विष्णुपद में गूंजेंगे महायज्ञ के मंत्र:15 साल बाद 18 से 26 अप्रैल तक 9 दिन तक आयोजन, 1000 महिलाओं की कलश यात्रा बनेगी आकर्षण

विष्णुपद में गूंजेंगे महायज्ञ के मंत्र:15 साल बाद 18 से 26 अप्रैल तक 9 दिन तक आयोजन, 1000 महिलाओं की कलश यात्रा बनेगी आकर्षण

गयाजी में मोक्षस्थली विष्णुपद एक बार फिर बड़े धार्मिक आयोजन का गवाह बनने जा रही है। 15 साल बाद यहां बड़े स्तर पर श्री श्री 1008 लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का आयोजन हो रहा है। 18 अप्रैल से शुरू होकर 26 अप्रैल तक चलने वाले इस 9 दिवसीय महायज्ञ को लेकर तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं। आयोजन श्री विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति और चौदह सैयां गयापाल पंडा समाज की ओर से किया जा रहा है। यज्ञ का उद्देश्य विश्व शांति, समाज कल्याण और राष्ट्र की उन्नति है। 18 अप्रैल को भव्य शुरुआत, निकलेगी विशाल कलश यात्रा महायज्ञ की शुरुआत 18 अप्रैल, शनिवार को जलभरी यात्रा के साथ होगी। सुबह 8:30 बजे विष्णुपद मंदिर परिसर से भव्य कलश यात्रा निकलेगी। गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों के साथ यह यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरेगी। शोभा यात्रा रूट में अहिल्याबाई चौक, नवागढ़ी, नादरागंज, कोयरीबाड़ी, जीबी रोड, कोतवाली चौक, टावर चौक, रमना रोड, पितामहेश्वर, मल्लाह टोली, ब्राह्मणी घाट पुल, नई सड़क और पंचमहला बाजार शामिल हैं। यात्रा सूर्यकुंड पहुंचेगी, जहां पवित्र जल भरा जाएगा। 1000 महिलाओं की भागीदारी होगी इस यात्रा की सबसे बड़ी खासियत होगी 1000 महिलाओं की भागीदारी। सभी महिलाएं पीले और लाल परिधान में माथे पर कलश लेकर चलेंगी। आगे घोड़े और ऊंट रहेंगे, पीछे महिलाओं की लंबी कतार होगी। पूरा माहौल धार्मिक रंग में रंगा नजर आएगा। 20 अप्रैल से शुरू होगा मुख्य यज्ञ, रोज गूंजेंगे वैदिक मंत्र 19 अप्रैल को वेदी पूजन, मंडप पूजन और अग्नि स्थापना की प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद 20 अप्रैल से 26 अप्रैल तक नियमित यज्ञ होगा। यज्ञ का संचालन कर्नाटक के माध्वाचार्य संप्रदाय के गुरु यादवाचार्य के आचार्यत्व में होगा। काशी और गया के विद्वान आचार्य भी इसमें शामिल होंगे। हर दिन सुबह 8 बजे से यज्ञ शुरू होगा। नई यज्ञशाला में पांच कुंड बनाए गए हैं, जहां वैदिक मंत्रों के बीच आहुतियां दी जाएंगी। प्रवचन से मिलेगा आध्यात्मिक संदेश महायज्ञ के दौरान हर दिन शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक प्रवचन होगा। वृंदावन से आईं कथा वाचिका डॉ. सरोज मृणालिनी ब्रजवासी श्रद्धालुओं को कथा सुनाएंगी। आयोजकों का कहना है कि यज्ञ से जहां वातावरण शुद्ध होगा, वहीं लोगों को मानसिक शांति भी मिलेगी। सुरक्षा के कड़े इंतजाम, सीसीटीवी से निगरानी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन से पुलिस बल, एम्बुलेंस और अग्निशमन की व्यवस्था की मांग की गई है। विष्णुपद परिसर में अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। 28 अप्रैल को होगा विशाल भंडारा 26 अप्रैल को महायज्ञ की पूर्णाहुति होगी। इसके बाद 28 अप्रैल को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। समिति के सदस्यों ने गया जिले के धर्मप्रेमियों से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में पहुंचकर इस महायज्ञ को सफल बनाएं। मन्दिर विष्णुपद में होने वाला यह आयोजन शहर को एक बार फिर धार्मिक ऊर्जा से भरने जा रहा है। 9 दिन तक गया में भक्ति, आस्था और संस्कृति की अलग ही तस्वीर दिखेगी। गयाजी में मोक्षस्थली विष्णुपद एक बार फिर बड़े धार्मिक आयोजन का गवाह बनने जा रही है। 15 साल बाद यहां बड़े स्तर पर श्री श्री 1008 लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का आयोजन हो रहा है। 18 अप्रैल से शुरू होकर 26 अप्रैल तक चलने वाले इस 9 दिवसीय महायज्ञ को लेकर तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं। आयोजन श्री विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति और चौदह सैयां गयापाल पंडा समाज की ओर से किया जा रहा है। यज्ञ का उद्देश्य विश्व शांति, समाज कल्याण और राष्ट्र की उन्नति है। 18 अप्रैल को भव्य शुरुआत, निकलेगी विशाल कलश यात्रा महायज्ञ की शुरुआत 18 अप्रैल, शनिवार को जलभरी यात्रा के साथ होगी। सुबह 8:30 बजे विष्णुपद मंदिर परिसर से भव्य कलश यात्रा निकलेगी। गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों के साथ यह यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरेगी। शोभा यात्रा रूट में अहिल्याबाई चौक, नवागढ़ी, नादरागंज, कोयरीबाड़ी, जीबी रोड, कोतवाली चौक, टावर चौक, रमना रोड, पितामहेश्वर, मल्लाह टोली, ब्राह्मणी घाट पुल, नई सड़क और पंचमहला बाजार शामिल हैं। यात्रा सूर्यकुंड पहुंचेगी, जहां पवित्र जल भरा जाएगा। 1000 महिलाओं की भागीदारी होगी इस यात्रा की सबसे बड़ी खासियत होगी 1000 महिलाओं की भागीदारी। सभी महिलाएं पीले और लाल परिधान में माथे पर कलश लेकर चलेंगी। आगे घोड़े और ऊंट रहेंगे, पीछे महिलाओं की लंबी कतार होगी। पूरा माहौल धार्मिक रंग में रंगा नजर आएगा। 20 अप्रैल से शुरू होगा मुख्य यज्ञ, रोज गूंजेंगे वैदिक मंत्र 19 अप्रैल को वेदी पूजन, मंडप पूजन और अग्नि स्थापना की प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद 20 अप्रैल से 26 अप्रैल तक नियमित यज्ञ होगा। यज्ञ का संचालन कर्नाटक के माध्वाचार्य संप्रदाय के गुरु यादवाचार्य के आचार्यत्व में होगा। काशी और गया के विद्वान आचार्य भी इसमें शामिल होंगे। हर दिन सुबह 8 बजे से यज्ञ शुरू होगा। नई यज्ञशाला में पांच कुंड बनाए गए हैं, जहां वैदिक मंत्रों के बीच आहुतियां दी जाएंगी। प्रवचन से मिलेगा आध्यात्मिक संदेश महायज्ञ के दौरान हर दिन शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक प्रवचन होगा। वृंदावन से आईं कथा वाचिका डॉ. सरोज मृणालिनी ब्रजवासी श्रद्धालुओं को कथा सुनाएंगी। आयोजकों का कहना है कि यज्ञ से जहां वातावरण शुद्ध होगा, वहीं लोगों को मानसिक शांति भी मिलेगी। सुरक्षा के कड़े इंतजाम, सीसीटीवी से निगरानी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन से पुलिस बल, एम्बुलेंस और अग्निशमन की व्यवस्था की मांग की गई है। विष्णुपद परिसर में अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। 28 अप्रैल को होगा विशाल भंडारा 26 अप्रैल को महायज्ञ की पूर्णाहुति होगी। इसके बाद 28 अप्रैल को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। समिति के सदस्यों ने गया जिले के धर्मप्रेमियों से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में पहुंचकर इस महायज्ञ को सफल बनाएं। मन्दिर विष्णुपद में होने वाला यह आयोजन शहर को एक बार फिर धार्मिक ऊर्जा से भरने जा रहा है। 9 दिन तक गया में भक्ति, आस्था और संस्कृति की अलग ही तस्वीर दिखेगी।  

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