गयाजी के विष्णुपद मंदिर परिसर में 18 अप्रैल से महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। महायज्ञ की शुरुआत जलभरी यात्रा के साथ होगी। शनिवार सुबह 8:30 बजे विष्णुपद मंदिर परिसर से भव्य कलश यात्रा निकलेगी। गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों के साथ यह यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरेगी। बुधवार को डीएम शशांक शुभंकर ने तैयारियों की समीक्षा की। विधि-व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और ट्रैफिक मैनेजमेंट को लेकर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए। खास तौर पर गर्मी को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था करने को कहा गया है। चिकित्सीय सुविधा को लेकर भी प्रशासन गंभीर दिखा। यज्ञ के दौरान मेडिकल टीम तैनात रहेगी। जरूरत पड़ने पर तत्काल इलाज मिले, इसके लिए एंबुलेंस की भी समुचित व्यवस्था रखने को कहा गया है। साथ ही साफ-सफाई और फायर सेफ्टी को लेकर भी कोई लापरवाही नहीं बरतने की चेतावनी दी गई है। सीसीटीवी से निगरानी विष्णुपद परिसर में अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर पुलिस अलर्ट 18 अप्रैल को निकलने वाली प्रभात फेरी को लेकर भी प्रशासन ने खास तैयारी शुरू कर दी है। अनुमंडल पदाधिकारी सदर को निर्देश दिया गया है कि उस दिन ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त रखी जाए। शहर में कहीं जाम की स्थिति न बने, इसका विशेष ध्यान रखने को कहा गया है। यज्ञ के दौरान मंदिर परिसर में भीड़ नियंत्रण की मुकम्मल व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। निरीक्षण के दौरान डीएम विष्णुपद परिसर स्थित पुस्तकालय भी पहुंचे। यहां रखे प्राचीन ग्रंथ और अलग-अलग भाषाओं में लिखे अभिलेखों को देखा। इस दौरान उन्होंने वरीय उप समाहर्ता धनराज कुमार को निर्देश दिया कि सभी प्राचीन दस्तावेजों को स्कैन कर डिजिटल फॉर्मेट में सुरक्षित किया जाए। डीएम शशांक शुभंकर ने कहा कि यह धरोहर बेहद कीमती है, इसे संरक्षित करना जरूरी है। निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त, सदर एसडीओ और मंदिर प्रबंधकारिणी के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। साथ ही भारत सरकार के पोर्टल पर अपलोड करने की प्रक्रिया जल्द पूरी करने को कहा गया।
20 अप्रैल से शुरू होगा मुख्य यज्ञ, रोज गूंजेंगे वैदिक मंत्र 19 अप्रैल को वेदी पूजन, मंडप पूजन और अग्नि स्थापना की प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद 20 अप्रैल से 26 अप्रैल तक नियमित यज्ञ होगा। यज्ञ का संचालन कर्नाटक के माध्वाचार्य संप्रदाय के गुरु यादवाचार्य के आचार्यत्व में होगा। काशी और गया के विद्वान आचार्य भी इसमें शामिल होंगे। हर दिन सुबह 8 बजे से यज्ञ शुरू होगा। नई यज्ञशाला में पांच कुंड बनाए गए हैं, जहां वैदिक मंत्रों के बीच आहुतियां दी जाएंगी। 28 अप्रैल को होगा विशाल भंडारा 26 अप्रैल को महायज्ञ की पूर्णाहुति होगी। इसके बाद 28 अप्रैल को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। समिति के सदस्यों ने गया जिले के धर्मप्रेमियों से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में पहुंचकर इस महायज्ञ को सफल बनाएं। मन्दिर विष्णुपद में होने वाला यह आयोजन शहर को एक बार फिर धार्मिक ऊर्जा से भरने जा रहा है। 9 दिन तक गया में भक्ति, आस्था और संस्कृति की अलग ही तस्वीर दिखेगी। गयाजी के विष्णुपद मंदिर परिसर में 18 अप्रैल से महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। महायज्ञ की शुरुआत जलभरी यात्रा के साथ होगी। शनिवार सुबह 8:30 बजे विष्णुपद मंदिर परिसर से भव्य कलश यात्रा निकलेगी। गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों के साथ यह यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरेगी। बुधवार को डीएम शशांक शुभंकर ने तैयारियों की समीक्षा की। विधि-व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और ट्रैफिक मैनेजमेंट को लेकर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए। खास तौर पर गर्मी को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था करने को कहा गया है। चिकित्सीय सुविधा को लेकर भी प्रशासन गंभीर दिखा। यज्ञ के दौरान मेडिकल टीम तैनात रहेगी। जरूरत पड़ने पर तत्काल इलाज मिले, इसके लिए एंबुलेंस की भी समुचित व्यवस्था रखने को कहा गया है। साथ ही साफ-सफाई और फायर सेफ्टी को लेकर भी कोई लापरवाही नहीं बरतने की चेतावनी दी गई है। सीसीटीवी से निगरानी विष्णुपद परिसर में अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर पुलिस अलर्ट 18 अप्रैल को निकलने वाली प्रभात फेरी को लेकर भी प्रशासन ने खास तैयारी शुरू कर दी है। अनुमंडल पदाधिकारी सदर को निर्देश दिया गया है कि उस दिन ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त रखी जाए। शहर में कहीं जाम की स्थिति न बने, इसका विशेष ध्यान रखने को कहा गया है। यज्ञ के दौरान मंदिर परिसर में भीड़ नियंत्रण की मुकम्मल व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। निरीक्षण के दौरान डीएम विष्णुपद परिसर स्थित पुस्तकालय भी पहुंचे। यहां रखे प्राचीन ग्रंथ और अलग-अलग भाषाओं में लिखे अभिलेखों को देखा। इस दौरान उन्होंने वरीय उप समाहर्ता धनराज कुमार को निर्देश दिया कि सभी प्राचीन दस्तावेजों को स्कैन कर डिजिटल फॉर्मेट में सुरक्षित किया जाए। डीएम शशांक शुभंकर ने कहा कि यह धरोहर बेहद कीमती है, इसे संरक्षित करना जरूरी है। निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त, सदर एसडीओ और मंदिर प्रबंधकारिणी के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। साथ ही भारत सरकार के पोर्टल पर अपलोड करने की प्रक्रिया जल्द पूरी करने को कहा गया।
20 अप्रैल से शुरू होगा मुख्य यज्ञ, रोज गूंजेंगे वैदिक मंत्र 19 अप्रैल को वेदी पूजन, मंडप पूजन और अग्नि स्थापना की प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद 20 अप्रैल से 26 अप्रैल तक नियमित यज्ञ होगा। यज्ञ का संचालन कर्नाटक के माध्वाचार्य संप्रदाय के गुरु यादवाचार्य के आचार्यत्व में होगा। काशी और गया के विद्वान आचार्य भी इसमें शामिल होंगे। हर दिन सुबह 8 बजे से यज्ञ शुरू होगा। नई यज्ञशाला में पांच कुंड बनाए गए हैं, जहां वैदिक मंत्रों के बीच आहुतियां दी जाएंगी। 28 अप्रैल को होगा विशाल भंडारा 26 अप्रैल को महायज्ञ की पूर्णाहुति होगी। इसके बाद 28 अप्रैल को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। समिति के सदस्यों ने गया जिले के धर्मप्रेमियों से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में पहुंचकर इस महायज्ञ को सफल बनाएं। मन्दिर विष्णुपद में होने वाला यह आयोजन शहर को एक बार फिर धार्मिक ऊर्जा से भरने जा रहा है। 9 दिन तक गया में भक्ति, आस्था और संस्कृति की अलग ही तस्वीर दिखेगी।


