माइनिंग सर्वे रिपोर्ट मंजूर हुई, अब बिना सुरक्षा मानकों के नहीं एक भी ट्राली रेत नहीं उठा पाएगी

माइनिंग सर्वे रिपोर्ट मंजूर हुई, अब बिना सुरक्षा मानकों के नहीं एक भी ट्राली रेत नहीं उठा पाएगी

भास्कर न्यूज | जालंधर जिले में लंबे समय से अटके रेत खनन को शुरू करने की दिशा में बड़ा प्रशासनिक फैसला हुआ है। स्टेट लेवल एनवायरमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी ने जालंधर की संशोधित सप्लीमेंट्री डिस्ट्रिक्ट सर्वे रिपोर्ट को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी के बाद अब जिले में चिन्हित की गई संभावित माइनिंग साइटों पर पर्यावरण मंजूरी मिलने का रास्ता साफ हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक खनन विभाग के सामने 16 ऐसी सख्त शर्तें रखी हैं, जिनका पालन किए बिना एक भी ट्राली रेत नहीं उठाई जा सकेगी। इनमें मुख्य रूप से अगर किसी माइनिंग साइट के रास्ते में कोई स्कूल आता है, तो स्कूल की टाइमिंग के दौरान वहां से रेत के भारी वाहनों की आवाजाही पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी, ताकि बच्चों की सुरक्षा से समझौता ना हो। नदियों से तय सीमा से ज्यादा रेत निकालने को रोकने के लिए हर 30-30 मीटर की दूरी पर जमीन पर पिलर और स्टील की बेंच प्लेट्स लगाई जाएंगी, जिन पर समुद्र तल से ऊंचाई दर्ज होगी। करीब तीन बैठकों के बाद खनन विभाग ने रिपोर्ट में कई बदलाव के बाद यह सप्लीमेंट्री रिपोर्ट सीधे पास नहीं हुई है। इसके सात ही धूल रोकने के लिए नहीं बर्बाद होगा पीने का पानी पर्यावरण को बचाने के लिए अथॉरिटी ने साफ किया है कि माइनिंग साइट्स और कच्चे रास्तों पर उड़ने वाली धूल को दबाने के लिए साफ पानी का इस्तेमाल नहीं होगा। इसके लिए खनन विभाग को नजदीकी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के साथ करार करना होगा और केवल ट्रीटेड वॉटर (साफ किए गए गंदे पानी) का ही छिड़काव करना होगा। जिन गांवों की सड़कों से रेत के टिप्पर गुजरेंगे, वहां पंचायत के साथ मिलकर सड़कों को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी तय की गई है।

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