सामुदायिक भवन में चल रहे स्कूल के शिफ्टिंग का विरोध:मोतिहारी में ग्रामीणों ने विधायक से लगाई गुहार, बोले- जनसहयोग से उपलब्ध कराई सुविधाएं

सामुदायिक भवन में चल रहे स्कूल के शिफ्टिंग का विरोध:मोतिहारी में ग्रामीणों ने विधायक से लगाई गुहार, बोले- जनसहयोग से उपलब्ध कराई सुविधाएं

पूर्वी चंपारण के कल्याणपुर प्रखंड में एक स्कूल सामुदायिक भवन में संचालित हो रहा है। अपना भवन न होने के बावजूद अब इस स्कूल को दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने की तैयारी है, जिसका ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। पूर्वी चंपारण जिले के कल्याणपुर प्रखंड की पिपरा खेम पंचायत स्थित एनपीएस ध्रुव पकड़ी विद्यालय वर्ष 2007 से एक सामुदायिक भवन में चल रहा है। हैरानी की बात यह है कि 17 साल बाद भी इस विद्यालय का अपना भवन नहीं बन पाया है। जिस जमीन पर स्कूल भवन बनना था, वहां पहले से ही सामुदायिक भवन मौजूद है। विद्यालय में 150 से अधिक बच्चे नामांकित हैं, जिन्हें पांच शिक्षक पढ़ा रहे हैं। इन सबके बावजूद अब इस स्कूल को दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है। ग्रामीणों ने इकट्ठा होकर किया विरोध प्रदर्शन स्कूल को स्थानांतरित करने की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठा हुए और इस फैसले का विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से लेकर जिला पदाधिकारी तक को आवेदन देकर स्कूल को वर्तमान स्थान पर ही बनाए रखने की मांग की है। जनसहयोग से स्कूल में सुविधाएं कराई गई उपलब्ध ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने जनसहयोग से स्कूल में शौचालय, नल, खेल का मैदान और सुरक्षा के लिए घेराबंदी तक करवाई है, ताकि बच्चों को बेहतर माहौल मिल सके। उनका स्पष्ट कहना है कि सभी बुनियादी सुविधाएं यहीं उपलब्ध हैं, इसलिए स्कूल यहीं रहेगा। ग्रामीणों ने केसरिया की विधायक शालिनी मिश्रा से भी मुलाकात की है। उन्होंने विधायक से अनुरोध किया है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप कर स्कूल को गांव से बाहर स्थानांतरित होने से रोकें। पूर्वी चंपारण के कल्याणपुर प्रखंड में एक स्कूल सामुदायिक भवन में संचालित हो रहा है। अपना भवन न होने के बावजूद अब इस स्कूल को दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने की तैयारी है, जिसका ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। पूर्वी चंपारण जिले के कल्याणपुर प्रखंड की पिपरा खेम पंचायत स्थित एनपीएस ध्रुव पकड़ी विद्यालय वर्ष 2007 से एक सामुदायिक भवन में चल रहा है। हैरानी की बात यह है कि 17 साल बाद भी इस विद्यालय का अपना भवन नहीं बन पाया है। जिस जमीन पर स्कूल भवन बनना था, वहां पहले से ही सामुदायिक भवन मौजूद है। विद्यालय में 150 से अधिक बच्चे नामांकित हैं, जिन्हें पांच शिक्षक पढ़ा रहे हैं। इन सबके बावजूद अब इस स्कूल को दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है। ग्रामीणों ने इकट्ठा होकर किया विरोध प्रदर्शन स्कूल को स्थानांतरित करने की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठा हुए और इस फैसले का विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से लेकर जिला पदाधिकारी तक को आवेदन देकर स्कूल को वर्तमान स्थान पर ही बनाए रखने की मांग की है। जनसहयोग से स्कूल में सुविधाएं कराई गई उपलब्ध ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने जनसहयोग से स्कूल में शौचालय, नल, खेल का मैदान और सुरक्षा के लिए घेराबंदी तक करवाई है, ताकि बच्चों को बेहतर माहौल मिल सके। उनका स्पष्ट कहना है कि सभी बुनियादी सुविधाएं यहीं उपलब्ध हैं, इसलिए स्कूल यहीं रहेगा। ग्रामीणों ने केसरिया की विधायक शालिनी मिश्रा से भी मुलाकात की है। उन्होंने विधायक से अनुरोध किया है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप कर स्कूल को गांव से बाहर स्थानांतरित होने से रोकें।  

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