बिहार के सरकारी स्कूलों में गुरुकुल पद्धति से पढ़ाई होगी। आधुनिक ‘रूम टू रीड’ मॉडल के तर्ज पर बच्चों को पढ़ाया जाएगा। इस नई व्यवस्था के तहत कक्षाओं को सजाया जाएगा। दीवारों और बोर्ड पर विभिन्न विषयों से संबंधित वाक्य और स्लोगन लिखे जाएंगे। क्लास के दौरान शिक्षक जो बोलेंगे, छात्र उसे सामूहिक रूप से दोहराएंगे। यही नहीं, छात्रों को ब्लैक बोर्ड के पास खड़ा करके पाठ को तेज आवाज में स्पष्ट उच्चारण के साथ पढ़वाया जाएगा। इस दौरान कठिन शब्दों को अंडरलाइन करके लिखवाया जाएगा और उसका अर्थ उदाहरण के साथ बताया जाएगा। इसके लिए प्रथम चरण में 50 स्कूलों को चिह्नित किया गया है। यदि योजना सफल हुई, तो अन्य स्कूलों में भी यह इसे लागू किया जाएगा। इसके लिए एनसीआरटी के माघ्यम से शिक्षकों को ट्रेनिंग भी दी गई है। सबसे अधिक ध्यान अंग्रेजी, हिंदी और गणित जैसे मुख्य विषयों पर दिया जाएगा। हिंदी के वाक्यों को पढ़ाने के साथ ही सही उच्चारण को दोहराया जाएगा, ताकि अशुद्ध बोलने वाले छात्र भी सही तरीके से पढ़ना सीख सकें। अंग्रेजी को रटाने के बजाय विजुअल तरीके से सिखाया जाएगा। अंग्रेजी पढ़ाने के बाद हिंदी में उसका अर्थ समझाया जाएगा। जैसे-जैसे छात्र भाषा सीखने लगेंगे, उन्हें केवल अंग्रेजी का सांकेतिक अर्थ ही बताया जाएगा। इसी तरह, गणित के कठिन सूत्रों को समझाने के लिए पैसों के लेन-देन, खाने की वस्तुओं और कक्षा में मौजूद छात्रों की संख्या जैसे सजीव व व्यावहारिक उदाहरणों का सहारा लिया जाएगा। संगीत, कला और खेल की शिक्षा दी जाएगी स्कूलों में छात्रों को रचनात्मक तरीके से पढ़ाया जाएगा। पढ़ाई में केवल विषय की जानकारी ही नहीं दी जाएगी, छात्रों को रुचि के मुताबिक संगीत, कला, नृत्य की भी शिक्षा दी जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि छात्र पढ़ाई के साथ दूसरी विधा में सीख सकें। छात्रों को स्कूल में दौड़, बाधा दौड़, ऊंची और लंबी कूद सहित अन्य पारंपरिक खेल भी सिखाया जाएगा। बिहार के सरकारी स्कूलों में गुरुकुल पद्धति से पढ़ाई होगी। आधुनिक ‘रूम टू रीड’ मॉडल के तर्ज पर बच्चों को पढ़ाया जाएगा। इस नई व्यवस्था के तहत कक्षाओं को सजाया जाएगा। दीवारों और बोर्ड पर विभिन्न विषयों से संबंधित वाक्य और स्लोगन लिखे जाएंगे। क्लास के दौरान शिक्षक जो बोलेंगे, छात्र उसे सामूहिक रूप से दोहराएंगे। यही नहीं, छात्रों को ब्लैक बोर्ड के पास खड़ा करके पाठ को तेज आवाज में स्पष्ट उच्चारण के साथ पढ़वाया जाएगा। इस दौरान कठिन शब्दों को अंडरलाइन करके लिखवाया जाएगा और उसका अर्थ उदाहरण के साथ बताया जाएगा। इसके लिए प्रथम चरण में 50 स्कूलों को चिह्नित किया गया है। यदि योजना सफल हुई, तो अन्य स्कूलों में भी यह इसे लागू किया जाएगा। इसके लिए एनसीआरटी के माघ्यम से शिक्षकों को ट्रेनिंग भी दी गई है। सबसे अधिक ध्यान अंग्रेजी, हिंदी और गणित जैसे मुख्य विषयों पर दिया जाएगा। हिंदी के वाक्यों को पढ़ाने के साथ ही सही उच्चारण को दोहराया जाएगा, ताकि अशुद्ध बोलने वाले छात्र भी सही तरीके से पढ़ना सीख सकें। अंग्रेजी को रटाने के बजाय विजुअल तरीके से सिखाया जाएगा। अंग्रेजी पढ़ाने के बाद हिंदी में उसका अर्थ समझाया जाएगा। जैसे-जैसे छात्र भाषा सीखने लगेंगे, उन्हें केवल अंग्रेजी का सांकेतिक अर्थ ही बताया जाएगा। इसी तरह, गणित के कठिन सूत्रों को समझाने के लिए पैसों के लेन-देन, खाने की वस्तुओं और कक्षा में मौजूद छात्रों की संख्या जैसे सजीव व व्यावहारिक उदाहरणों का सहारा लिया जाएगा। संगीत, कला और खेल की शिक्षा दी जाएगी स्कूलों में छात्रों को रचनात्मक तरीके से पढ़ाया जाएगा। पढ़ाई में केवल विषय की जानकारी ही नहीं दी जाएगी, छात्रों को रुचि के मुताबिक संगीत, कला, नृत्य की भी शिक्षा दी जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि छात्र पढ़ाई के साथ दूसरी विधा में सीख सकें। छात्रों को स्कूल में दौड़, बाधा दौड़, ऊंची और लंबी कूद सहित अन्य पारंपरिक खेल भी सिखाया जाएगा।


