राजस्थान में इस साल मानसून की बेरुखी और औसत से काफी कम बारिश के कारण अकाल के हालात पैदा हो गए हैं। फसलों की खराब स्थिति और पानी की भारी कमी को देखते हुए जोधपुर, बांसवाड़ा और जालोर समेत प्रदेश के 13 जिलों की कुल 53 तहसीलों को ‘गंभीर एवं मध्यम सूखाग्रस्त’ घोषित किया गया है। इनमें बांसवाड़ा की 3, बाड़मेर की 9, बालोतरा की 3, चूरू की 1, डूंगरपुर की 7, ब्यावर की 1, जैसलमेर की 5, जालोर की 9, जोधपुर की 7, फलोदी की 5, नागौर की 1, पाली की 1 और सिरोही की 1 तहसील शामिल है। राज्य सरकार ने रविवार को इसकी अधिसूचना जारी की। अधिसूचना जारी, 6 महीने तक प्रभावी रहेंगे कानूनी प्रावधान
आपदा प्रबंधन एवं राहत विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सूखाग्रस्त घोषित किए गए क्षेत्रों में संबंधित कानूनी प्रावधान अधिसूचना प्रकाशन की तारीख से आगामी 6 महीने तक लागू रहेंगे। सरकार ने वर्षा की कमी, भूजल स्तर में गिरावट, सतही जल की उपलब्धता और फसलों के नुकसान का वैज्ञानिक आकलन करने के बाद यह निर्णय लिया है। जालोर में औसत से 374 एमएम कम बरसे बादल
इस बार जालोर जिले में बारिश की स्थिति बेहद चिंताजनक रही। जिले में औसतन करीब 200 मिमी बारिश ही दर्ज की गई, जो कि सामान्य औसत वर्षा से लगभग 374 मिमी कम है। पर्याप्त बारिश न होने से खेतों में खड़ी फसलें सूख गईं और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा, जिससे जिले में अकाल जैसे हालात बन गए। जालोर की ये तहसीलें सूखाग्रस्त श्रेणी में शामिल
सरकार की ओर से जारी सूची के अनुसार, जालोर जिले की आहोर, चितलवाना, जसवंतपुरा, बागोड़ा, भीनमाल, रानीवाड़ा, सांचौर, सायला और भाद्राजून को सूखाग्रस्त क्षेत्रों में शामिल किया गया है। प्रभावित तहसीलों और गांवों का विस्तृत ब्यौरा आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार तय किया जाएगा। किसानों को राहत मिलने की बंधी उम्मीद
कम बारिश के कारण कृषि गतिविधियां ठप होने से परेशान किसानों के लिए यह घोषणा राहत की उम्मीद लेकर आई है। जिला प्रशासन अब प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य, पशुओं के लिए चारे-पानी का प्रबंध और अन्य आवश्यक प्रशासनिक कदम उठा सकेगा। हालांकि, तहसीलवार प्रभावित गांवों और मिलने वाली राहत व्यवस्थाओं की विस्तृत गाइडलाइंस जल्द स्पष्ट होगी।

