Share Market Today 2nd September 2026: भारतीय शेयर बाजार के लिए बुधवार का कारोबारी सत्र भी राहत लेकर नहीं आया। लगातार तीसरे दिन बाजार लाल निशान में बंद हुआ है। मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच फिर तेज हुई सैन्य गतिविधियों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा और महंगाई बढ़ने की आशंका ने बाजार का माहौल और खराब कर दिया। बुधवार, 2 सितंबर को निफ्टी-50 में 0.59 फीसदी की गिरावट रही और यह 23,914 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय इंडेक्स 23,786 तक फिसल गया था। हालांकि, आखिरी घंटों में खरीदारी लौटने से निफ्टी ने निचले स्तर से कुछ नुकसान की भरपाई कर ली।
सेंसेक्स भी 0.62 फीसदी गिरकर 76,469 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह करीब एक महीने के निचले स्तर तक पहुंच गया था। बाजार में बिकवाली का असर केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा। निफ्टी मिडकैप 100 में 0.53 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.37 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
मिडिल ईस्ट की लड़ाई से बढ़ी बाजार की चिंता
बाजार में इस गिरावट की बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास ईरान के ठिकानों पर नए हमले किए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन हमलों को रणनीतिक जलमार्ग में ईरान की ओर से कथित तौर पर बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश और पहले हुए अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हमले के जवाब के तौर पर बताया।
ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं। बुधवार सुबह ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों को निशाना बनाकर हमले किए। इससे पहले एक महीने से ज्यादा समय तक दोनों देशों के बीच सीधी लड़ाई में कुछ राहत थी, लेकिन वीकेंड में अमेरिकी सेना की कार्रवाई के बाद तनाव फिर बढ़ गया। इस पूरे घटनाक्रम ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यह दुनिया के लिए बेहद अहम तेल मार्ग है। बाजार को डर है कि यहां तनाव बढ़ा तो तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
कच्चा तेल महंगा होने से बढ़ी महंगाई की चिंता
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। ब्रेंट क्रूड करीब छह हफ्तों के सबसे ऊंचे स्तर के आसपास कारोबार करता नजर आया। निवेशकों को आशंका है कि संघर्ष लंबा खिंचने पर ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। महंगा कच्चा तेल भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए चिंता का विषय है। तेल की कीमत बढ़ने से महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि बाजार में यह डर भी बढ़ रहा है कि दुनिया के केंद्रीय बैंक महंगाई को काबू में रखने के लिए ब्याज दरों में नरमी की राह पर आसानी से आगे नहीं बढ़ पाएंगे।
तेल की बढ़ती कीमतों का असर वैश्विक बॉन्ड बाजार पर भी पड़ा है। बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। बाजार में अब इस बात को लेकर दांव बढ़ रहे हैं कि महंगाई को रोकने के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व समेत दूसरे केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा रख सकते हैं या जरूरत पड़ने पर सख्त रुख अपना सकते हैं।
24,000 के नीचे निफ्टी, आगे और गिरावट का खतरा
एलकेपी सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे के मुताबिक, निफ्टी का तेजी वाले चैनल से नीचे निकलना बाजार में लगातार बिकवाली का संकेत है। दिन के दौरान निचले स्तर से रिकवरी जरूर हुई, लेकिन इससे बाजार की कमजोर तस्वीर में बड़ा बदलाव नहीं आया। उनका कहना है कि जब तक निफ्टी 24,000 के नीचे बना रहता है, तब तक तेजी पर बिकवाली की रणनीति ज्यादा बेहतर रह सकती है। उनके अनुसार, आने वाले समय में निफ्टी 23,700 से 23,730 के स्तर तक फिसल सकता है।
रिलायंस ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजित मिश्रा ने भी 23,800 के स्तर को महत्वपूर्ण माना है। उनके मुताबिक, बाजार की तेज गिरावट ने निफ्टी को इस शुरुआती लक्ष्य और सपोर्ट के काफी करीब पहुंचा दिया है। अगर 23,800 का स्तर निर्णायक रूप से टूटता है, तो निफ्टी 23,600 की तरफ भी जा सकता है।
वहीं, ऊपर की तरफ 24,000 अब निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस बन सकता है। इसके बाद 24,150 का स्तर अगली बड़ी चुनौती रहेगा। बाजार में मौजूदा उतार-चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए निवेशकों को सावधानी बरतने, छोटी पोजीशन रखने और जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देने की सलाह दी गई है।
बैंक निफ्टी की तस्वीर भी कमजोर
बैंक निफ्टी में भी फिलहाल मजबूती के संकेत नहीं दिख रहे हैं। एलकेपी सिक्योरिटीज के टेक्निकल एनालिस्ट वत्सल भुव ने बताया कि इंडेक्स का छोटा कैंडल बनाना बाजार में असमंजस की स्थिति दिखाता है। तकनीकी आधार पर बैंक निफ्टी अभी अपने अहम 20-DMA और 200-DMA से नीचे कारोबार कर रहा है। इसके अलावा RSI में भी कमजोर संकेत मिले हैं और यह 50 के स्तर से नीचे बना हुआ है। इससे इंडेक्स में कमजोरी का संकेत मिलता है। बैंक निफ्टी के लिए 57,000 का स्तर तत्काल सपोर्ट माना जा रहा है। वहीं, 57,600 के आसपास रेजिस्टेंस है। इसके ऊपर 58,000 का स्तर अहम रहेगा।
फिलहाल बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमत और मिडिल ईस्ट में तनाव की स्थिति पर निर्भर करेगी। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जल्दबाजी के बजाय सावधानी से कदम उठाना ज्यादा जरूरी है।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)

