“मेरी बेटी करीब 5 फीट लंबी थी। जिस जगह उसका शव मिला, वहां पानी घुटनों तक भी नहीं था। ऐसे में कोई चाहकर भी वहां डूब नहीं सकता। फिर पुलिस कैसे कह रही है कि मेरी बेटी की मौत डूबने से हुई? यह बात मेरी समझ से परे है। मेरी बेटी के साथ क्या हुआ, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। मुझे सिर्फ इंसाफ चाहिए।” किशनगंज के मेनका हत्याकांड में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद मृतका मेनका उर्फ मेघा की मां पिंकी देवी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में यह सवाल उठाया है। दूसरी ओर पुलिस का दावा है कि मेनका की मौत डूबने से हुई। पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम में उसके फेफड़ों और शरीर में पानी व मिट्टी के अंश मिले हैं। मां के इन गंभीर आरोपों और पुलिस के दावे के बीच सच्चाई क्या है? इसे समझने के लिए दैनिक भास्कर की टीम एक बार फिर घटनास्थल पर पहुंची। साथ ही डॉक्टरों और कानूनी विशेषज्ञों से बातचीत कर पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और पूरे मामले का विश्लेषण किया। पढ़िए रिपोर्ट… पहले घटना से जुड़ी 2 तस्वीरें… पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में क्या निकला
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मेनका की मौत का कारण डूबने से दम घुटना (Asphyxia) और शॉक बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों को उसकी श्वासनली (ट्रेकिया) में मिट्टी और रेत के कण मिले हैं। दोनों फेफड़ों में भी मिट्टी और रेत के कण पाए गए हैं। इसके अलावा पेट में करीब 300 एमएल कीचड़ मिला पानी मौजूद होने का जिक्र किया गया है। वहीं, रिपोर्ट में सिर, खोपड़ी, मस्तिष्क और छाती पर किसी गंभीर चोट का उल्लेख नहीं किया गया है। परिजनों के सवालों के बीच घटनास्थल पर पहुंची भास्कर टीम
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद परिजनों ने मौत के कारण पर कई सवाल उठाए हैं। मेनका की मां पिंकी देवी का कहना है कि जिस जगह उनकी बेटी का शव मिला, वहां पानी बहुत कम था। वहीं, शव मिलने के अगले दिन उसी इलाके से बाल भी बरामद हुए। ऐसे में परिवार को सिर्फ डूबने से मौत की बात समझ नहीं आ रही है। इसी बीच बुधवार को बाल मिलने की सूचना पर पुलिस और FSL की टीम दोबारा घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने बालों के नमूने जुटाए हैं और अब उनकी डीएनए जांच कराई जा रही है। जांच से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि मिले बाल मेघा के हैं या किसी और के। वहीं, परिवार के दावों और घटनास्थल की स्थिति को समझने के लिए दैनिक भास्कर की टीम गुरुवार को मौके पर पहुंची। रिपोर्टर ने नदी में उतरकर उस जगह की पड़ताल की, जहां से मेनका का शव बरामद हुआ था। जांच के दौरान पाया गया कि शव मिलने वाली जगह के आसपास करीब ढाई किलोमीटर तक नदी में पानी की गहराई लगभग 4 फीट या उससे कम थी। इसके अलावा नदी में बहाव भी बेहद कम था। जिससे शव के बहने की आशंका भी नहीं लग रही है। पुलिस की कार्रवाई और चूक क्या है?
किशनगंज के सीनियर वकील समीर दुबे ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा, “मेरे अनुसार पुलिस इस मामले में पहले दिन से ही चूक करती रही है। जिस समय परिवार गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचा था, उसी समय जांच शुरू कर दी जाती और बच्ची के मूवमेंट व बैकग्राउंड की पड़ताल की जाती, तो शायद उसे बचाया जा सकता था। पहला आवेदन लिखावट में गलती बताकर लौटा दिया गया। इसके बाद जब परिवार दूसरा आवेदन लेकर पहुंचा, तब भी कुछ बिंदु जोड़कर दोबारा आवेदन देने को कहा गया। इस पूरी प्रक्रिया में दो दिन बीत गए, लेकिन शिकायत दर्ज नहीं की गई।” उन्होंने कहा, “दूसरी बड़ी चूक यह रही कि बच्ची के बैकग्राउंड और उसकी गतिविधियों की गंभीरता से जांच नहीं की गई। अगर बच्ची शाम 4 बजे लापता हुई थी, तो पुलिस को यह पता लगाना चाहिए था कि वह उससे पहले कहां थी, किन लोगों के संपर्क में थी और उसकी मानसिक स्थिति कैसी थी। किसी भी अपराध से पहले कुछ न कुछ संकेत होते हैं। जांच का हिस्सा यह भी होना चाहिए था कि घटना से एक-दो दिन पहले उसकी दिनचर्या और व्यवहार कैसा था। लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।” समीर दुबे ने आगे कहा, “तीसरी बड़ी कमी यह है कि अब तक किसी संदिग्ध की पहचान या गिरफ्तारी नहीं हुई है। बच्ची का फ्रेंड सर्किल क्या था, वह कहां जाने के लिए निकली थी और नदी तक कैसे पहुंची, जैसे कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। अभी तक जांच में कोई बड़ा खुलासा या ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। ऐसा लगता है कि पुलिस गुमशुदगी, शव बरामदगी और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तक ही सीमित रही है, जबकि मामले के अन्य पहलुओं की गहन जांच अभी भी जरूरी है।” पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर डॉक्टर ने क्या बताया
डॉ. आमिर मिनाज ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा, डूबने के मामलों में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य मानी जाती है। जब कोई व्यक्ति पानी में डूबता है, तो सांस लेने के दौरान पानी और उसमें मौजूद मिट्टी या अन्य कण शरीर के अंदर पहुंच सकते हैं। इससे फेफड़ों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित हो जाती है और शरीर के अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। ऐसी स्थिति में दम घुटने से मौत हो सकती है।” उन्होंने कहा, “किसी व्यक्ति की मौत वास्तव में डूबने से हुई है या नहीं, इसका निष्कर्ष केवल घटनास्थल देखकर नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए पोस्टमॉर्टम और अन्य फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट को देखना जरूरी होता है।” डॉ. मिनाज ने बताया, “चार या साढ़े चार फीट पानी में भी किसी व्यक्ति के डूबने की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि घटना के समय व्यक्ति की शारीरिक स्थिति क्या थी, पानी की स्थिति कैसी थी और किन परिस्थितियों में वह पानी में गया।” बाल मिलने के सवाल पर उन्होंने कहा, “पानी में कई दिनों तक रहने के बाद शव में कई तरह के बदलाव आ सकते हैं। बालों का झड़ना भी कई कारणों से हो सकता है। हालांकि, किसी विशेष मामले में इसकी वजह क्या है, यह केवल फॉरेंसिक जांच और वैज्ञानिक परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकता है।” इनफोग्राफिक्स के जरिए पढ़िए, अब तक का घटनाक्रम.. शव मिलने के बाद लोगों का प्रदर्शन, कैंडल मार्च निकाला
मेनका कुमारी का शव मिलने के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। 1 जून की रात सदर अस्पताल परिसर और आसपास के इलाके में घंटों हंगामा हुआ। आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर दी और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। स्थिति को देखते हुए एसपी अनिकेत कुमार, एसडीएम और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। कई घंटों की बातचीत के बाद देर रात प्रदर्शन समाप्त हुआ। प्रदर्शन के दौरान परिजनों ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर उपलब्ध कराने, मामले की निष्पक्ष जांच करने और कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठाई। परिजन सीबीआई जांच की मांग कर रहे
बाद में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद शहर में कैंडल मार्च भी निकाला गया। इस दौरान लोगों ने मेनका को न्याय दिलाने की मांग की और मामले की सीबीआई जांच की मांग दोहराई। फिलहाल परिजन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए मामले की आगे जांच की मांग कर रहे हैं। “मेरी बेटी करीब 5 फीट लंबी थी। जिस जगह उसका शव मिला, वहां पानी घुटनों तक भी नहीं था। ऐसे में कोई चाहकर भी वहां डूब नहीं सकता। फिर पुलिस कैसे कह रही है कि मेरी बेटी की मौत डूबने से हुई? यह बात मेरी समझ से परे है। मेरी बेटी के साथ क्या हुआ, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। मुझे सिर्फ इंसाफ चाहिए।” किशनगंज के मेनका हत्याकांड में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद मृतका मेनका उर्फ मेघा की मां पिंकी देवी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में यह सवाल उठाया है। दूसरी ओर पुलिस का दावा है कि मेनका की मौत डूबने से हुई। पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम में उसके फेफड़ों और शरीर में पानी व मिट्टी के अंश मिले हैं। मां के इन गंभीर आरोपों और पुलिस के दावे के बीच सच्चाई क्या है? इसे समझने के लिए दैनिक भास्कर की टीम एक बार फिर घटनास्थल पर पहुंची। साथ ही डॉक्टरों और कानूनी विशेषज्ञों से बातचीत कर पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और पूरे मामले का विश्लेषण किया। पढ़िए रिपोर्ट… पहले घटना से जुड़ी 2 तस्वीरें… पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में क्या निकला
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मेनका की मौत का कारण डूबने से दम घुटना (Asphyxia) और शॉक बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों को उसकी श्वासनली (ट्रेकिया) में मिट्टी और रेत के कण मिले हैं। दोनों फेफड़ों में भी मिट्टी और रेत के कण पाए गए हैं। इसके अलावा पेट में करीब 300 एमएल कीचड़ मिला पानी मौजूद होने का जिक्र किया गया है। वहीं, रिपोर्ट में सिर, खोपड़ी, मस्तिष्क और छाती पर किसी गंभीर चोट का उल्लेख नहीं किया गया है। परिजनों के सवालों के बीच घटनास्थल पर पहुंची भास्कर टीम
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद परिजनों ने मौत के कारण पर कई सवाल उठाए हैं। मेनका की मां पिंकी देवी का कहना है कि जिस जगह उनकी बेटी का शव मिला, वहां पानी बहुत कम था। वहीं, शव मिलने के अगले दिन उसी इलाके से बाल भी बरामद हुए। ऐसे में परिवार को सिर्फ डूबने से मौत की बात समझ नहीं आ रही है। इसी बीच बुधवार को बाल मिलने की सूचना पर पुलिस और FSL की टीम दोबारा घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने बालों के नमूने जुटाए हैं और अब उनकी डीएनए जांच कराई जा रही है। जांच से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि मिले बाल मेघा के हैं या किसी और के। वहीं, परिवार के दावों और घटनास्थल की स्थिति को समझने के लिए दैनिक भास्कर की टीम गुरुवार को मौके पर पहुंची। रिपोर्टर ने नदी में उतरकर उस जगह की पड़ताल की, जहां से मेनका का शव बरामद हुआ था। जांच के दौरान पाया गया कि शव मिलने वाली जगह के आसपास करीब ढाई किलोमीटर तक नदी में पानी की गहराई लगभग 4 फीट या उससे कम थी। इसके अलावा नदी में बहाव भी बेहद कम था। जिससे शव के बहने की आशंका भी नहीं लग रही है। पुलिस की कार्रवाई और चूक क्या है?
किशनगंज के सीनियर वकील समीर दुबे ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा, “मेरे अनुसार पुलिस इस मामले में पहले दिन से ही चूक करती रही है। जिस समय परिवार गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचा था, उसी समय जांच शुरू कर दी जाती और बच्ची के मूवमेंट व बैकग्राउंड की पड़ताल की जाती, तो शायद उसे बचाया जा सकता था। पहला आवेदन लिखावट में गलती बताकर लौटा दिया गया। इसके बाद जब परिवार दूसरा आवेदन लेकर पहुंचा, तब भी कुछ बिंदु जोड़कर दोबारा आवेदन देने को कहा गया। इस पूरी प्रक्रिया में दो दिन बीत गए, लेकिन शिकायत दर्ज नहीं की गई।” उन्होंने कहा, “दूसरी बड़ी चूक यह रही कि बच्ची के बैकग्राउंड और उसकी गतिविधियों की गंभीरता से जांच नहीं की गई। अगर बच्ची शाम 4 बजे लापता हुई थी, तो पुलिस को यह पता लगाना चाहिए था कि वह उससे पहले कहां थी, किन लोगों के संपर्क में थी और उसकी मानसिक स्थिति कैसी थी। किसी भी अपराध से पहले कुछ न कुछ संकेत होते हैं। जांच का हिस्सा यह भी होना चाहिए था कि घटना से एक-दो दिन पहले उसकी दिनचर्या और व्यवहार कैसा था। लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।” समीर दुबे ने आगे कहा, “तीसरी बड़ी कमी यह है कि अब तक किसी संदिग्ध की पहचान या गिरफ्तारी नहीं हुई है। बच्ची का फ्रेंड सर्किल क्या था, वह कहां जाने के लिए निकली थी और नदी तक कैसे पहुंची, जैसे कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। अभी तक जांच में कोई बड़ा खुलासा या ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। ऐसा लगता है कि पुलिस गुमशुदगी, शव बरामदगी और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तक ही सीमित रही है, जबकि मामले के अन्य पहलुओं की गहन जांच अभी भी जरूरी है।” पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर डॉक्टर ने क्या बताया
डॉ. आमिर मिनाज ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा, डूबने के मामलों में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य मानी जाती है। जब कोई व्यक्ति पानी में डूबता है, तो सांस लेने के दौरान पानी और उसमें मौजूद मिट्टी या अन्य कण शरीर के अंदर पहुंच सकते हैं। इससे फेफड़ों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित हो जाती है और शरीर के अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। ऐसी स्थिति में दम घुटने से मौत हो सकती है।” उन्होंने कहा, “किसी व्यक्ति की मौत वास्तव में डूबने से हुई है या नहीं, इसका निष्कर्ष केवल घटनास्थल देखकर नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए पोस्टमॉर्टम और अन्य फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट को देखना जरूरी होता है।” डॉ. मिनाज ने बताया, “चार या साढ़े चार फीट पानी में भी किसी व्यक्ति के डूबने की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि घटना के समय व्यक्ति की शारीरिक स्थिति क्या थी, पानी की स्थिति कैसी थी और किन परिस्थितियों में वह पानी में गया।” बाल मिलने के सवाल पर उन्होंने कहा, “पानी में कई दिनों तक रहने के बाद शव में कई तरह के बदलाव आ सकते हैं। बालों का झड़ना भी कई कारणों से हो सकता है। हालांकि, किसी विशेष मामले में इसकी वजह क्या है, यह केवल फॉरेंसिक जांच और वैज्ञानिक परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकता है।” इनफोग्राफिक्स के जरिए पढ़िए, अब तक का घटनाक्रम.. शव मिलने के बाद लोगों का प्रदर्शन, कैंडल मार्च निकाला
मेनका कुमारी का शव मिलने के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। 1 जून की रात सदर अस्पताल परिसर और आसपास के इलाके में घंटों हंगामा हुआ। आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर दी और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। स्थिति को देखते हुए एसपी अनिकेत कुमार, एसडीएम और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। कई घंटों की बातचीत के बाद देर रात प्रदर्शन समाप्त हुआ। प्रदर्शन के दौरान परिजनों ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर उपलब्ध कराने, मामले की निष्पक्ष जांच करने और कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठाई। परिजन सीबीआई जांच की मांग कर रहे
बाद में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद शहर में कैंडल मार्च भी निकाला गया। इस दौरान लोगों ने मेनका को न्याय दिलाने की मांग की और मामले की सीबीआई जांच की मांग दोहराई। फिलहाल परिजन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए मामले की आगे जांच की मांग कर रहे हैं।


