किशनगंज SC-ST थानाध्यक्ष सस्पेंड:FIR दर्ज करने में देरी और लापरवाही पर SP की कार्रवाई

किशनगंज SC-ST थानाध्यक्ष सस्पेंड:FIR दर्ज करने में देरी और लापरवाही पर SP की कार्रवाई

किशनगंज एसपी संतोष कुमार ने एससी-एसटी थानाध्यक्ष दीपू कुमार को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई शनिवार शाम को प्राथमिकी दर्ज करने में देरी और कर्तव्य में लापरवाही बरतने के आरोप में की गई। निलंबन की अवधि के दौरान थानाध्यक्ष दीपू कुमार को केवल जीवन यापन भत्ता देय होगा। उन्हें सात दिनों के भीतर विभागीय जांच के खिलाफ अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया गया है। एसपी ने डीएसपी साइबर से जांच कराई एसपी संतोष कुमार को एक महिला परिवादी से शिकायत मिली थी कि थाने में आवेदन दिए जाने के चार दिन बाद भी पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने डीएसपी साइबर से इसकी जांच कराई। जांच रिपोर्ट में थानाध्यक्ष के खिलाफ कई गंभीर खामियां और अनियमितताएं पाई गईं। पीड़िता के आवेदन पर थानाध्यक्ष दीपू कुमार ने न तो स्टेशन डायरी में कोई प्रविष्टि की और न ही कोई कार्रवाई की। वरीय अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद ही मामले में प्राथमिकी दर्ज की जा सकी। इस पूरे प्रकरण में थानाध्यक्ष की भूमिका संदिग्ध पाई गई। संदेहास्पद तरीके से ‘समझौता’ लिख दिया गया था एक अन्य मामले में यह भी सामने आया कि गंभीर प्रकृति के अपराध में भी आरोपी की गिरफ्तारी या केस के निष्पादन के लिए थानाध्यक्ष द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि केवल कागजी खानापूर्ति की गई। जांच में कई आवेदनों पर संदेहास्पद तरीके से ‘समझौता’ लिख दिया गया था, जो संतोषजनक नहीं था। जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, थानाध्यक्ष दीपू कुमार का यह कृत्य कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, मनमानेपन, आदेशों के उल्लंघन और संदिग्ध आचरण के साथ-साथ विभागीय व विधिक नियमों के उल्लंघन को दर्शाता है। एसपी संतोष कुमार ने स्पष्ट किया कि पुलिस कर्तव्य निर्वहन में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता, उदंडता या भ्रष्ट आचरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ ऐसी ही सख्त कार्रवाई की जाएगी। किशनगंज एसपी संतोष कुमार ने एससी-एसटी थानाध्यक्ष दीपू कुमार को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई शनिवार शाम को प्राथमिकी दर्ज करने में देरी और कर्तव्य में लापरवाही बरतने के आरोप में की गई। निलंबन की अवधि के दौरान थानाध्यक्ष दीपू कुमार को केवल जीवन यापन भत्ता देय होगा। उन्हें सात दिनों के भीतर विभागीय जांच के खिलाफ अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया गया है। एसपी ने डीएसपी साइबर से जांच कराई एसपी संतोष कुमार को एक महिला परिवादी से शिकायत मिली थी कि थाने में आवेदन दिए जाने के चार दिन बाद भी पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने डीएसपी साइबर से इसकी जांच कराई। जांच रिपोर्ट में थानाध्यक्ष के खिलाफ कई गंभीर खामियां और अनियमितताएं पाई गईं। पीड़िता के आवेदन पर थानाध्यक्ष दीपू कुमार ने न तो स्टेशन डायरी में कोई प्रविष्टि की और न ही कोई कार्रवाई की। वरीय अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद ही मामले में प्राथमिकी दर्ज की जा सकी। इस पूरे प्रकरण में थानाध्यक्ष की भूमिका संदिग्ध पाई गई। संदेहास्पद तरीके से ‘समझौता’ लिख दिया गया था एक अन्य मामले में यह भी सामने आया कि गंभीर प्रकृति के अपराध में भी आरोपी की गिरफ्तारी या केस के निष्पादन के लिए थानाध्यक्ष द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि केवल कागजी खानापूर्ति की गई। जांच में कई आवेदनों पर संदेहास्पद तरीके से ‘समझौता’ लिख दिया गया था, जो संतोषजनक नहीं था। जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, थानाध्यक्ष दीपू कुमार का यह कृत्य कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, मनमानेपन, आदेशों के उल्लंघन और संदिग्ध आचरण के साथ-साथ विभागीय व विधिक नियमों के उल्लंघन को दर्शाता है। एसपी संतोष कुमार ने स्पष्ट किया कि पुलिस कर्तव्य निर्वहन में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता, उदंडता या भ्रष्ट आचरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ ऐसी ही सख्त कार्रवाई की जाएगी।  

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