग को संबोधित किया। उन्होंने स्वयंसेवकों को संघ की विचारधारा, राष्ट्रसेवा, सामाजिक समरसता और संगठनात्मक दायित्वों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। दोपहर तीन बजे से शाम पांच बजे तक चले बौद्धिक सत्र में संघ के उद्देश्यों और कार्यपद्धति पर विस्तार से चर्चा की गई। भागवत ने बताया कि संघ के स्वयंसेवक समाज में सेवा और समर्पण की भावना से कार्य करते हैं। आपदा, पर्व-त्योहार और सामाजिक अवसरों पर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होती है। संगठनात्मक जिम्मेदारियों से अवगत कराया जाएगा
उन्होंने स्वयंसेवकों को समाज के सभी वर्गों के बीच समरसता स्थापित करने, भेदभाव समाप्त करने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा और संगठन की भावना पहुंचाना स्वयंसेवकों का प्रमुख दायित्व है। आज संघ प्रमुख स्वयंसेवकों की जिज्ञासाओं का समाधान भी करेंगे। बौद्धिक सत्र के अलावा, घोष प्रशिक्षण भी आयोजित किया गया। इसमें स्वयंसेवकों को पथ संचलन के दौरान बजाए जाने वाले वाद्य यंत्रों के महत्व, उनके उपयोग और निर्धारित नियमों की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में बताया गया कि घोष केवल संगीत का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, एकरूपता और संगठन की पहचान भी है। यह प्रशिक्षण वर्ग 10 जून तक चलेगा। इसमें स्वयंसेवकों को संघ के नियम, कार्यशैली और संगठनात्मक जिम्मेदारियों से अवगत कराया जाएगा। संघ के शताब्दी वर्ष की रूपरेखा पर भी हुई चर्चा
सूत्रों के अनुसार बौद्धिक सत्र में संघ प्रमुख ने आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर में आयोजित किए जाने वाले विशेष कार्यक्रमों की रूपरेखा भी साझा की। उन्होंने स्वयंसेवकों को नेतृत्व क्षमता विकसित करने, अनुशासन बनाए रखने, सेवा कार्यों को विस्तार देने और समाज के विभिन्न वर्गों के साथ संवाद बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।
सत्र के दौरान संगठनात्मक दक्षता, सेवा भाव और राष्ट्रहित में कार्य करने की भावना को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई। स्वयंसेवकों को यह भी बताया गया कि बदलते सामाजिक परिवेश में संघ की विचारधारा को सकारात्मक रूप से समाज तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
शिविर की गोपनीयता और सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता
संघ प्रमुख की मौजूदगी को देखते हुए प्रशिक्षण शिविर की गोपनीयता बनाए रखने के लिए विशेष सावधानी बरती जा रही है। विद्यालय परिसर में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे स्वयंसेवकों के आवागमन पर भी नियंत्रण रखा गया है। संघ के स्वयंसेवकों के साथ-साथ सुरक्षा बलों द्वारा परिसर और आसपास के क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है। प्रत्येक गतिविधि पर विशेष नजर रखी जा रही है ताकि प्रशिक्षण कार्यक्रम सुचारु रूप से संचालित हो सके। सोशल मीडिया पर संत के साथ मुलाकात की तस्वीरें वायरल
इस बीच संघ प्रमुख के मुंगेर आगमन से जुड़ा एक पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। संत डॉ. स्वामी सत्यप्रकाश ने अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट साझा करते हुए बताया कि ऋषिकुंड में आयोजित सत्संग कार्यक्रम के दौरान उन्हें सूचना मिली कि सरसंघचालक उनसे मिलना चाहते हैं। पोस्ट के अनुसार दोनों के बीच लगभग 35 मिनट तक धर्म और अध्यात्म से जुड़े विषयों पर गंभीर चर्चा हुई। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मोहन भागवत ने उन्हें डॉक्ट्रेट की उपाधि मिलने पर शुभकामनाएं दीं। यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत चार दिवसीय प्रवास पर रविवार शाम से मुंगेर में हैं। वे पुराणीगंज स्थित सरस्वती विद्या मंदिर परिसर में आयोजित संघ शिक्षा वर्ग में स्वयंसेवकों को प्रत्यक्ष रूप से प्रशिक्षण दे रहे हैं। प्रशिक्षण सत्र के दौरान सरसंघचालक मोहन भागवत ने कार्यकर्ता विकास के शिक्षार्थी वर्ग प्रथम और बौद्धिक वर्ग को संबोधित किया। उन्होंने स्वयंसेवकों को संघ की विचारधारा, राष्ट्रसेवा, सामाजिक समरसता और संगठनात्मक दायित्वों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। दोपहर तीन बजे से शाम पांच बजे तक चले बौद्धिक सत्र में संघ के उद्देश्यों और कार्यपद्धति पर विस्तार से चर्चा की गई। भागवत ने बताया कि संघ के स्वयंसेवक समाज में सेवा और समर्पण की भावना से कार्य करते हैं। आपदा, पर्व-त्योहार और सामाजिक अवसरों पर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होती है। संगठनात्मक जिम्मेदारियों से अवगत कराया जाएगा
उन्होंने स्वयंसेवकों को समाज के सभी वर्गों के बीच समरसता स्थापित करने, भेदभाव समाप्त करने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा और संगठन की भावना पहुंचाना स्वयंसेवकों का प्रमुख दायित्व है। आज संघ प्रमुख स्वयंसेवकों की जिज्ञासाओं का समाधान भी करेंगे। बौद्धिक सत्र के अलावा, घोष प्रशिक्षण भी आयोजित किया गया। इसमें स्वयंसेवकों को पथ संचलन के दौरान बजाए जाने वाले वाद्य यंत्रों के महत्व, उनके उपयोग और निर्धारित नियमों की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में बताया गया कि घोष केवल संगीत का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, एकरूपता और संगठन की पहचान भी है। यह प्रशिक्षण वर्ग 10 जून तक चलेगा। इसमें स्वयंसेवकों को संघ के नियम, कार्यशैली और संगठनात्मक जिम्मेदारियों से अवगत कराया जाएगा। संघ के शताब्दी वर्ष की रूपरेखा पर भी हुई चर्चा
सूत्रों के अनुसार बौद्धिक सत्र में संघ प्रमुख ने आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर में आयोजित किए जाने वाले विशेष कार्यक्रमों की रूपरेखा भी साझा की। उन्होंने स्वयंसेवकों को नेतृत्व क्षमता विकसित करने, अनुशासन बनाए रखने, सेवा कार्यों को विस्तार देने और समाज के विभिन्न वर्गों के साथ संवाद बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।
सत्र के दौरान संगठनात्मक दक्षता, सेवा भाव और राष्ट्रहित में कार्य करने की भावना को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई। स्वयंसेवकों को यह भी बताया गया कि बदलते सामाजिक परिवेश में संघ की विचारधारा को सकारात्मक रूप से समाज तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
शिविर की गोपनीयता और सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता
संघ प्रमुख की मौजूदगी को देखते हुए प्रशिक्षण शिविर की गोपनीयता बनाए रखने के लिए विशेष सावधानी बरती जा रही है। विद्यालय परिसर में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे स्वयंसेवकों के आवागमन पर भी नियंत्रण रखा गया है। संघ के स्वयंसेवकों के साथ-साथ सुरक्षा बलों द्वारा परिसर और आसपास के क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है। प्रत्येक गतिविधि पर विशेष नजर रखी जा रही है ताकि प्रशिक्षण कार्यक्रम सुचारु रूप से संचालित हो सके। सोशल मीडिया पर संत के साथ मुलाकात की तस्वीरें वायरल
इस बीच संघ प्रमुख के मुंगेर आगमन से जुड़ा एक पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। संत डॉ. स्वामी सत्यप्रकाश ने अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट साझा करते हुए बताया कि ऋषिकुंड में आयोजित सत्संग कार्यक्रम के दौरान उन्हें सूचना मिली कि सरसंघचालक उनसे मिलना चाहते हैं। पोस्ट के अनुसार दोनों के बीच लगभग 35 मिनट तक धर्म और अध्यात्म से जुड़े विषयों पर गंभीर चर्चा हुई। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मोहन भागवत ने उन्हें डॉक्ट्रेट की उपाधि मिलने पर शुभकामनाएं दीं। यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।


