ईरान के सुप्रीम लीडर पूरी दुनिया के शिया मुसलामानों के रहबर थे। 28 अप्रैल को अमेरिका के हमले में उनकी शहादत के बाद पूरी दुनिया में प्रोटेस्ट हुआ। इंडिया में भी शिया मुसलमानों ने प्रोटेस्ट किया। वहीं अब जबकि ईरान और अमेरिका के बीच सीज फायर हो चुका है। आयतुल्लाह खामेनाई की याद में जगह-जगह मजलिसों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में वाराणसी के दालमंडी से सटे चहमामा मोहल्ले में स्थित शिया मस्जिद मीर नादे अली में आयतुल्लाह अली खामेनाई की याद में मजलिस का आयोजन किया गया। गुरुवार देर रात तक चली इस मजलिस का आयोजन अंजुमन हैदरी चौक बनारस ने किया था। मजलिस को मौलाना सैयद युसूफ मशहदी ने खेताब किया। उन्होंने कहा आयतुल्लाह सैयद अली खामेनाई की शहादत ने ईरान को खत्म करने के बजाए दुनिया के आगे और बलन्द किया है। इस मजलिस के बारे में अंजुमन के अध्यक्ष अब्बास मुर्तुजा शम्सी और सेक्रेटरी नायब रजा ने जानकारी दी। दुनिया के सामने सुर्खरू हुआ ईरान मस्जिद मीर नादे अली में मजलिस को खेताब करते हुए मौलाना सैयद युसूफ मशहदी ने कहा – अमेरिका और इजरायल ने जिस मंसूबे के साथ रहबर आयतुल्लाह सैयद अली खामेनाई पर हमला किया और उन्हें शहीद किया। वो मंसूबा फेल साबित हुआ है। दोनों ही मुल्क ये च्चते थे कि ईरान अपने घुटनों के बल उनसे अपनी सुरक्षा का भीख मांगेगा पर उलटा हुआ और ईरान ने ईंट का जवाब पत्थर से दिया। 23 दिन चली जंग ने बता दिया कि अली को मने वाले कभी गलत के साथ नहीं रहेंगे और न उसका साथ देंगे भले ही अपना सिर हुसैन की तरह कटा देंगे। इमाम हुसैन की तरह मैदान में डटे रहे मौलाना युसूफ मशहदी ने कहा – जब आज से 1400 हिजरी सन पहले यजीद ने पैगंबर साहब के नवासे इमाम हुसैन ने बैयत ( रजामंदी/सहमति) लेनी चाहि थी। उन गलत कामों के लिए जो पवित्र कुरआन में हराम बताई गयी है। तो उन्होंने कहा था मुझ जैसा तुझ जैसे की बैयत नहीं कर सकता। आज ईरान भी इसी बात पर कायम है कि मुझ जैसा तुझ जैसे की बैयत नहीं कर सकता। इजराइल ने जिस तरह फिलिस्तीन में बच्चों को मारा, ईरान में मिनाब स्कूल में 180 बच्चियों को मारा। वह इंसानियत का कत्ल है। मौलाना ने आयतुल्लाह की जिंदगी पर प्रकाश डाला और लोगों से कहा कि रहबर ने अपनी जिंदगी से जो दर्स दिया है उसे हर दिलों में कायम रखना होगा। लियाकत अली और साथियों ने पढ़ी सोज मजलिस शुरू होने से पहले लियाकत अली और उनके साथियों ने सोज के साथ शुरुआत की। जिसके बाद मौलाना हाफिज हसन राजा बनारसी और आतश बनारसी ने पेशख्वानी की और बाकर बलियावी ने संचालन किया। बाद मजलिस अंजुमन गुलजार ए अब्बासिया बनारस ने नौहा व मातम किया।


