Manoj Joshi ने कहा शारीरिक बनावट का उपहास उड़ाना सार्थक Standup Comedy नहीं

Manoj Joshi ने कहा शारीरिक बनावट का उपहास उड़ाना सार्थक Standup Comedy नहीं

भारत में ‘स्टैंडअप कॉमेडी’ को लेकर हालिया विवादों के बीच अभिनेता मनोज जोशी का कहना है कि हास्य का उद्देश्य केवल दर्शकों को हंसाना नहीं बल्कि उनके भीतर एक विचार पैदा करना होना चाहिए। जोशी का मानना था कि किसी की शारीरिक बनावट या कमजोरी का मजाक उड़ाना ‘कॉमेडी’ नहीं है। मनोज जोशी ने यहां ‘पीटीआई-भाषा’ को दिये साक्षात्कार में कहा कि किसी की शारीरिक बनावट या कमजोरी का मजाक उड़ाना उनके विचार में सार्थक हास्य नहीं है और अच्छी कॉमेडी किरदारों के व्यवहार, परिस्थितियों और संवादों से उत्पन्न होती है तथा ऐसा हास्य दर्शकों को लंबे समय तक याद रहता है।

अभिनेता ने मराठी के प्रसिद्ध साहित्यकार एवं हास्य लेखक पु. ल. देशपांडे का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका हास्य उनके लिए आदर्श रहा है। जोशी ने कहा कि हास्य के साथ जब कोई मर्म जुड़ा होता है, तो वह लंबे समय तक लोगों की स्मृति में बना रहता है। मनोज जोशी ने यह बयान भारत में ‘स्टैंडअप कॉमेडी’ को लेकर हाल के महीनों में कई विवादों की पृष्ठभूमि में दिया।

कॉमेडियन गौरव गुप्ता, हर्ष गुजराल, मधुर विर्ली और प्रणीत मोरे की प्रस्तुतियों में कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर आलोचना हुई, वहीं पुलकित मणि की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नकल वाली प्रस्तुति पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। समय रैना के शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ में कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर भी मामला अदालत पहुंचा, जबकि रणवीर इलाहाबादिया की एक एपिसोड में की गई अश्लील टिप्पणी ने देशव्यापी विवाद खड़ा कर दिया था। इन घटनाओं ने हास्य और व्यंग्य की स्वतंत्रता, महिलाओं एवं अन्य समुदायों की गरिमा और कलाकारों की जवाबदेही पर बहस को तेज किया है।

इसी संदर्भ में जोशी ने कहा कि किसी कलाकार की लंबी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह किस तरह की सामग्री और किरदारों के साथ काम करता है। जोशी ने कहा कि हास्य में भी गहराई और सार होना चाहिए, ताकि उसका प्रभाव केवल कुछ क्षणों तक सीमित न रहे। अभिनेता मनोज जोशी नाटक ‘एक अखंड भारत का निर्माण: सरदार वल्लभभाई पटेल की विरासत’ में सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका निभा रहे हैं और इस नाटक का मंचन दिल्ली के कमानी ऑडिटोरियम में इस शनिवार और रविवार को होगा।

अभिनेता ने कहा कि इस किरदार के लिए उन्होंने नाटक की लेखिका के सात साल तक शोध और 260 से ज्यादा किताबों का अध्ययन किया। ‘स्टैंडअप कॉमेडी’ के मौजूदा स्वरूप और उसके भविष्य पर मनोज जोशी की राय को दोहराते हुए इस नाटक के निर्देशक विरल रच्छ ने कहा कि आज के कॉमेडियन प्रतिभाशाली परफॉर्मर हो सकते हैं, लेकिन वे लंबे समय तक दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाए रख पाएंगे या नहीं, यह उनकी सामग्री पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा, “वो प्रतिभाशाली कलाकार हो सकते हैं, लेकिन वे लंबे समय तक लोगों के जेहन में रहेंगे या नहीं, यह उनकी सामग्री पर निर्भर करता है।”
उन्होंने कहा कि हास्य में ऐसा सार होना चाहिए, जो दर्शकों को हंसाने के साथ उनके मन पर भी असर छोड़े।

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