Maharashtra विधान परिषद चुनाव: MVA ने 5 में से 3 सीटें जीतीं, Mahayuti में तकरार

Maharashtra विधान परिषद चुनाव: MVA ने 5 में से 3 सीटें जीतीं, Mahayuti में तकरार

महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीट के लिए हुए चुनाव में विपक्षी गठबंधन महा विकास आघाडी (एमवीए) की झोली में तीन सीट जाने के बाद बृहस्पतिवार को सत्तारूढ़ ‘महायुति’ की आंतरिक कलह सामने आ गई। महायुति में शामिल भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता पक्ष के खराब प्रदर्शन के लिए अपनी सहयोगी शिवसेना को जिम्मेदार ठहराया। कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी को बृहस्पतिवार को नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विजेता घोषित किया गया।

इस चुनाव के लिए मतगणना प्रक्रिया 40 घंटे से भी अधिक समय तक चली, जिस पर सबकी नजरें टिकी थीं। इस निर्वाचन क्षेत्र से वंजारी की जीत इसलिए खास है क्योंकि नागपुर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह नगर है तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का मुख्यालय भी यहीं स्थित है। इतना ही नहीं, गडकरी ने खुद जुलाई 1990 से मई 2014 तक लगातार 24 वर्षों तक इस सीट का महाराष्ट्र विधान परिषद में प्रतिनिधित्व किया है।

कांग्रेस उम्मीदवार की जीत के साथ विपक्षी ‘महा विकास आघाडी’ (एमवीए) ने 23 अक्टूबर को हुए चुनाव में विधान परिषद की पांच में से तीन सीट जीत ली हैं। वहीं, भाजपा के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ ‘महायुति’ को दो सीट मिलीं। महाराष्ट्र भाजपा के मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने आरोप लगाया कि शिवसेना ने पुणे और नागपुर निर्वाचन क्षेत्रों में गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया।

उन्होंने कहा कि पुणे में (शिक्षक सीट के लिए) निर्दलीय उम्मीदवार सचिन सानप को अंतिम समय में दिए गए समर्थन ने महायुति की एकजुटता को भारी नुकसान पहुंचाया। बन ने शिवसेना विधायक अब्दुल सत्तार पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने छत्रपति संभाजीनगर में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के खिलाफ प्रचार किया, जिसके कारण गठबंधन को सीटों का नुकसान उठाना पड़ा। महायुति में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) शामिल हैं।

दूसरी ओर, महाराष्ट्र भाजपा के उपाध्यक्ष केशव उपाध्ये ने विधान परिषद चुनाव के नतीजों की गहन समीक्षा करने की मांग की। उन्होंने सवाल किया कि जब सहयोगी दल मिलकर चुनाव लड़ते तो सभी सीटों पर कब्जा जमा सकते थे, फिर भी सत्तारूढ़ गठबंधन केवल दो सीटों पर ही जीत क्यों दर्ज कर सका। शिवसेना विधायक अब्दुल सत्तार ने कहा कि भाजपा को अब यह तय करना चाहिए कि वह एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली पार्टी के साथ अपना गठबंधन जारी रखना चाहती है या नहीं।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की उम्मीदवार हर्षदा देशमुख-जाधव ने पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी वंजारी ने नागपुर स्नातक सीट पर कब्जा जमाया। वहीं, छत्रपति संभाजीनगर (मराठवाड़ा) स्नातक सीट पर भी राकांपा (शरदचंद्र पवार) प्रत्याशी ने जीत दर्ज की।शिवसेना के किरण सरनाइक ने अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जीत हासिल की जबकि भाजपा उम्मीदवार कौस्तुभ गावडे पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विजयी हुए। महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री और राकांपा अध्यक्ष सुनेत्रा पवार ने कहा कि विधान परिषद चुनाव के नतीजों को लेकर पार्टी आत्ममंथन करेगी।

दूसरी ओर, शिवसेना (उबाठा) के सांसद संजय राउत ने दावा किया कि इन चुनावों में मतदान करने वाले स्नातकों ने भाजपा और उसके सहयोगियों को खारिज कर दिया है तथा मतपत्र के जरिए उन्हें शिकस्त दी है। राउत ने यह भी कहा कि सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों ही खेमों में गठबंधन धर्म का पूरी तरह से पालन नहीं किया गया। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने विधान परिषद की पांच में से तीन सीटों पर एमवीए की जीत को राजनीतिक बदलाव का संकेत बताया।

उन्होंने कहा कि नागपुर से पार्टी के अभिजीत वंजारी का फिर से चुना जाना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। वंजारी ने भारतीय जनता पार्टी के सुधाकर कोहले को 3,271 मतों से हराया और नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट बरकरार रखी। इस सीट को भाजपा का गढ़ माना जाता था।

मतगणना मंगलवार सुबह शुरू हुई और बृहस्पतिवार तड़के समाप्त हुई। कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित भाजपा नेताओं पर तंज कसने में देर नहीं की। मोदी और फडणवीस ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में संकेत दिया था कि विपक्षी पार्टी चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाई।

महाराष्ट्र कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर फडणवीस की हटाई गई एक पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा किया। इस पोस्ट में उन्होंने कहा था कि (कांग्रेस) पार्टी को चुनावों में ‘‘बड़ा शून्य’’ मिला है। महाराष्ट्र कांग्रेस ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘ट्वीट डिलीट करके, फडणवीस ने एक बार फिर सावरकर की विरासत को बचा लिया है।

पूरे नतीजे आने से पहले ही एक बड़ा तीर चलाने के चक्कर में फडणवीस ने ट्वीट कर दिया। लेकिन वही तीर पलटकर सीधे उनके सीने में जा लगा। आखिरकार, उन्हें वह ट्वीट डिलीट करना ही पड़ा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘फडणवीस अभी से डर गए?

यह तो बस बानगी है! 2029 में महाराष्ट्र की जनता आप पर ऐसा राजनीतिक बम गिराएगी कि आज का यह ट्वीट भी आपको याद आएगा और परेशान करेगा! शुभकामनाएं, मान्यवर फडणवीस!

अगले झटके के लिए तैयार रहें।’’
राकांपा नेता प्रफुल्ल पटेल ने पार्टी के एकमात्र उम्मीदवार की चुनाव में हार के बाद उसकी प्राथमिकताओं और संगठनात्मक ढांचे की तत्काल समीक्षा करने की मांग की। महाराष्ट्र में 78 सदस्यीय विधान परिषद में भाजपा 35 सदस्यों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है। इसके बाद शिवसेना के 12 और राकांपा के 10 सदस्य हैं।

विपक्षी दलों में कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के पास पांच-पांच सदस्य हैं जबकि राकांपा (शप) के दो सदस्य हैं। सदन में चार निर्दलीय सदस्य भी हैं।

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