वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने रविवार को कहा कि वायुसेना हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति पर लगातार करीब से नजर रख रही है और भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए दूरदराज के क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से अभियान चलाने की अपनी क्षमता मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। उनकी यह टिप्पणी संसाधनों से समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर वैश्विक चिंता के बीच आई है। भारत, अमेरिका और अन्य प्रमुख शक्तियां इस क्षेत्र को स्वतंत्र, मुक्त और शांतिपूर्ण बनाए रखने की वकालत करती रही हैं।
वायुसेना प्रमुख ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक विशेष साक्षात्कार में भारत की प्राथमिकताएं स्पष्ट करते हुए कहा कि राष्ट्रीय हितों, संप्रभुता और रणनीतिक स्वायत्तता की रक्षा करना तथा नियमों पर आधारित हिंद-प्रशांत व्यवस्था का समर्थन करना देश की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा, “भारतीय वायुसेना के दृष्टिकोण से इसके लिए विशिष्ट क्षमताओं की आवश्यकता है। हमें दूर तक पहुंचने, लगातार निगरानी रखने, वायुसेना के संसाधनों का हवाई परिवहन एवं आवाजाही, हवाई क्षेत्र की स्थिति की जानकारी, नेटवर्क आधारित कमान एवं नियंत्रण और लंबी दूरी तक प्रभावी ढंग से अभियान चलाने की क्षमता की जरूरत है।”
उन्होंने कहा, “अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में हमारी रणनीतिक स्थिति पूर्वी हिंद महासागर क्षेत्र में अभियान चलाने के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है।
हवा में ईंधन भरने वाली प्रणालियां और हवाई चेतावनी प्रणालियां हमें अपनी सीमाओं से काफी दूर तक अभियान चलाने की क्षमता प्रदान करती हैं और वहां की परिस्थितियों के प्रति हमारी जागरुकता बढ़ाती हैं।”
एयर चीफ मार्शल सिंह ने किसी देश का नाम लिए बिना क्षेत्र में तेजी से बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य पर बात की। उन्होंने कहा, “हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक सुरक्षा का केंद्र बन गया है। यहां सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा तथा क्षेत्रीय दावों में तेजी आ रही है।”
उन्होंने कहा, “इस पूरे क्षेत्र और इसके समुद्री इलाकों में हाल के घटनाक्रम सतर्कता, हमले रोकने की प्रभावी सैन्य क्षमता और व्यापक क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।”
सिंह ने वायुसेना की तैयारियों के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि वायुसेना क्षमता और आपसी विश्वास बढ़ाने के लिए समान विचारधारा वाले देशों की वायुसेनाओं के साथ सहयोग मजबूत कर रही है।
उन्होंने कहा कि आपसी विश्वास भी क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में दीर्घकालिक भूमिका निभाता है। वायु सेना प्रमुख ने कहा, “हम हिंद-प्रशांत क्षेत्र के घटनाक्रमों पर करीब से नजर रख रहे हैं। हमारा दृष्टिकोण किसी एक विशेष खतरे पर केंद्रित नहीं है।
हम ऐसी वायुसेना तैयार कर रहे हैं, जो उभरती चुनौतियों का समय रहते पता लगा सके, विभिन्न क्षेत्रों में अभियान चला सके और जहां भी भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यकता हो, वहां अपेक्षित परिणाम हासिल कर सके।”
उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना देश की सुरक्षा के लिए ‘‘तैयार है और आगे भी तैयार रहेगी।’’
वायुसेना प्रमुख ने कहा, “हम जटिल सैन्य अभ्यासों और अभियानगत सहयोग के माध्यम से मित्र देशों की वायुसेनाओं के साथ मिलकर काम करने की क्षमता मजबूत कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया और थाईलैंड में भारतीय वायुसेना की हालिया तैनाती से हमें लंबी दूरी के अभियानों, संबंधित क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों की समझ, बड़े पैमाने पर सैन्य बलों के संचालन और समुद्री क्षेत्रों में हवाई अभियानों का महत्वपूर्ण अनुभव मिला है।”
भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए चार देशों के समूह ‘क्वाड’ के सदस्य देशों—अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ मिलकर काम कर रहा है। इस समूह ने पिछले कुछ वर्षों में इस दिशा में कई पहल की हैं।
एयर चीफ मार्शल सिंह ने क्षमताओं के विकास के लिए मित्र देशों की वायुसेनाओं के साथ भारतीय वायुसेना के सहयोग के उदाहरण भी दिए। उन्होंने कहा, “फरवरी 2026 में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से संचालित भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों ने हिंद महासागर में रॉयल थाई एयर फोर्स के साथ संयुक्त अभ्यास किया था।”
उन्होंने कहा, “इस तरह के सहयोग से हमारी क्षमताएं बढ़ती हैं और आपसी विश्वास मजबूत होता है। यह विश्वास अपने आप में क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में दीर्घकालिक योगदान देता है।”
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि इन साझेदारियों के साथ-साथ खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी एवं टोही, अंतरिक्ष आधारित प्रणालियों, सटीक निशाना साधने वाले हथियारों, मानवरहित प्रणालियों और मजबूत संचार नेटवर्क जैसी क्षमताएं भी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के विशाल समुद्री विस्तार में समान रूप से महत्वपूर्ण होंगी।

