वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार ने इन बकायों में से 28.05 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। अब 2026-27 के बजट में लगभग 50 करोड़ रुपये और आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा, कोर्ट-कचहरी और आर्बिट्रेशन प्रक्रियाओं पर अब तक 13 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च हो चुकी है और अभी भी 29 मुकदमे अलग-अलग अदालतों में चल रहे हैं।
Commonwealth Games 2030: भारत एक बार फिर कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी के लिए तैयार हो रहा है। 2030 में गुजरात के अहमदाबाद शहर में आयोजित होने वाले इस मेगा इवेंट की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। शूटिंग, रेसलिंग, बैडमिंटन और आर्चरी जैसे खेलों में, जिनमें भारत हमेशा से मजबूत रहा है, अच्छे प्रदर्शन और मेडल की उम्मीदें एक बार फिर जगी हैं। हालांकि, 16 साल पुराने दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स (2010) के बकाए और कानूनी उलझनों का बोझ अभी भी केंद्र सरकार के सिर पर लटका हुआ है।
वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार ने इन बकायों में से 28.05 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। अब 2026-27 के बजट में लगभग 50 करोड़ रुपये और आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा, कोर्ट-कचहरी और आर्बिट्रेशन प्रक्रियाओं पर अब तक 13 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च हो चुकी है और अभी भी 29 मुकदमे अलग-अलग अदालतों में चल रहे हैं।
चार साल बाद यानी 2030 में अहमदाबाद 70 से अधिक देशों के एथलीटों और अधिकारियों का स्वागत करने वाला है। यह कॉमनवेल्थ गेम्स की 100वीं वर्षगांठ भी होगी। कुछ दिन पहले कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन के अध्यक्ष डोनाल्ड रुकरे और चीफ एक्जीक्यूटिव केटी सैडलियर की टीम ने अहमदाबाद, गांधीनगर, वडोदरा और एकता नगर के प्रस्तावित वेन्यूज का दौरा किया। उन्होंने प्लानिंग के स्तर और वेन्यूज की गुणवत्ता की खुलकर तारीफ की है।
लेकिन 2010 के दिल्ली गेम्स से जुड़े घोटाले, वित्तीय अनियमितताएं और कानूनी विवाद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी और सरकारी दस्तावेजों से यह बात स्पष्ट रूप से सामने आती है।
युवा मामलों और खेल मंत्रालय ने आरटीआई के जवाब में बताया कि वर्ष 2025-26 में एमटीएनएल को 28.05 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। बाकी बकाया की सटीक राशि अभी नहीं बताई जा सकती, क्योंकि कई मामले अदालत में लंबित हैं। मंत्रालय ने साफ कहा है कि “सब-ज्यूडिस मामलों के फैसले आने के बाद ही शेष राशि का निर्धारण किया जा सकेगा।”
22 अप्रैल 2026 तक कुल 29 मामले विभिन्न अदालतों में चल रहे हैं, जिनमें 24 ठेकेदार, व्यक्ति और अधिकारी पक्षकार हैं। इन सभी मामलों में केंद्र सरकार भी एक पक्ष है। विवादित राशि कितनी है, इस पर मंत्रालय ने कहा कि अदालती प्रक्रिया चल रही होने के कारण इसकी गणना अभी संभव नहीं है।
इन मुकदमों में सबसे बड़े नामों में स्विट्जरलैंड की कंपनी Nussli शामिल है, जिसे गेम्स ओवरले का 128 करोड़ रुपये का ठेका मिला था। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (ECIL) को 346 करोड़ रुपये का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था। 2010 के बाद से केवल वकीलों पर 6.37 करोड़ रुपये और आर्बिट्रेटर्स-ट्रिब्यूनल पर 6.63 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। यानी कानूनी लड़ाई पर अब तक 13 करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय हो चुकी है।
कैग की रिपोर्ट के अनुसार, 2010 के गेम्स का अनुमानित खर्च शुरू में मात्र 297 करोड़ रुपये था, जो बाद में बढ़कर 18,532 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। असली बोझ तो तब पता चलेगा, जब सारे मुकदमे निपट जाएंगे। गौरतलब है कि 2010 के गेम्स के पूर्व अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी पर लगे गंभीर आरोपों से उन्हें अप्रैल 2025 में क्लीन चिट मिल गई थी। मनी लॉन्ड्रिंग समेत कई मामलों को बंद कर दिया गया। 2011 में गिरफ्तारी के बाद लगभग 10 महीने जेल में रहने के बावजूद सीबीआई और ईडी आरोप साबित नहीं कर पाई। कलमाड़ी की इस साल जनवरी में निधन हो गया।
2010 के दिल्ली गेम्स में भ्रष्टाचार, खराब नियोजन और अधूरी सुविधाओं के कारण भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि काफी धूमिल हुई थी। उसके बाद देश ने फॉर्मूला 1, अंडर-17 फुटबॉल विश्व कप, क्रिकेट विश्व कप और हॉकी विश्व कप जैसी बड़ी घटनाओं को सफलतापूर्वक आयोजित किया, लेकिन 2010 का वो पुराना दाग अभी पूरी तरह नहीं मिटा है।
अब भारत की नजर 2036 ओलंपिक की मेजबानी पर है। ऐसे में 2030 का अहमदाबाद कॉमनवेल्थ गेम्स देश की साख दोबारा स्थापित करने का एक बड़ा अवसर माना जा रहा है। इस आयोजन का अनुमानित ऑपरेशनल खर्च 3000 से 5000 करोड़ रुपये के बीच है। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट, होटल और खेल सुविधाओं को विश्व स्तर का बनाने के लिए ‘अमदावाद 2030’ नाम से एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट भी चल रहा है।
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