‘मैं पोप लियो से माफी नहीं मांगूंगा’, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने किया इनकार, अपनाया सख्त रुख

‘मैं पोप लियो से माफी नहीं मांगूंगा’, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने किया इनकार, अपनाया सख्त रुख

US Vatican Relations: अमेरिकी राजनीति और वेटिकन के रिश्तों में तनाव अब खुलकर सामने आ गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ तौर पर कहा है कि वे नए पोप पोप लियो XIV से माफी नहीं मांगेंगे। यह विवाद तब बढ़ा जब पोप ने अमेरिकी नीतियों और ईरान मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन की आलोचना की।

ट्रंप का सख्त रुख

व्हाइट हाउस में मीडिया से बात करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘मैं पोप लियो से माफी नहीं मांगूंगा। वे कई मुद्दों पर कमजोर हैं। ट्रंप ने पोप के विचारों को गलत बताते हुए कहा कि उनकी नीतियां सही हैं और समय के साथ इसके नतीजे भी सही साबित होंगे। उन्होंने खासतौर पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अपनी सख्त नीति का बचाव किया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्रंप का हमला

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर भी पोप पर निशाना साधते हुए लिखा पोप लियो अपराध के मुद्दे पर कमजोर हैं, वे विदेश नीति को नहीं समझते, उन्हें एक महान पोप बनने पर ध्यान देना चाहिए, राजनेता नहीं। इतना ही नहीं, ट्रंप ने दावा किया कि अगर वे राष्ट्रपति नहीं बने होते, तो पोप फ्रांसिस के निधन के बाद पोप लियो XIV की नियुक्ति ही नहीं होती।

पोप लियो XIV का जवाब

विवाद के बीच पोप लियो XIV ने शांत और संतुलित प्रतिक्रिया दी। अल्जीरिया दौरे के दौरान उन्होंने कहा मैं कोई राजनेता नहीं हूं और मेरा डोनाल्ड ट्रंप से बहस करने का इरादा नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका संदेश राजनीति नहीं, बल्कि शांति और आस्था पर आधारित है।

शांति और संवाद पर पोप का जोर

पोप ने वैश्विक स्तर पर शांति की अपील करते हुए कहा हमें हमेशा शांति की तलाश करनी चाहिए, मैं ट्रंप प्रशासन से नहीं डरता। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि धर्म का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए नहीं होना चाहिए। अपनी 10 दिवसीय उत्तर अफ्रीका यात्रा के दौरान उन्होंने अंतरधार्मिक संवाद और भाईचारे को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

बढ़ता कूटनीतिक तनाव

यह विवाद अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अमेरिका और वेटिकन के बीच बढ़ते कूटनीतिक तनाव का संकेत बन चुका है। एक ओर ट्रंप का आक्रामक और राष्ट्रवादी रुख है, तो दूसरी ओर पोप का शांति और वैश्विक सहयोग का संदेश। इसी टकराव ने इस मुद्दे को और अधिक गंभीर बना दिया है।

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