Ice Burn Symptoms: जब भी हमें कहीं चोट लगती है, मोच आती है या सूजन होती है, तो हमारा पहला ध्यान बर्फ से सिकाई करने पर ही जाता है। हम तुरंत फ्रीजर से बर्फ निकालते हैं और दर्द वाली जगह पर रगड़ना शुरू कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आग और गर्म पानी की तरह ठंडी-ठंडी बर्फ भी आपकी त्वचा को झुलसा सकती है? बर्फ को सीधे और ज्यादा देर तक स्किन पर लगाए रखने से त्वचा जल सकती है। मेडिकल की भाषा में इसे आइस बर्न (Ice Burn) या फ्रोस्टबाइट का शुरुआती रूप कहा जाता है। अक्सर लोग सोचते हैं कि ठंडक तो त्वचा को आराम पहुंचाती है, तो इससे नुकसान कैसे हो सकता है? आइए समझते हैं कि आइस बर्न क्या है, यह क्यों होता है, इसके लक्षण क्या हैं और इससे कैसे बचा जाए।
क्या होता है आइस बर्न (Ice Burn)?
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, आइस बर्न वह स्थिति है जब बहुत ज्यादा ठंडक के संपर्क में आने से त्वचा और उसके नीचे मौजूद नसें जमने लगती हैं। जब आप किसी बहुत ठंडी चीज जैसे बर्फ या आइस पैक को सीधे अपनी नंगी त्वचा पर रख लेते हैं, तो उस हिस्से की खून की नाड़ियां (Blood vessels) सिकुड़ जाती हैं। इससे उस जगह पर खून का बहाव रुक जाता है। जब त्वचा तक खून और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, तो वहां की कोशिकाएं (Cells) और टिश्यूज जमने लगते हैं और डैमेज हो जाते हैं। नतीजा यह होता है कि त्वचा वैसे ही झुलस जाती है जैसे आग से जलने पर होती है।
आइस बर्न होने के मुख्य कारण
हेल्थलाइन की रिसर्च के मुताबिक, आइस बर्न होने के पीछे ये मुख्य वजहें होती हैं;
- सीधे त्वचा पर बर्फ रखना।
- बहुत देर तक सिकाई करना।
- आइस पैक का गलत इस्तेमाल।
- ठंडे मौसम में गीली त्वचा होना।
- सर्कुलेशन से जुड़ी बीमारियां।
आइस बर्न के लक्षण?
- त्वचा का रंग बदलना।
- सुन्नपन या झुनझुनी।
- तेज दर्द या जलन।
- त्वचा का कड़ा और मोम जैसा होना।
- छाले पड़ना (Blisters)।
आइस बर्न हो जाए तो क्या करें?
- बर्फ तुरंत हटाएं।
- गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें।
- त्वचा को रगड़ें नहीं।
- छालों को न फोड़ें।
डॉक्टर के पास कब जाना जरूरी है?
- गुनगुने पानी से सिकाई करने के बाद भी त्वचा का सुन्नपन या तेज दर्द ठीक न हो।
- त्वचा पर बड़े-बड़े छाले पड़ जाएं।
- जख्म से मवाद निकलने लगे या तेज बुखार आ जाए।
बर्फ का इस्तेमाल करते वक्त इन बातों का रखें ध्यान
- कभी भी बर्फ को नंगी त्वचा पर न रखें।
- बर्फ या आइस पैक को हमेशा किसी सूती कपड़े या पतले तौलिए में लपेटकर ही सिकाई करें।
- एक बार में 15 से 20 मिनट से ज्यादा सिकाई न करें।
- सिकाई के दौरान सोते न रहें।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

