झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) ने गुरुवार को आठवीं बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया। इस बार कुल 5,16,168 परीक्षार्थियों में से 4,81,647 सफल घोषित किए गए हैं। राज्य का कुल पास प्रतिशत 93.31% रहा, जो पिछले वर्ष 2025 के 94.39% की तुलना में 1.08 प्रतिशत कम है। सबसे सुखद खबर रांची की है। रांची जिला एक साल में 15वें पायदान से सीधे टॉप पर पहुंच गया। जिले के 96.80% बच्चे सफल रहे। वहीं खूंटी 86.27% के साथ सबसे निचले पायदान पर रहा। इस रणनीति से रांची पहले पायदान पर 1. प्रोजेक्ट टीम की रणनीति: सफलता का सबसे बड़ा आधार टीम (टेस्टिंग इवैल्यूएशन एसेसमेंट) रहा। इसमें केवल पढ़ाना उद्देश्य नहीं था, बल्कि समय पर सिलेबस पूरा करने के बाद बच्चों के सीखने के स्तर की लगातार जांच की गई। 2. कमजोर बच्चों की पहचान : प्री-बोर्ड परीक्षाएं लीं। जो बच्चे पीछे रह गए थे, उन्हें चिह्नित किया गया। यह रणनीति का टर्निंग पॉइंट था। 3. एक्स्ट्रा क्लासेस: कमजोर बच्चों के लिए लगातार एक्स्ट्रा क्लासेस चलाई गईं। हर बच्चे की जरूरत के मुताबिक अलग तैयारी कराई गई। 4. रियल टाइम मॉक टेस्ट: फरवरी में बच्चों को तीन प्रैक्टिस सेट हल कराए गए। 27-28 फरवरी को बोर्ड परीक्षा की तर्ज पर 3 घंटे का मॉक टेस्ट लिया गया। इससे बच्चों में परीक्षा का डर खत्म हो गया। झारखंड बोर्ड परीक्षा परिणाम 2026: एक नजर में जिलों का प्रदर्शन (टॉप 3 और अन्य) तुलनात्मक विश्लेषण वर्षवार तुलना: वर्ष 2026: 93.31% वर्ष 2025: 94.39% मुख्य आकर्षण: इस वर्ष भी लड़कियों ने बाजी मारी है (93.70%) और वे लड़कों (92.89%) से आगे रही हैं। झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) ने गुरुवार को आठवीं बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया। इस बार कुल 5,16,168 परीक्षार्थियों में से 4,81,647 सफल घोषित किए गए हैं। राज्य का कुल पास प्रतिशत 93.31% रहा, जो पिछले वर्ष 2025 के 94.39% की तुलना में 1.08 प्रतिशत कम है। सबसे सुखद खबर रांची की है। रांची जिला एक साल में 15वें पायदान से सीधे टॉप पर पहुंच गया। जिले के 96.80% बच्चे सफल रहे। वहीं खूंटी 86.27% के साथ सबसे निचले पायदान पर रहा। इस रणनीति से रांची पहले पायदान पर 1. प्रोजेक्ट टीम की रणनीति: सफलता का सबसे बड़ा आधार टीम (टेस्टिंग इवैल्यूएशन एसेसमेंट) रहा। इसमें केवल पढ़ाना उद्देश्य नहीं था, बल्कि समय पर सिलेबस पूरा करने के बाद बच्चों के सीखने के स्तर की लगातार जांच की गई। 2. कमजोर बच्चों की पहचान : प्री-बोर्ड परीक्षाएं लीं। जो बच्चे पीछे रह गए थे, उन्हें चिह्नित किया गया। यह रणनीति का टर्निंग पॉइंट था। 3. एक्स्ट्रा क्लासेस: कमजोर बच्चों के लिए लगातार एक्स्ट्रा क्लासेस चलाई गईं। हर बच्चे की जरूरत के मुताबिक अलग तैयारी कराई गई। 4. रियल टाइम मॉक टेस्ट: फरवरी में बच्चों को तीन प्रैक्टिस सेट हल कराए गए। 27-28 फरवरी को बोर्ड परीक्षा की तर्ज पर 3 घंटे का मॉक टेस्ट लिया गया। इससे बच्चों में परीक्षा का डर खत्म हो गया। झारखंड बोर्ड परीक्षा परिणाम 2026: एक नजर में जिलों का प्रदर्शन (टॉप 3 और अन्य) तुलनात्मक विश्लेषण वर्षवार तुलना: वर्ष 2026: 93.31% वर्ष 2025: 94.39% मुख्य आकर्षण: इस वर्ष भी लड़कियों ने बाजी मारी है (93.70%) और वे लड़कों (92.89%) से आगे रही हैं।


