यमुनानगर के लालढांग में शुक्रवार को हुआ सड़क हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि दो परिवारों की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल देने वाली त्रासदी बन गया। रेणुका जी के दर्शन की खुशी लेकर घर से निकला परिवार कुछ ही घंटों में मातम में बदल गया। मक्के से भरे बेकाबू ट्रक ने एक पिता, उसकी दो मासूम बेटियों और रिश्तेदार की जान ले ली। अब घर में सिर्फ घायल मां उषा और बड़ी बेटी ऐनी ही बची हैं। उषा ने बताया कि इस हादसे में मौत इतनी तेजी से सामने से आई कि किसी को भी चींखने तक का मौका नहीं मिला। ट्रक के नीचे से दबने से हडि्डयां तक टूट गईं। ऐसे में शव टुकड़ों में निकाले गए और फिर थैलों में गठरी की तरह बांधकर अस्पताल पहुंचाए गए। चुहड़पुर कलां गांव का वह घर, जहां कल तक रेणुका जी जाने की तैयारियां और बच्चियों की खिलखिलाहट गूंज रही थी, आज सन्नाटे में डूबा हुआ है। गांव के श्मशान घाट में जब पिता राजेंद्र धीमान और उनकी दोनों बेटियां सिमरन उर्फ सिम्मी (16) व मिनल उर्फ मिनी (14) की चिताएं एक साथ जलीं तो वहां मौजूद हर आंख नम हो गई। कई बार बना प्लान, इस बार जाना था तय हादसे में गंभीर रूप से घायल उषा ने अस्पताल में बताया कि परिवार काफी समय से हिमाचल प्रदेश स्थित श्री रेणुका जी मंदिर के दर्शन करने की योजना बना रहा था। कई बार कार्यक्रम बना, लेकिन किसी न किसी कारण से टल गया। राजेंद्र की बहन के देवर फूल सिंह निवासी दौलतपुर भी लगातार उन्हें रेणुका जी चलने के लिए कह रहे थे। गर्मी अधिक होने के कारण भी कार्यक्रम आगे बढ़ता रहा। इस बीच बेटियों की स्कूल से छुट्टियां हो गईं और मौसम में बदलाव आने पर शुक्रवार को आखिरकार परिवार ने यात्रा पर जाने का फैसला कर लिया। उषा के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब सात बजे ही फूल सिंह बाइक लेकर उनके घर पहुंच गए थे। उन्होंने परिवार के साथ खाना भी खाया। सभी इतने उत्साहित थे कि जल्दी-जल्दी तैयारियां कीं और तय किया कि दो बाइकों पर जाएंगे। यदि दर्शन में देर हो गई तो रेणुका जी स्थित आश्रम में रुककर अगले दिन वापस लौटेंगे। बड़ी बेटी घर पर रह गई, बाकी दर्शन करने निकले उषा बताती हैं कि उनकी बड़ी बेटी ऐनी घर पर ही रुकना चाहती थी। ऐसे में सुबह करीब साढ़े आठ बजे दो बाइकों पर पांच लोग घर से रवाना हुए। फूल सिंह की बाइक पर सिम्मी और मिनी बैठी थीं, जबकि उषा अपने पति राजेंद्र धीमान की बाइक पर सवार थीं। रास्ता न भटक जाएं, इसलिए दोनों बाइकें साथ-साथ चल रही थीं। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सफर उनका आखिरी सफर साबित होगा। परिवार कलेसर नेशनल पार्क के जंगल से गुजरते हुए लालढांग के पास पहुंचा। यहां हिमाचल प्रदेश की सीमा शुरू होती है। सड़क पर तीखा मोड़ और ढलान है। मौत सामने से आ गई, चीखने तक का मौका नहीं मिला उषा के अनुसार, जैसे ही वे लालढांग की चढ़ाई शुरू करने वाले थे, सामने से मक्के के बोरों से लदा एक ट्रक आता दिखाई दिया। ढलान और मोड़ के कारण ट्रक अचानक बेकाबू हो गया और हिचकोले खाते हुए रॉन्ग साइड आ गया। पलक झपकते ही ट्रक दोनों बाइकों के ऊपर पलट गया। उषा ट्रक की चपेट से छिटककर कुछ दूर जा गिरीं, लेकिन उनके पति राजेंद्र, दोनों बेटियां और फूल सिंह ट्रक के नीचे दब गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा इतना भयानक था कि ट्रक के नीचे दबे लोगों को चीखने तक का मौका नहीं मिला। भारी ट्रक और उसके ऊपर लदा मक्का सीधे बाइकों पर आ गिरा। उषा भी हादसे के बाद बेहोश हो गईं। जब उन्हें होश आया तो आसपास लोगों की भीड़ लगी हुई थी। उन्होंने पति, बेटियों और फूल सिंह के बारे में पूछा, लेकिन किसी ने कुछ नहीं बताया। स्थानीय लोग और पुलिस मौके पर पहुंच चुके थे। ट्रक के नीचे दबे लोगों को निकालने के लिए पहले मक्के की बोरियां हटाई गईं, फिर क्रेन बुलाकर ट्रक को उठाया गया। टुकड़ों में मिले शव, थैलों में बांधकर लाया गया अस्पताल हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ट्रक के नीचे दबने से मृतकों के शरीर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। हड्डियां टूट चुकी थीं और शवों की हालत ऐसी थी कि उन्हें बड़े-बड़े थैलों में गठरी की तरह बांधकर सिविल अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस तक पहुंचाया गया। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि ऐसा मंजर देखकर उनकी आंखों से भी आंसू निकल आए। एक घर से पिता और दो बेटियां चली गईं इस हादसे ने चुहड़पुर कलां के एक परिवार को लगभग खत्म कर दिया। राजेंद्र धीमान, उनकी दो बेटियां सिम्मी और मिनी अब इस दुनिया में नहीं हैं। घर में केवल घायल मां उषा और बड़ी बेटी ऐनी बची हैं। जिस आंगन में दोनों छोटी बेटियों की हंसी गूंजती थी, वहां अब मातम पसरा है। वहीं हादसे में मारे गए फूल सिंह के पास कोई औलाद नहीं थी। वह अपनी पत्नी के साथ दौलतपुर गांव में ही रहता था और दुकान चलाता था। फूल सिंह की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी बिल्कुल अकेली पड़ गई है। प्रतापनगर थाना प्रभारी रोहताश ने बताया कि यूपी नंबर ट्रक को कब्जे में ले लिया गया है। उसका ड्राइवर अभी फरार है। ट्रक की तलाशी लेने में काई दस्तावेज बरामद नहीं हुआ है। जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं शवों के पास्टमार्टम करा परिजनों को सौंप दिए गए हैं।


