नोएडा में श्रमिक के आंदोलन ने हिंसक रुप लिया। जांच के बाद करीब 203 संविदाकारों की पहचान की गई। जिनके श्रमिकों ने तोड़फोड़ की। पूरे आंदोलन में इन संविदाकारों की भूमिका संदिग्ध मिली। जिला प्रशासन ने सष्पट किया कि 24 कारखानों के 203 सविदाकारों के खिलाफ लाइसेंस निरस्तीकरण, धनराशि की वसूली एवं फर्म को ब्लैक लिस्ट में डालने की कार्रवाई की जा रही है। यही नहीं श्रम कानूनों का पालन न करने और श्रमिकों को उनके हित से वंचित रखा गया। ऐसे में 1 करोड़ 16 लाख 5 हजार 067 की रकम श्रमिकों को भुगतान करने के लिए नोटिस जारी किया।
अपर श्रमायुक्त ने बताया कि शासन स्तर से गठित उच्च स्तरीय समिति द्वारा गौतमबुद्धनगर एवं गाजियाबाद जनपद में 74 अनुसूचित नियोजनों में कार्यरत श्रमिकों के लिए 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई। दरअसल नोएडा में चलने वाली अधिकांश बड़ी यूनिट में संविदाकारों द्वारा ही श्रमिक उपलब्ध कराए जाते है। कंपनियों से इनका अनुबंध होता है। सैलरी संविदाकारों को दी जाती है और बाद में ये श्रमिकों को बांटते है। कागजों पर काम पूरा होता है लेकिन श्रमिकों के हाथ कम मेहनताना मिलता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। वसूली की होगी कार्रवाई संविदाकारों द्वारा अपने श्रमिकों को समय से वेतन का भुगतान न करने व कम भुगतान करनें पर उनके विरूद्ध वसूली की कार्रवाई की जाएगी। उनके लाइसेंस निरस्त करते हुए उन्हें ब्लैक लिस्ट किया जाएगा। संविदाकारों द्वारा अपने श्रमिकों को समय से वेतन का भुगतान न करने अथवा कम भुगतान करने पर उनके प्रधान सेवायोजक का भी उत्तरदायित्व होगा।


