पीलीभीत में DIOS कार्यालय का एक चपरासी करोड़ों के गबन का मास्टरमाइंड निकला। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने सरकारी धन को तीन पत्नियों और रिश्तेदारों के खातों में खपाने के साथ-साथ बरेली के बिल्डरों के साथ रियल एस्टेट में भी निवेश किया।
चपरासी इल्हाम उर रहमान शम्सी पर सरकारी धन के बड़े गबन मामले की रकम करीब 1.02 करोड़ रुपए आंकी गई थी। वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 5 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। जांच में पता चला है कि आरोपी ने अपनी तीन पत्नियों और एक महिला रिश्तेदार के नाम पर बैंक खातों में बड़ी रकम जमा कराई। पुलिस ने दो पत्नियों और एक रिश्तेदार के खातों में जमा 59 लाख रुपये की एफडी को फ्रीज कर दिया है। इनमें से अकेले पीलीभीत में रहने वाली पत्नी अर्शी खातून के खाते में 33.30 लाख रुपए की एफडी मिली है। रियल एस्टेट में लगाया पैसा
इल्हाम शम्सी ने गबन की रकम को खपाने के लिए रियल एस्टेट का सहारा लिया। जांच में सामने आया कि उसने अपनी पत्नी के खाते से बरेली की जेएचएम इंफ्रा होम प्राइवेट लिमिटेड में 90 लाख रुपये ट्रांसफर किए। इसके अलावा ओरिका होम्स कंपनी में भी 17.18 लाख रुपए भेजे गए हैं। इन कंपनियों के संचालक अब पुलिस की जांच के दायरे में हैं। 2014 से 2026 तक का रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस
पुलिस अब 2014 से 2026 तक के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही है। जिले के 35 राजकीय और 22 सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों के कर्मचारियों का डेटा खंगाला जा रहा है। आशंका है कि आरोपी ने वेतन मद में फर्जी लाभार्थी बनाकर लंबे समय तक सरकारी धन का गबन किया। मामले में आरोपी की पत्नी अर्शी खातून को पहले ही जेल भेजा जा चुका था। जिसे बाद में जमानत मिल गई। वहीं मुख्य आरोपी इल्हाम शम्सी ने अग्रिम जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। पुलिस अब 53 संदिग्ध खातों की जांच कर पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में जुटी है। एसपी सुकीर्ति माधव मिश्रा ने बताया- पूरे मामले में पुलिस ने प्रारंभिक जांच के आधार पर मुकदमा दर्ज किया। अब तक 5 करोड़ से अधिक की धनराशि को फ्रीज किया जा चुका है। आगे की जांच जारी है।


