दिल की बीमारी काफी गंभीर होती है और इसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। दिल की बीमारियों खासकर हार्ट अटैक की वजह से हर साल कई लोग अपनी जान गंवा देते हैं। अब हार्ट अटैक आने की मुख्य वजहों में शुमार कोलेस्ट्रॉल को लेकर नई गाइडलाइन सामने आई है। पुरानी गाइडलाइन के मुकाबले इसमें कई बदलाव भी किए गए हैं, जिससे समय रहते हार्ट अटैक के खतरे से निपटा जा सके।
क्या कहती है नई गाइडलाइन?
अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी और अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने यह गाइडलाइन जारी की हैं। पहले सामान्य तौर पर उम्र बढऩे पर कोलेस्ट्रॉल की जांच कराने का सुझाव दिया जाता था। लेकिन अब कोलेस्ट्रॉल की जांच कम उम्र में शुरू करने की सलाह दी गई है, जिससे जल्द पता लगाकर समय पर उपचार किया जा सके, खासतौर पर उन लोगों के लिए जिनके परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास रहा है।
जेनेटिक समस्या की स्थिति में जांच बेहद ज़रूरी
नई गाइडलाइन के अनुसार जिन लोगों में दिल की बीमारियों से जुड़ीजेनेटिक समस्या होती है, उन्हें 9 साल की उम्र से ही अपने शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर की जांच करानी चाहिए। साथ ही ‘एल-पी (ए)’ नाम के एक खास तरह के फैट की जांच भी ज़रूरी बताई गई है। गर्भवती महिलाओं और बुज़ुर्गों के लिए भी अलग-अलग सलाह दी गई है।
एलडीएल कम करना जरूरी
कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखना बेहद ज़रूरी है। जब शरीर में एलडीएल (खराब कोलेस्ट्रॉल) बढ़ता है, तो नसों में फैट जमने लगता है और ब्लॉकेज हो सकता है, जो आगे चलकर हार्ट अटैक और स्ट्रोक का कारण बनता है। नई गाइडलाइन के अनुसार अच्छा और खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर कितना हो यह भी बताया गया है।
कितना हो एलडीएल का स्तर?
⦿ जिन्हें दिल की बीमारी नहीं है उनके लिए एलडीएल 100 एमजी/डीएल से कम होना चाहिए।
⦿ जिन्हें मध्यम खतरा है उनके लिए एलडीएल 70 एमजी/डीएल से नीचे होना चाहिए।
⦿ जिन्हें ज़्यादा खतरा है उनके लिए एलडीएल 55 एजजी/डीएल से कम होना चाहिए।
रिस्क कैलकुलेटर ‘प्रिवेंट’ है उपयोगी
‘प्रिवेंट’ नामक एक नया रिस्क कैलकुलेटर टूल भी पेश किया है। यह अगले 10 और 30 साल में दिल की बीमारी के खतरे का अनुमान लगाता है। इसमें सिर्फ कोलेस्ट्रॉल ही नहीं, बल्कि ब्लड शुगर, डायबिटीज़ और किडनी से जुड़ी जानकारी भी शामिल है। इसे 30 साल की उम्र से इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार 80-90% दिल की बीमारियाँ रोजमर्रा की आदतों से जुड़ी होती हैं।


