छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत गरीब बच्चों के एडमिशन में हो रही देरी को लेकर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने कहा कि जुलाई-अगस्त तक एडमिशन की प्रक्रिया चलेगी, तो बच्चे पढ़ाई कब करेंगे। कोर्ट ने राज्य शासन को सात मई से पहले प्रवेश पूरी करने के साथ ही कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, प्रदेश में नया शिक्षा सत्र एक अप्रैल से शुरू हो गया है। लेकिन, आरटीई के तहत गरीब बच्चों के प्रवेश की प्रक्रिया लचर और धीमी चल रही है। बता दें कि प्रदेश भर के स्कूलों में आरटीई के तहत 38 हजार 438 आवेदन मिले हैं, जिसमें से 23 हजार 766 यानी 62% की ही जांच पूरी हुई है। वहीं, 14 हजार से अधिक आवेदन लंबित हैं। कई जिलों में 10% से भी कम जांच हो पाई है। डीपीआई ने पंजीयन और नोडल वेरीफिकेशन के लिए 16 फरवरी से 31 मार्च तक समय तय किया था, लेकिन डेडलाइन के बाद भी प्रक्रिया अधूरी है। अगस्त तक चलेगी एडमिशन की प्रक्रिया
एडमिशन की प्रक्रिया के अनुसार आरटीई के तहत छात्र पंजीयन की अंतिम तिथि 31 मार्च रखी गई थी। काउसलिंग प्रक्रिया में 13 से 17 अप्रैल तक लाटरी एवं सीट आवंटन किया गया। इसके बाद छात्रों को एक से 30 मई तक प्रवेश लेना होगा। द्वितीय चरण की प्रक्रिया आठ जून से शुरू हो जाएगी। इसमें नए स्कूलों का रजिस्ट्रेशन होगा। उसके बाद एक से 11 जुलाई तक छात्र पंजीयन होंगे। फिर 27 से 31 जुलाई तक लाटरी एवं आवंटन होगा। इसके बाद छात्रों को स्कूल में दाखिला तीन से 17 अगस्त तक लेना होगा। शिक्षा विभाग की व्यवस्था पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
इस मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि पहले चरण की लाटरी निकाल ली गई है। इसमें 15 हजार छात्रों को सीटें आवंटित हुई हैं। इन्हें एक से 30 मई तक एडमिशन लेना होगा। इसके बाद दूसरे चरण की प्रक्रिया पूरी होगी। हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग की इस प्रक्रिया और धीमी गति पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि अगस्त तक सिर्फ एडमिशन होगा तो बच्चे पढ़ाई कब करेंगे। कोर्ट ने शिक्षा विभाग से सात मई से पहले पूरी प्रक्रिया और एडमिशन जल्द हो इसकी कार्ययोजना प्रस्तुत करने कहा है।


