रेगिस्तान में शिक्षा की जिद, भवन नहीं तो झोंपों में चलती पाठशाला

रेगिस्तान में शिक्षा की जिद, भवन नहीं तो झोंपों में चलती पाठशाला

सरहदी इलाकों के दूरस्थ गांवों और ढाणियों में शिक्षा के प्रति ग्रामीणों की प्रतिबद्धता मिसाल बन रही है। विद्यालय स्वीकृत होने के बावजूद भवन निर्माण नहीं होने पर लोगों ने स्वयं आगे बढ़कर बच्चों के लिए पढ़ाई की व्यवस्था तैयार की। झोंपों, सभाभवन और कमरों में चल रही कक्षाओं ने भीषण गर्मी और लू के बीच विद्यार्थियों को राहत दी है।

ग्रामीणों की पहल से नन्हों को भीषण गर्मी और लू से मिली राहत

पोकरण क्षेत्र के छायण गांव की प्रेमाराम की ढाणी में वर्ष 2011 में राजकीय प्राथमिक विद्यालय स्वीकृत हुआ था। करीब 15 वर्षों बाद भी भवन निर्माण नहीं हुआ। शुरुआत में इंतजार किया गया, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी तो ग्रामीणों ने मिलकर झोंपा तैयार किया। ईंटों से कमरेनुमा ढांचा बनाकर उस पर छप्पर डाला गया। खुले क्षेत्र में हवा के प्रवाह के कारण यह झोंपा तपती गर्मी में भी अपेक्षाकृत ठंडा रहता है, जिससे 35 विद्यार्थी बिना अधिक परेशानी के पढ़ाई कर पा रहे हैं।

वर्षों से भवन अधूरा, सिस्टम की सुस्ती पर भारी ग्रामीण संकल्प

इसी तरह सादा गांव के मेघरिखसर, नानणियाई के किशनपुरा और सांकड़ा क्षेत्र के खेतासर स्थित सांखलों मेघवालों की ढाणी में भी पिछले तीन वर्षों से प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। यहां भवन नहीं बनने पर ग्रामीणों ने सभाभवन और उपलब्ध कमरों में कक्षाएं शुरू करवाईं। इससे छोटे बच्चों को सुरक्षित और छायादार स्थान मिला है। ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालय स्वीकृति के साथ भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए थी, लेकिन वर्षों बीतने के बाद भी कार्य आगे नहीं बढ़ा। इसके बावजूद स्थानीय लोगों ने शिक्षा को रुकने नहीं दिया। संसाधनों की कमी के बीच उठाया गया यह कदम शिक्षा के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी का मजबूत उदाहरण बनकर उभरा है।

बांटे बूट-मोजे, बच्चों के चेहरों पर लौटी मुस्कान

राजकीय प्राथमिक विद्यालय, तोताराम की ढाणी में पूर्व जिला प्रमुख अंजना मेघवाल ने छात्र-छात्राओं को बूट और मोजे वितरित किए। भीषण गर्मी को देखते हुए बच्चों को शीतल पेय भी दिया गया। कार्यक्रम का आयोजन विद्यालय के तत्वावधान में किया गया, जिसमें विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं कोजराज सिंह, रश्मि बलनाणी और राजकवर मौजूद रहे। इस अवसर पर जिला प्रमुख अंजना मेघवाल ने बच्चों को शिक्षा का महत्व समझाते हुए उन्हें नियमित अध्ययन और पढ़ाई के प्रति सकारात्मक रहने के लिए प्रेरित किया। प्रधानाचार्य विनोद छंगाणी ने आभार व्यक्त किया।

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