मध्य प्रदेश में नर्मदा और उसकी सहायक नदियों में बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन जारी है। जबलपुर, नरसिंहपुर और कटनी जैसे जिलों में रेत माफिया खुलेआम नदियों से रेत निकाल रहे हैं। कई स्थानों पर 24 घंटे हाईफाई मशीनें, पोकलेन, जेसीबी और नावों के जरिए उत्खनन किया जा रहा है। यह स्थिति तब है, जब सुप्रीम कोर्ट ने चंबल क्षेत्र में अवैध रेत खनन को लेकर मध्य प्रदेश सहित तीन राज्यों को फटकार लगाई है। दैनिक भास्कर टीम ने जबलपुर-नरसिंहपुर सीमा से लगे घाटों का दौरा किया। यहां नर्मदा नदी के भीतर तक रैंप बनाए गए थे, जहां जेसीबी मशीनों से हाइवा में रेत भरी जा रही थी। स्थानीय लोगों के मुताबिक एक हाइवा रेत 30 से 50 हजार रुपए तक में बेची जा रही है। देखिए अवैध रेत खनन की तस्वीरें… नर्मदा, हिरण और परियट में मशीनों से खनन जबलपुर जिले के बेलखेड़ा क्षेत्र के ग्राम हीरापुर-अमोदा स्थित नर्मदा घाट पर हाईफाई डिवाइस के जरिए रेत निकाली जा रही है। यहां नदी किनारे रेत जमा कर हाइवा में भरकर जबलपुर सहित आसपास के जिलों में सप्लाई की जाती है। नादिया घाट से शुरू होकर यह नेटवर्क मालकछार, बेलखेड़ी, पावला घाट होते हुए नरसिंहपुर सीमा तक फैला हुआ है।
स्थानीय स्तर पर बताया गया कि माफियाओं ने नदी की धार मोड़कर बीच में रैंप तैयार कर लिए हैं, जहां भारी वाहन सीधे नदी के भीतर तक पहुंच रहे हैं। घाटों पर निगरानी के लिए युवक तैनात रहते हैं, जो किसी बाहरी व्यक्ति या प्रशासनिक गतिविधि की सूचना तुरंत नेटवर्क तक पहुंचाते हैं। कॉलोनियों और गांवों से संचालित हो रहा नेटवर्क टीम जब अमोदा घाट पहुंची तो वहां कई किलोमीटर तक फैला अस्थायी रैंप दिखाई दिया। मौके पर बड़ी मशीनों से लगातार रेत निकाली जा रही थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह काम लंबे समय से चल रहा है और संबंधित विभागों को इसकी जानकारी भी है। कटनी में भी जारी है अवैध उत्खनन कटनी जिले के विजयराघवगढ़ क्षेत्र में महानदी से भी बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक प्रतिदिन 100 से 150 डंपर अवैध रेत का परिवहन हो रहा है।
कुछ समय पहले प्रशासन ने महानदी की रेत खदानों को सरेंडर करने के आदेश जारी किए थे। इसके बाद ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर कार्रवाई करते हुए सैकड़ों वाहन जब्त किए गए थे। इसके बावजूद बड़े वाहन लगातार रेत ढोते दिखाई दे रहे हैं। केवल एक स्थान पर अनुमति खनिज विभाग के अधिकारियों के मानें तो जबलपुर जिले में केवल एक स्थान पर ही रेत भंडारण करने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा जहां भी रेत एकत्रित की जा रही है वह अवैध तरीके से भंडारण किया गया है। ऐसे में सवाल उठते हैं कि कालीघाट, तिलवाराघाट, बरगी, अमोद, हीरापुर के आसपास आखिर कैसे रेत के ढेर लगे हुए हैं और खनिज विभाग के अधिकारियों को इसकी जरा भी जानकारी नहीं, यह पूरी तरह समझ से परे हैं। इन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा खनन बरगी के नादिया घाट से पावला घाट तक नर्मदा में, हिरण, गौर और परियट नदियों में मशीनों से, बरेला, गौर, बरगी, चरगवां, शहपुरा और बेलखेड़ा में सबसे ज्यादा खनन हो रहा है। वहीं कांग्रेस के पूर्व विधायक संजय यादव ने बताया कि नर्मदा के साथ हिरण नदी में भी बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है। कार्रवाई केवल मजदूरों और छोटे वाहन चालकों पर होती है, जबकि असली माफिया बच निकलते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी फटकार 26 मई को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल चंबल सेंक्चुरी में हो रहे अवैध रेत खनन और माफियाओं के बढ़ते हमलों पर मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों को कड़ी फटकार लगाई थी।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा था कि केवल एफआईआर दर्ज करना या छोटे वाहन चालकों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि अवैध खनन के असली मास्टरमाइंड, फाइनेंसर और नेटवर्क संचालकों तक पहुंचना जरूरी है। ये खबर भी पढ़ें… नर्मदा में बेखौफ रेत माफिया, VIDEO वायरल नर्मदा नदी में अवैध रेत खनन एक बार फिर सुर्खियों में है। खनिज विभाग की लापरवाही और कथित संरक्षण के चलते खनन माफिया बेखौफ होकर नदी से लगातार रेत निकाल रहे हैं। शनिवार सुबह का बताया जा रहा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें बड़ी-बड़ी नावों के जरिए खुलेआम रेत खनन होता दिखाई दे रहा है। वीडियो में दर्जनों नावें नदी के बीच सक्रिय नजर आ रही हैं, जबकि प्रशासन अवैध खनन रोकने के दावे कर रहा है।पूरी खबर पढ़ें


