Middle Age Cancer Risk: 40-60 की उम्र में कैंसर फैलने का खतरा क्यों बढ़ जाता है? नई स्टडी में खुलासा

Middle Age Cancer Risk: 40-60 की उम्र में कैंसर फैलने का खतरा क्यों बढ़ जाता है? नई स्टडी में खुलासा

Cancer Spread Risk Age 40 to 60: उम्र बढ़ने के साथ कैंसर का खतरा बढ़ जाता है, यह तो हम सब जानते हैं। लेकिन हाल ही में आई एक नई रिसर्च ने सबको चौंका दिया है। इस रिसर्च में सामने आया है कि कैंसर फैलने का खतरा हमेशा एक जैसा नहीं रहता, बल्कि 40 से 60 साल की उम्र (यानी मिडिल एज) में यह खतरा सबसे ज्यादा होता है। वहीं, बहुत ज्यादा बुजुर्ग लोगों में यह खतरा वापस थोड़ा कम हो जाता है।

हाल ही में साइंस डेली (Science Daily) पर छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, फॉक्स चेस कैंसर सेंटर (Fox Chase Cancer Center) के वैज्ञानिकों ने अमेरिकन एसोसिएशन फॉर कैंसर रिसर्च (AACR) की सालाना बैठक में इस बेहद जरूरी स्टडी को पेश किया है। आइए समझते हैं कि आखिर इस नई रिसर्च में क्या खुलासा हुआ है।

आखिर 40-60 की उम्र में ही क्यों बढ़ता है खतरा?

इस रिसर्च के लीड इन्वेस्टर और कैंसर बायोलॉजिस्ट डॉ. मिचेल फेन (Mitchell Fane) और उनके साथी डॉ. यश छाबड़ा (Yash Chabra) ने चूहों पर एक एक्सपेरिमेंट किया। उन्होंने देखा कि मेलानोमा (एक तरह का स्किन कैंसर) सबसे कम युवा चूहों में फैला, लेकिन मिडिल एज (इंसानों के हिसाब से 40-60 साल) वाले चूहों में यह बहुत तेजी से बढ़ा। इसके बाद, बहुत बूढ़े चूहों में इसका फैलना फिर से कम हो गया।

इसकी सबसे बड़ी वजह हमारी बॉडी के खास इम्यून सेल्स (रोग प्रतिरोधक कोशिकाएं) हैं, जिन्हें गामा डेल्टा (γδ) टी-सेल्स’ कहा जाता है। ये सेल्स हमारे शरीर का सुरक्षा कवच हैं जो कैंसर को फैलने से रोकते हैं। रिसर्च में पाया गया कि जवान और बहुत बुजुर्गों में मजबूती युवा और बहुत ज्यादा उम्र वाले चूहों में इन सुरक्षात्मक सेल्स की संख्या काफी अच्छी थी, जिससे ट्यूमर शांत रहा या कम फैला। 40 से 60 की उम्र के बीच इन गामा डेल्टा टी-सेल्स की संख्या शरीर में काफी कम हो जाती है। इसी का फायदा उठाकर कैंसर फेफड़ों और लिवर जैसे अंगों में तेजी से फैलने लगता है।

कैंसर ऐसे करता है हमला

स्टडी में एक और बड़ी बात सामने आई। मिडिल एज में कैंसर सेल्स कुछ ऐसे मॉलिक्यूल्स (कण) छोड़ते हैं, जो हमारे बचे-कुचे सुरक्षात्मक टी-सेल्स को थका देते हैं या उन्हें दबा देते हैं। इससे शरीर का डिफेंस सिस्टम कमजोर हो जाता है, और जो कैंसर सेल्स पहले शांत बैठे थे, वे अचानक एक्टिव होकर हमला कर देते हैं।

लैब और असली दुनिया का अंतर

डॉ. मिचेल फेन का कहना है कि दुनिया भर में कैंसर की लगभग 90% रिसर्च बहुत युवा चूहों पर होती है, जिनकी उम्र इंसानों के 20 साल के बराबर होती है। यही वजह है कि कई दवाइयां लैब में तो पास हो जाती हैं, लेकिन जब असली मरीजों (जो अक्सर बड़ी उम्र के होते हैं) पर इस्तेमाल होती हैं, तो फेल हो जाती हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए फॉक्स चेस कैंसर सेंटर में एक स्पेशल ‘एज्ड माउस फैसिलिटी बनाई गई है, ताकि बढ़ती उम्र के साथ कैंसर के बर्ताव को ठीक से समझा जा सके और मिडिल एज व बुजुर्ग मरीजों के लिए बेहतर और सटीक इलाज ढूंढा जा सके।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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