करनाल में 2 नशा तस्करों को 10-10 साल की कैद:कोर्ट ने लगाया एक लाख जुर्माना, मध्य प्रदेश से चूरा पोस्त लाकर करते थे सप्लाई

करनाल में 2 नशा तस्करों को 10-10 साल की कैद:कोर्ट ने लगाया एक लाख जुर्माना, मध्य प्रदेश से चूरा पोस्त लाकर करते थे सप्लाई

करनाल में नशीला पदार्थ तस्करी के बड़े मामले में करनाल की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रीतू की कोर्ट ने दो दोषी मानते हुए 10-10 साल की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया भी गया है। जुर्माना अदा न करने पर 6 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। बता दें कि, 10 दिसंबर 2018 को पुलिस को सूचना मिली थी कि करनाल में एक गिरोह मध्य प्रदेश से चूरा पोस्त लाकर अलग-अलग जगहों पर सप्लाई करता है। सूचना के अनुसार नशीला पदार्थ गुरुद्वारा गोविंदपुरा के पास खेत में पराली के नीचे छिपाकर रखा गया था। पुलिस ने तुरंत टीम बनाकर मौके पर छापेमारी की। वहां पराली के ढेर के पास खड़े तीन लोग पुलिस को देखकर भागने लगे, लेकिन टीम ने उन्हें काबू कर लिया। तलाशी के दौरान 24 सफेद प्लास्टिक के कट्टों में भरा 360 किलो चूरा पोस्त बरामद हुआ। तीन आरोपी मौके से गिरफ्तार पूछताछ में आरोपियों की पहचान कल्वेहड़ी निवासी बलराज सिंह, नहर कॉलोनी चीका जिला कैथल निवासी सिंगारा सिंह और खरका निवासी दिलबाग सिंह के रूप में हुई थी। 11 दिसंबर 2018 को आरोपियों को कोर्ट में पेश कर 17 दिसंबर 2018 तक रिमांड पर लिया गया। इस दौरान पुलिस ने कई जगहों पर दबिश दी। जांच में सामने आया बड़ा नेटवर्क जांच में खुलासा हुआ कि इस गिरोह में डेरा गोविंदपुरा निवासी विक्रम सिंह, सिंगारा सिंह, गुरदयाल सिंह उर्फ हरदयाल सिंह, सुखा सिंह, दिलबाग सिंह और बलराज सिंह शामिल थे। ये सभी मिलकर मध्य प्रदेश से चूरा पोस्त लाकर सप्लाई करते थे। सिंगारा सिंह ने जांच में सहयोग नहीं किया, जिसके चलते उसे 12 दिसंबर 2018 को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया। फरार आरोपियों पर भी कार्रवाई मामले में गुरदयाल सिंह उर्फ हरदयाल सिंह को जांच के दौरान निर्दोष पाया गया। वहीं मुख्य आरोपी विक्रम सिंह लंबे समय तक फरार रहा और 21 अगस्त 2019 को उसे भगोड़ा घोषित किया गया। इसके बाद 12 जून 2020 को उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए चालान अदालत में पेश किया गया। बाद में 4 मार्च 2022 को उसे गिरफ्तार कर लिया गया और न्यायालय में पेश कर जिला जेल करनाल भेज दिया गया। सुखा सिंह ने 9 जनवरी 2019 को निचली अदालत से जमानत की कोशिश की, जो खारिज हो गई। इसके बाद 12 फरवरी 2019 को चंडीगढ़ हाई कोर्ट से उसे अंतरिम जमानत मिली। जांच में शामिल होने के बाद 22 मई 2019 को उसके खिलाफ पूरक चालान पेश किया गया। अदालत में मजबूत साक्ष्य पेश
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर आरोप साबित किए। अदालत ने सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए दिलबाग सिंह और बलराज सिंह को दोषी करार दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि नशा तस्करी समाज के लिए गंभीर खतरा है। इसी को देखते हुए दोषियों को 10 साल की सजा और एक लाख रुपए जुर्माना लगाया गया। जुर्माना न देने पर दोनों को 6 माह अतिरिक्त सजा काटनी होगी।

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