बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश), दो नवंबर हिमाचल प्रदेश के मत्स्य विभाग ने राज्य में मछली संपदा को बढ़ावा देने, उसका संरक्षण करने और संवर्धन के उद्देश्य से गोबिंद सागर जलाशय में विभिन्न प्रजातियों के 14.79 लाख से अधिक उच्च गुणवत्ता वाले मछली बीज छोड़े हैं। ये बीज पश्चिम बंगाल और विभागीय मत्स्य फार्म से प्राप्त किए गए हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
बिलासपुर के मत्स्य विभाग के सहायक निदेशक पंकज ठाकुर ने सोमवार को बताया कि इस अभियान के तहत दो लाख 5,866 कतला और सिल्वर कार्प के मछली बीज 17 अक्टूबर को बिलासपुर जिले के लुहणू में छोड़े गए। इसके बाद 23 अक्टूबर को ऊना जिले के रायपुर मैदान में तीन लाख 38,505 सिल्वर कार्प के बीज जलाशय में डाले गए। उन्होंने बताया कि 27 अक्टूबर को भाखड़ा में तीन लाख 83,472 कतला और 28 अक्टूबर को जकातखाना में दो लाख 66 हजार रोहू और मृगल के बीज छोड़े गए।
इसके अतिरिक्त, पश्चिम बंगाल से विभाग द्वारा निर्धारित दरों पर खरीदे गए दो लाख 85,298 सिल्वर कार्प के बीज 30 अक्टूबर को लुहणू में जलाशय में डाले गए। मछली बीज डालने का पूरा अभियान मत्स्य विभाग के संयुक्त निदेशक पवन कुमार की अध्यक्षता वाली विभागीय समिति की निगरानी में चलाया गया। ठाकुर ने बताया कि गोबिंद सागर जलाशय में 46 मत्स्य सहकारी समितियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं।
इनके माध्यम से 2,561 मछुआरे अपनी आजीविका के लिए मछली पकड़ने के काम पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इस वर्ष मछली पकड़ने पर प्रतिबंध की अवधि के दौरान प्रत्येक मछुआरा परिवार को 3,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी है, जबकि केंद्र सरकार प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत प्रत्येक पात्र मछुआरा परिवार को अतिरिक्त 3,000 रुपये देने का प्रस्ताव कर रही है। उन्होंने कहा कि विभाग मछली उत्पादन बढ़ाने, स्थानीय मछुआरा समुदाय की आय में वृद्धि करने और मत्स्य संसाधनों का सतत प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक तरीकों से नियमित रूप से मछली बीज खरीदकर जलाशय में डालता है।
उन्होंने बताया कि निर्धारित लक्ष्य पूरा होने तक यह प्रक्रिया जारी रहेगी।

