गयाजी में उद्योगपति के भाई विनोद अडाणी ने पिंडदान किया:विष्णुपद मंदिर में 2 घंटे तक चला अनुष्ठान, परिवार-पूर्वजों की शांति की कामना की

गयाजी में उद्योगपति के भाई विनोद अडाणी ने पिंडदान किया:विष्णुपद मंदिर में 2 घंटे तक चला अनुष्ठान, परिवार-पूर्वजों की शांति की कामना की

उद्योगपति गौतम अडाणी के भाई विनोद अडाणी ने शुक्रवार को गयाजी में अपने पूर्वजों का पिंडदान किया। उन्होंने अपनी पत्नी रजनबेन अडाणी के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों से यह अनुष्ठान संपन्न किया। विनोद अडाणी सीधे विष्णुपद मंदिर पहुंचे। मंदिर परिसर के सभा मंडप में उनके लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। तीर्थ पुरोहित और विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शंभू लाल विट्ठल ने पूरे विधि-विधान के साथ अनुष्ठान कराया। पिंडदान के दौरान उन्होंने फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट पर धार्मिक क्रियाएं की। हिंदू धर्म में गया श्राद्ध का विशेष महत्व है, जहां पिंडदान से पूर्वजों की आत्मा को मोक्ष मिलने की मान्यता है। विनोद अडाणी ने अपने माता-पिता सहित सभी पितरों के ब्रह्मलोक गमन की कामना की। धार्मिक अनुष्ठान लगभग दो घंटे तक चला। पिंडदान के बाद, उन्होंने विष्णुपद मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु के चरणों में पिंड अर्पित कर विशेष पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने अपने परिवार और पूर्वजों की शांति एवं कल्याण के लिए मंगल कामना की। पुलिस बल के साथ निजी सुरक्षाकर्मी भी रहे इस दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। मंदिर परिसर और आसपास पुलिस बल के साथ निजी सुरक्षा गार्ड भी तैनात थे। आम श्रद्धालुओं और मीडियाकर्मियों की आवाजाही सीमित रखी गई। प्रशासन और मंदिर समिति ने मिलकर कार्यक्रम को सुव्यवस्थित किया। तीर्थ पुरोहित शंभू लाल विट्ठल ने बताया कि विनोद अडाणी ने एक दिवसीय पिंडदान के तहत सभी आवश्यक धार्मिक क्रियाएं पूरी की। उन्होंने कहा कि इस अनुष्ठान का उद्देश्य पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करना होता है।
मंदिर समिति ने विनोद अडाणी को सम्मानित किया अनुष्ठान समाप्त होने के बाद मंदिर समिति की ओर से विनोद अडाणी को सम्मानित भी किया गया। धार्मिक दृष्टि से गया का विशेष महत्व है और यहां देश-विदेश से लोग अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध और पिंडदान करने आते हैं। विनोद अडाणी का यह दौरा भी इसी आस्था और परंपरा का प्रतीक माना जा रहा है। अनुष्ठान पूरा करने के बाद वे मंदिर परिसर से रवाना हो गए। उद्योगपति गौतम अडाणी के भाई विनोद अडाणी ने शुक्रवार को गयाजी में अपने पूर्वजों का पिंडदान किया। उन्होंने अपनी पत्नी रजनबेन अडाणी के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों से यह अनुष्ठान संपन्न किया। विनोद अडाणी सीधे विष्णुपद मंदिर पहुंचे। मंदिर परिसर के सभा मंडप में उनके लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। तीर्थ पुरोहित और विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शंभू लाल विट्ठल ने पूरे विधि-विधान के साथ अनुष्ठान कराया। पिंडदान के दौरान उन्होंने फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट पर धार्मिक क्रियाएं की। हिंदू धर्म में गया श्राद्ध का विशेष महत्व है, जहां पिंडदान से पूर्वजों की आत्मा को मोक्ष मिलने की मान्यता है। विनोद अडाणी ने अपने माता-पिता सहित सभी पितरों के ब्रह्मलोक गमन की कामना की। धार्मिक अनुष्ठान लगभग दो घंटे तक चला। पिंडदान के बाद, उन्होंने विष्णुपद मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु के चरणों में पिंड अर्पित कर विशेष पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने अपने परिवार और पूर्वजों की शांति एवं कल्याण के लिए मंगल कामना की। पुलिस बल के साथ निजी सुरक्षाकर्मी भी रहे इस दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। मंदिर परिसर और आसपास पुलिस बल के साथ निजी सुरक्षा गार्ड भी तैनात थे। आम श्रद्धालुओं और मीडियाकर्मियों की आवाजाही सीमित रखी गई। प्रशासन और मंदिर समिति ने मिलकर कार्यक्रम को सुव्यवस्थित किया। तीर्थ पुरोहित शंभू लाल विट्ठल ने बताया कि विनोद अडाणी ने एक दिवसीय पिंडदान के तहत सभी आवश्यक धार्मिक क्रियाएं पूरी की। उन्होंने कहा कि इस अनुष्ठान का उद्देश्य पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करना होता है।
मंदिर समिति ने विनोद अडाणी को सम्मानित किया अनुष्ठान समाप्त होने के बाद मंदिर समिति की ओर से विनोद अडाणी को सम्मानित भी किया गया। धार्मिक दृष्टि से गया का विशेष महत्व है और यहां देश-विदेश से लोग अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध और पिंडदान करने आते हैं। विनोद अडाणी का यह दौरा भी इसी आस्था और परंपरा का प्रतीक माना जा रहा है। अनुष्ठान पूरा करने के बाद वे मंदिर परिसर से रवाना हो गए।  

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