अगर कहा जाए कि बिहार में डिप्टी सीएम का पद खत्म हो गया है। प्रदेश में सिर्फ मुख्यमंत्री हैं और मंत्री हैं तो शायद आप चौक जाएंगे। ये हम नहीं सरकारी दस्तावेज बता रहे हैं कि सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री और बाकी 34 मंत्री हैं। डिप्टी सीएम का दर्जा किसी के पास नहीं है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या भाजपा की सरकार ने जदयू के दोनों उप मुख्यमंत्री से उनका पद छीन लिया है। दरअसल, 7 मई को सम्राट कैबिनेट का विस्तार हुआ और मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग की जारी अधिसूचना में मुख्यमंत्री के साथ मंत्रियों के विभाग तो बताए गए, लेकिन विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव के नाम के आगे “उप मुख्यमंत्री” नहीं लिखा गया। इधर, रविवार सुबह जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, सीनियर लीडर ललन सिंह, लेसी सिंह और अशोक चौधरी नीतीश कुमार से मिलने 7 सर्कुलर रोड पहुंचे। जहां मंत्रियों के कामकाज को लेकर चर्चा हुई। दैनिक भास्कर की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में जानिए ये पूरा मामला क्या है। किन-किन पॉइंट पर गड़बड़ी हुई। गवर्नर हाउस से लेकर कैबिनेट सचिवालय तक कैसे चुक हुई। 22 दिनों में डिप्टी सीएम का पद छीना क्या सम्राट चौधरी की सरकार ने क्या दोनों उप मुख्यमंत्री विजय चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव से उप मुख्यमंत्री का पद हटा दिया। कैबिनेट सचिवालय का 15 अप्रैल 2025 का नोटिफिकेशन की माने तो विजय चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव को उप मुख्यमंत्री का पद दिया गया था। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग का नोटिफिकेशन संख्या 01/2026 387 पटना-15, दिनांक 15 अप्रैल 2026 में स्पष्ट लिखा गया है कि सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री हैं। विजय चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव उप मुख्यमंत्री हैं। अब इस तारीख को जानिए— 15 अप्रैल 2025- बिहार के राज्यपाल ने सम्राट चौधरी सरकार की शपथ दिलाई थी।बिहार में ड्राइविंग सीट पर बैठी बीजेपी सरकार में सिर्फ तीन नेताओं को मंत्री पद की गोपनीयता की शपथ दिलाई गई थी। सम्राट चौधरी को बतौर सीएम, विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव को बतौर डिप्यूटी सीएम कैबिनेट में शामिल कराया गया था। तब यह काफी छोटा मंत्रिमंडल था। बंगाल चुनाव की वजह से अन्य मंत्री को शपथ नहीं दिलाई गई। अब जानिए नए नोटिफिकेशन में क्या है 7 मई 2026- सम्राट चौधरी के CM बनने के 22 दिन बाद गुरुवार को कैबिनेट का विस्तार किया गया। मेगा इवेंट में नीतीश के बेटे निशांत कुमार समेत 32 मंत्री सम्राट कैबिनेट में शामिल हुए। नई कैबिनेट में बीजेपी से 15, जेडीयू से 13, LJP(R)-2, HAM और RLM से एक-एक मंत्री हैं। 25 मिनट चले इस कार्यक्रम में एक साथ 5-5 विधायकों ने शपथ ली थी। निशांत कुमार पहली बार मंत्री बने हैं। वो फिलहाल किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। वहीं उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश फिर से मंत्री बने हैं, वो न फिलहाल MLA हैं, न MLC। समारोह में PM मोदी भी मौजूद रहे। सम्राट चौधरी के मंत्रिपरिषद जंबो-जेट वाला बन गया। इसमें सीएम समेत कुल कुल 35 नेता शामिल हुए। कैबिनेट की अधिकत्तम सीमा 36 से एक मात्र कम संख्या रखी गई। बिहार में डिप्टी सीएम की कुर्सी नहीं? बिहार सरकार के कैबिनेट सचिवालय के सर्कूलर की माने तो यहां कोई उप मुख्यमंत्री नहीं है। राज्य सरकार का आदेश कहता है कि विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव बाकी मंत्रियों की तरह केवल मंत्री हैं। इ्न्हें कोई विशिष्ट पद (उपमुख्यंत्री) नहीं दिए गए हैं। अधिसूचना में पहले नंबर पर सम्राट चौधरी का नाम है। नाम के बाद मुख्यमंत्री लिखा गया है। दूसरे कॉलम मे उन्हें दिए गए विभाग को दर्शाया गया है। दूसरे नंबर पर विजय चौधरी का नाम है। लेकिन इनके नाम के बाद उप मुख्यमंत्री नहीं लिखा गया।
तीसरे क्रम संख्या में बिजेंद्र प्रसाद यादव का नाम हैं। इनके साथ भी वहीं हुआ जो विजय चौधरी के साथ हुआ। विजेंद्र प्रसाद यादव नाम के बाद उप मुख्यमंत्री नही लिखा गया। अब नीतीश सरकार में जारी अधिसूचना को जानिए तारीख 21 नवंबर 2025 को मंत्रिमंडल संचिवालय ने अधिसूचना जारी की थी। जिसमें स्पष्ट तौर पर लिखा गया था कि मुख्यमंत्री कौन हैं और उप मुख्यमंत्री कौन-कौन रहेंगे। 21 नवंबर के नोटिफिकेशन में पहले नंबर पर नीतीश कुमार अंकित था। इसके बाद मुख्यमंत्री लिखा गया थ। इसके बाद दूसरे कॉलम में उनके पास विभाग की जानकारी दी गई थी। दूसरे नंबर संख्या पर सम्राट चौधरी के नाम के बाद कौमा फिर उप मुख्यमंत्री दर्शाया गया था। दूसरे कॉलम में उनके गृह विभाग के बारे में जानकारी डाली गई थी। तीसरे क्रम संख्या पर विजय कुमार सिन्हा लिखा गया था। उसके बगल में भी उप मुख्यमंत्री दर्शाया गया था। दूसरे कॉलम में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग और खान एवं भूतत्व विभाग को दर्शाया गया था। क्या ये माइनर एरर है? नहीं, यह कॉमन एरर नहीं हो सकता।और ना ही स्लिप ऑफ पेन कहा जाएंगा। विभाग के सूत्र बताते हैं कि यह कॉमन एरर नहीं है। कैबिनेट सचिवालय के सूत्र बताते है कि लोक भवन सचिवालय के आदेश को कैबिनेट सचिवालय ने नोटिफाय किया है। यही आदेश नोटिफिकेशन के पूर्व फाइल कई स्तर पर गुजरती है। सचिवालय सहायक से लेकर मुख्य सचिव स्तर तक भेजने का प्रावधान है। इसके पूर्व लोक भवन में फाइल राज्यपाल तक जा चुकी है। 1.मुख्यमंत्री कार्यालय-मंत्रिमंडल विस्तार और मंत्रियों के नामों की सूची मुख्यमंत्री द्वारा अंतिम रूप दी जाती है। सहयोगी दलों के साथ चर्चा के बाद सूची तैयार होती है। 2.मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग -यह विभाग सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मुख्यमंत्री द्वारा अनुमोदित नामों की सूची के आधार पर फाइल यहाँ तैयार की जाती है। विधिवत प्रस्ताव (proposal) बनता है। सचिवालय सहायक प्रस्ताव बनातें हैं। 3.अपर मुख्य सचिव:- मंत्रिमंडल अपर मुख्य सचिव जो अक्सर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी होते हैं। डाउन से भेजी गई फाइल की जांच करते हैं। इसे राजभवन भेजने से पहले प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं पूरी करते हैं। 4.राज्यपाल सचिवालय-अंतिम मंजूरी के लिए फाइल राज्यपाल के पास भेजी जाती है। शपथ ग्रहण का समय और तारीख राज्यपाल की स्वीकृति के बाद तय होती है। 5.अधिसूचना-राज्यपाल की मंजूरी के बाद, मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग औपचारिक अधिसूचना जारी करता है, जिसमें मंत्रियों के नाम और विभागों का उल्लेख होता है। अब जानिए पूरे मामले पर सरकार ने क्या कहा
पूरे मामले पर अब सरकार की ओर से सफाई आई है कि “डिप्टी सीएम का पद खत्म नहीं हुआ है, सिर्फ नोटिफिकेशन में हर बार पदनाम लिखना जरूरी नहीं होता।” मामले पर उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि यह प्रिटिंग की भूल हो सकती है और विभाग इसे सुधार लेगा। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने जरूर स्पष्ट किया कि 15 अप्रैल की शपथ ग्रहण अधिसूचना ही मान्य है, जिसमें दोनों नेताओं को उप मुख्यमंत्री बताया गया था। वहीं लोगों का सवाल है कि अगर पुरानी अधिसूचना में पदनाम लिखा जा सकता था, तो अब इसे लिखना जरूरी क्यों नहीं है? अगर कहा जाए कि बिहार में डिप्टी सीएम का पद खत्म हो गया है। प्रदेश में सिर्फ मुख्यमंत्री हैं और मंत्री हैं तो शायद आप चौक जाएंगे। ये हम नहीं सरकारी दस्तावेज बता रहे हैं कि सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री और बाकी 34 मंत्री हैं। डिप्टी सीएम का दर्जा किसी के पास नहीं है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या भाजपा की सरकार ने जदयू के दोनों उप मुख्यमंत्री से उनका पद छीन लिया है। दरअसल, 7 मई को सम्राट कैबिनेट का विस्तार हुआ और मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग की जारी अधिसूचना में मुख्यमंत्री के साथ मंत्रियों के विभाग तो बताए गए, लेकिन विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव के नाम के आगे “उप मुख्यमंत्री” नहीं लिखा गया। इधर, रविवार सुबह जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, सीनियर लीडर ललन सिंह, लेसी सिंह और अशोक चौधरी नीतीश कुमार से मिलने 7 सर्कुलर रोड पहुंचे। जहां मंत्रियों के कामकाज को लेकर चर्चा हुई। दैनिक भास्कर की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में जानिए ये पूरा मामला क्या है। किन-किन पॉइंट पर गड़बड़ी हुई। गवर्नर हाउस से लेकर कैबिनेट सचिवालय तक कैसे चुक हुई। 22 दिनों में डिप्टी सीएम का पद छीना क्या सम्राट चौधरी की सरकार ने क्या दोनों उप मुख्यमंत्री विजय चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव से उप मुख्यमंत्री का पद हटा दिया। कैबिनेट सचिवालय का 15 अप्रैल 2025 का नोटिफिकेशन की माने तो विजय चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव को उप मुख्यमंत्री का पद दिया गया था। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग का नोटिफिकेशन संख्या 01/2026 387 पटना-15, दिनांक 15 अप्रैल 2026 में स्पष्ट लिखा गया है कि सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री हैं। विजय चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव उप मुख्यमंत्री हैं। अब इस तारीख को जानिए— 15 अप्रैल 2025- बिहार के राज्यपाल ने सम्राट चौधरी सरकार की शपथ दिलाई थी।बिहार में ड्राइविंग सीट पर बैठी बीजेपी सरकार में सिर्फ तीन नेताओं को मंत्री पद की गोपनीयता की शपथ दिलाई गई थी। सम्राट चौधरी को बतौर सीएम, विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव को बतौर डिप्यूटी सीएम कैबिनेट में शामिल कराया गया था। तब यह काफी छोटा मंत्रिमंडल था। बंगाल चुनाव की वजह से अन्य मंत्री को शपथ नहीं दिलाई गई। अब जानिए नए नोटिफिकेशन में क्या है 7 मई 2026- सम्राट चौधरी के CM बनने के 22 दिन बाद गुरुवार को कैबिनेट का विस्तार किया गया। मेगा इवेंट में नीतीश के बेटे निशांत कुमार समेत 32 मंत्री सम्राट कैबिनेट में शामिल हुए। नई कैबिनेट में बीजेपी से 15, जेडीयू से 13, LJP(R)-2, HAM और RLM से एक-एक मंत्री हैं। 25 मिनट चले इस कार्यक्रम में एक साथ 5-5 विधायकों ने शपथ ली थी। निशांत कुमार पहली बार मंत्री बने हैं। वो फिलहाल किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। वहीं उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश फिर से मंत्री बने हैं, वो न फिलहाल MLA हैं, न MLC। समारोह में PM मोदी भी मौजूद रहे। सम्राट चौधरी के मंत्रिपरिषद जंबो-जेट वाला बन गया। इसमें सीएम समेत कुल कुल 35 नेता शामिल हुए। कैबिनेट की अधिकत्तम सीमा 36 से एक मात्र कम संख्या रखी गई। बिहार में डिप्टी सीएम की कुर्सी नहीं? बिहार सरकार के कैबिनेट सचिवालय के सर्कूलर की माने तो यहां कोई उप मुख्यमंत्री नहीं है। राज्य सरकार का आदेश कहता है कि विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव बाकी मंत्रियों की तरह केवल मंत्री हैं। इ्न्हें कोई विशिष्ट पद (उपमुख्यंत्री) नहीं दिए गए हैं। अधिसूचना में पहले नंबर पर सम्राट चौधरी का नाम है। नाम के बाद मुख्यमंत्री लिखा गया है। दूसरे कॉलम मे उन्हें दिए गए विभाग को दर्शाया गया है। दूसरे नंबर पर विजय चौधरी का नाम है। लेकिन इनके नाम के बाद उप मुख्यमंत्री नहीं लिखा गया।
तीसरे क्रम संख्या में बिजेंद्र प्रसाद यादव का नाम हैं। इनके साथ भी वहीं हुआ जो विजय चौधरी के साथ हुआ। विजेंद्र प्रसाद यादव नाम के बाद उप मुख्यमंत्री नही लिखा गया। अब नीतीश सरकार में जारी अधिसूचना को जानिए तारीख 21 नवंबर 2025 को मंत्रिमंडल संचिवालय ने अधिसूचना जारी की थी। जिसमें स्पष्ट तौर पर लिखा गया था कि मुख्यमंत्री कौन हैं और उप मुख्यमंत्री कौन-कौन रहेंगे। 21 नवंबर के नोटिफिकेशन में पहले नंबर पर नीतीश कुमार अंकित था। इसके बाद मुख्यमंत्री लिखा गया थ। इसके बाद दूसरे कॉलम में उनके पास विभाग की जानकारी दी गई थी। दूसरे नंबर संख्या पर सम्राट चौधरी के नाम के बाद कौमा फिर उप मुख्यमंत्री दर्शाया गया था। दूसरे कॉलम में उनके गृह विभाग के बारे में जानकारी डाली गई थी। तीसरे क्रम संख्या पर विजय कुमार सिन्हा लिखा गया था। उसके बगल में भी उप मुख्यमंत्री दर्शाया गया था। दूसरे कॉलम में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग और खान एवं भूतत्व विभाग को दर्शाया गया था। क्या ये माइनर एरर है? नहीं, यह कॉमन एरर नहीं हो सकता।और ना ही स्लिप ऑफ पेन कहा जाएंगा। विभाग के सूत्र बताते हैं कि यह कॉमन एरर नहीं है। कैबिनेट सचिवालय के सूत्र बताते है कि लोक भवन सचिवालय के आदेश को कैबिनेट सचिवालय ने नोटिफाय किया है। यही आदेश नोटिफिकेशन के पूर्व फाइल कई स्तर पर गुजरती है। सचिवालय सहायक से लेकर मुख्य सचिव स्तर तक भेजने का प्रावधान है। इसके पूर्व लोक भवन में फाइल राज्यपाल तक जा चुकी है। 1.मुख्यमंत्री कार्यालय-मंत्रिमंडल विस्तार और मंत्रियों के नामों की सूची मुख्यमंत्री द्वारा अंतिम रूप दी जाती है। सहयोगी दलों के साथ चर्चा के बाद सूची तैयार होती है। 2.मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग -यह विभाग सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मुख्यमंत्री द्वारा अनुमोदित नामों की सूची के आधार पर फाइल यहाँ तैयार की जाती है। विधिवत प्रस्ताव (proposal) बनता है। सचिवालय सहायक प्रस्ताव बनातें हैं। 3.अपर मुख्य सचिव:- मंत्रिमंडल अपर मुख्य सचिव जो अक्सर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी होते हैं। डाउन से भेजी गई फाइल की जांच करते हैं। इसे राजभवन भेजने से पहले प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं पूरी करते हैं। 4.राज्यपाल सचिवालय-अंतिम मंजूरी के लिए फाइल राज्यपाल के पास भेजी जाती है। शपथ ग्रहण का समय और तारीख राज्यपाल की स्वीकृति के बाद तय होती है। 5.अधिसूचना-राज्यपाल की मंजूरी के बाद, मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग औपचारिक अधिसूचना जारी करता है, जिसमें मंत्रियों के नाम और विभागों का उल्लेख होता है। अब जानिए पूरे मामले पर सरकार ने क्या कहा
पूरे मामले पर अब सरकार की ओर से सफाई आई है कि “डिप्टी सीएम का पद खत्म नहीं हुआ है, सिर्फ नोटिफिकेशन में हर बार पदनाम लिखना जरूरी नहीं होता।” मामले पर उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि यह प्रिटिंग की भूल हो सकती है और विभाग इसे सुधार लेगा। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने जरूर स्पष्ट किया कि 15 अप्रैल की शपथ ग्रहण अधिसूचना ही मान्य है, जिसमें दोनों नेताओं को उप मुख्यमंत्री बताया गया था। वहीं लोगों का सवाल है कि अगर पुरानी अधिसूचना में पदनाम लिखा जा सकता था, तो अब इसे लिखना जरूरी क्यों नहीं है?


