पीलीभीत पूरनपुर के मोहल्ला साहूकारा में रविवार को कुछ ऐसा ही मंजर देखने को मिला, जहाँ खुशियों की दस्तक मातम की चीख में बदल गई। एक ही आंगन में जहाँ पालने की डोरी और बेटी की डोली साथ-साथ सज रही थी, वहाँ अब सन्नाटा पसरा है और एक मासूम नवजात की सिसकियाँ व्यवस्था की संवेदनहीनता पर सवाल खड़ी कर रही हैं। सुरेंद्र कुमार के घर में रविवार को खुशियों का दोहरा संगम था। शुक्रवार को घर में लक्ष्मी (बेटी) के रूप में नई जान आई थी और रविवार को उनकी बहन चांदनी की बारात आनी थी। घर के एक कोने में मंगल गीत गाए जा रहे थे, तो दूसरे कोने में बेटी की विदाई की तैयारियाँ चल रही थीं। लेकिन शनिवार दोपहर तीन बजे अस्पताल के एक ‘जानलेवा’ इंजेक्शन ने इन तमाम अरमानों को आंसुओं के सैलाब में डुबो दिया।
बेबस पति और पत्थर दिल सिस्टम हर्षवती की तबीयत बिगड़ी तो पति सुरेंद्र डॉक्टरों के पैरों में गिरकर अपनी पत्नी की जिंदगी की भीख मांगता रहा। आरोप है कि भीषण गर्मी में वार्ड का पंखा तक बंद था और स्टाफ का दिल पसीजने के बजाय और सख्त हो गया। निजी अस्पताल ले जाने की छटपटाहट और एम्बुलेंस के इंतजार के बीच, सिस्टम की बेरुखी ने एक मां को उसकी कोख से उपजी नन्हीं जान से हमेशा के लिए जुदा कर दिया। अधूरी रही विदाई, ठिठक गई शादी जिस घर के दरवाजे पर बारात का स्वागत होना था, वहाँ से रविवार को एक अर्थी निकली। इस हृदयविदारक घटना ने ननद चांदनी की शादी की खुशियों को रोक दिया है। भाई की कलाई पर राखी बांधने और अपनी नन्ही भतीजी को दुलारने वाली हर्षवती अब केवल यादों में है। आज उस आंगन में सन्नाटा है, जहाँ कल तक ठहाके थे। अस्पताल की एक कथित लापरवाही ने न केवल एक जान ली, बल्कि एक पूरे परिवार के संसार को उजाड़ दिया। वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग में पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्य कमेटी गठित की है मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य संगीता अनेजा ने पूरी मामले की जानकारी दी है।


