मिडिल ईस्ट संकट: यूरोपीय संघ ने लागू किया नया फ्रेमवर्क, अब प्रभावित सेक्टरों की मदद करेंगे यूनियन के देश

मिडिल ईस्ट संकट: यूरोपीय संघ ने लागू किया नया फ्रेमवर्क, अब प्रभावित सेक्टरों की मदद करेंगे यूनियन के देश

यूरोपीय आयोग (European Commission) ने बुधवार को एक अस्थायी स्टेट एड फ्रेमवर्क अपनाया है। इसके तहत यूरोपीय संघ (EU) के देश मिडिल ईस्ट संकट और बढ़ती ऊर्जा लागत से प्रभावित सेक्टरों को सहारा दे सकेंगे। इस नए फ्रेमवर्क का नाम ‘मिडिल ईस्ट क्राइसिस टेम्पररी स्टेट एड फ्रेमवर्क’ (मेटसेफ) है। यूरोपीय संघ का यह फ्रेमवर्क 31 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगा।

कृषि, मछली पालन और परिवहन जैसे सेक्टर्स में मदद करेगा EU

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच यूरोपीय संघ (European Commission) ने नया फ्रेमवर्क लागू किया है। इसके जरिए यूरोपीय संघ के देश मिडिल ईस्ट संकट से प्रभावित हो रहे सेक्टर्स में मदद करेंगे। EU का फोकस उन सेक्टरों पर है, जो मिडिल ईस्ट तनाव की वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। इन सेक्टर्स में कृषि, मछली पालन, परिवहन और अधिक ऊर्जा इस्तेमाल करने वाले उद्योग शामिल हैं। स‍िन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय आयोग ने कहा कि इस फ्रेमवर्क के नियम, दायरा और समय-सीमा को हालात के हिसाब से समय-समय पर बदला जा सकता है, खासकर मिडिल ईस्ट की स्थिति और दुनिया की आर्थिक हालत को देखते हुए इसकी कार्यशैली में बदलाव हो सकेगा।

मिडिल ईस्ट संकट से EU पर असर

यूरोपीय संघ ने एक अस्थायी स्टेट एड फ्रेमवर्क अपनाया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब EU अधिकारी चेतावनी दे रहे हैं कि मिडिल ईस्ट का संघर्ष यूरोप के लिए ऊर्जा आयात काफी महंगा बना रहा है। आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने बताया कि सिर्फ 60 दिनों में EU का फॉसिल फ्यूल आयात बिल 27 अरब यूरो से ज्यादा बढ़ गया है। EU के ऊर्जा आयुक्त डैन जॉर्गेनसन ने भी कहा- यह सिर्फ थोड़े समय के लिए कीमत बढ़ने का मामला नहीं है, बल्कि यह स्थिति 1973 और 2022 के ऊर्जा संकट जितनी गंभीर हो सकती है।

यूरोपीय आयोग के मुताबिक, साफ और हरित ऊर्जा की तरफ बढ़ना ही लंबे समय में इसका समाधान है, लेकिन अभी के लिए यह नया फ्रेमवर्क देशों को तुरंत कदम उठाने की सुविधा देता है, ताकि प्रभावित कंपनियों का विकास रुक न जाए। इस योजना के तहत कृषि, मछली पालन और परिवहन सेक्टर की कंपनियों को अलग-अलग तरह से मदद दी जाएगी। जैसे ईंधन या खाद की बढ़ी कीमतों का कुछ हिस्सा कवर करने के लिए सहायता और छोटे स्तर की मदद के लिए आसान प्रक्रिया।

EU ने बताया कि मेटसेफ में एक और बदलाव किया गया है, जिसमें क्लीन इंडस्ट्रियल डील स्टेट एड फ्रेमवर्क (CISF) को थोड़ी छूट दी गई है, ताकि बिजली की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी से निपटने के लिए ज्यादा मदद दी जा सके। यूरोपियन कमीशन फॉर ए क्लीन, जस्ट एंड कॉम्पिटिटिव ट्रांज़िशन की एग्जीक्यूटिव वाइस-प्रेसिडेंट टेरेसा रिबेरा ने कहा कि ऊर्जा कीमतों में हालिया बढ़ोतरी तुरंत कार्रवाई की मांग करती है। उन्होंने कहा कि यह नया फ्रेमवर्क आसान और व्यावहारिक तरीके देता है, जिससे कृषि, मछली पालन और परिवहन जैसे जरूरी सेक्टरों पर असर कम किया जा सके।

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