High Court Strict: विकासनगर अग्निकांड पर हाईकोर्ट सख्त, डीएम-सीएमओ से मांगा जवाब

High Court Strict: विकासनगर अग्निकांड पर हाईकोर्ट सख्त, डीएम-सीएमओ से मांगा जवाब

Allahabad High Court Strict: लखनऊ के विकासनगर क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अपनाया है और संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।



 हाईकोर्ट सख्त, प्रशासन से जवाब तलब, पीड़ितों के पुनर्वास पर जोर    (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

हाईकोर्ट ने इस दर्दनाक घटना को गंभीरता से लेते हुए पीड़ितों की तत्काल सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने जिला प्रशासन को आदेश दिया है कि प्रभावित लोगों को भोजन, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाएं तुरंत उपलब्ध कराई जाए, ताकि उन्हें किसी प्रकार की अतिरिक्त परेशानी का सामना न करना पड़े।

प्रशासन से मांगा जवाब

हाईकोर्ट ने इस मामले में जिला अधिकारी (डीएम), मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) और नगर निगम से विस्तृत जवाब मांगा है। कोर्ट ने यह जानना चाहा है कि आखिर किन परिस्थितियों में इतनी बड़ी आबादी अवैध रूप से बस गई और प्रशासन को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। विशेष रूप से कोर्ट ने यह सवाल उठाया कि लोक निर्माण विभाग (PWD) की जमीन पर बस्ती कैसे बस गई। कोर्ट ने यह भी पूछा कि जब जमीन सरकारी थी, तो वहां निर्माण और बसावट को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए।



 हाईकोर्ट सख्त, प्रशासन से जवाब तलब, पीड़ितों के पुनर्वास पर जोर    (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

चौंकाने वाले आंकड़े

मामले में सामने आए आंकड़ों ने भी अदालत को हैरान कर दिया है। लगभग 4 बीघा जमीन पर करीब 1455 लोगों के रहने की बात सामने आई है। इतने सीमित क्षेत्र में इतनी बड़ी आबादी का रहना अपने आप में कई प्रशासनिक चूक की ओर इशारा करता है। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों को बिजली और गैस कनेक्शन कैसे प्रदान किए गए। क्या संबंधित विभागों ने बिना जांच के कनेक्शन जारी कर दिए, या फिर इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बरती गई।

30 मई तक हलफनामा दाखिल करने का आदेश

हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे 30 मई तक इस पूरे मामले पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करें। इसमें उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि बस्ती के बसने से लेकर अग्निकांड तक किन-किन स्तरों पर चूक हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

पीड़ितों के पुनर्वास पर जोर

कोर्ट ने केवल जवाब तलब करने तक ही अपने निर्देश सीमित नहीं रखे, बल्कि पीड़ितों के पुनर्वास पर भी विशेष जोर दिया है। अदालत ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी आवास की व्यवस्था की जाए और उन्हें जल्द से जल्द स्थायी पुनर्वास उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही, पीड़ितों के लिए स्वच्छ पानी, भोजन, चिकित्सा और बच्चों के लिए आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

मृत बच्चों के परिवारों को मुआवजा

इस अग्निकांड में दो मासूम बच्चों की मौत हो गई थी, जिस पर कोर्ट ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। अदालत को जानकारी दी गई कि मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है। कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि मुआवजा राशि समय पर और पारदर्शी तरीके से पीड़ित परिवारों तक पहुंचे।



 हाईकोर्ट सख्त, प्रशासन से जवाब तलब, पीड़ितों के पुनर्वास पर जोर    (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

प्रशासन की भूमिका पर सवाल

इस पूरे मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस तरह से सरकारी जमीन पर बस्ती बस गई और वर्षों तक वहां लोग रहते रहे, वह निगरानी तंत्र की कमजोरी को उजागर करता है। सूत्रों  का मानना है कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई की जाती, तो इस तरह की दुखद घटना को रोका जा सकता था।

हाईकोर्ट की चेतावनी

हाईकोर्ट की सख्ती को एक चेतावनी के रूप में भी देखा जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सार्वजनिक सुरक्षा और प्रशासनिक जिम्मेदारी में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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