देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक एचडीएफसी बैंक के शेयरों में बुधवार को गिरावट देखने को मिली हैं। कारोबार के दौरान बैंक का शेयर करीब 2 प्रतिशत तक टूट गया, जिसके बाद निवेशकों के बीच बैंक की आंतरिक व्यवस्था और प्रबंधन को लेकर चर्चा तेज हो गई हैं।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर दोपहर करीब 1 बजकर 38 मिनट पर एचडीएफसी बैंक का शेयर 760.70 रुपये पर कारोबार करता दिखाई दिया, जो लगभग 2.34 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता हैं। बाजार में यह दबाव उस रिपोर्ट के बाद बढ़ा, जिसमें महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम को कथित भुगतान का दावा किया गया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार एक समाचार रिपोर्ट में दस्तावेजों और सूत्रों के हवाले से कहा गया कि बैंक ने बड़ी जमा राशि आकर्षित करने के लिए महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम को लगभग 45 करोड़ रुपये का कथित भुगतान किया था। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि इस अतिरिक्त भुगतान को विपणन खर्च के रूप में दिखाया गया था ताकि एजेंसी को बैंक में बड़ी जमा रखने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
गौरतलब है कि बैंकिंग नियमों के तहत बैंकों को जमाकर्ताओं को अलग-अलग ब्याज दरों के जरिए विशेष लाभ देने की अनुमति नहीं होती हैं। ऐसे में इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई।
रिपोर्ट में यह आरोप भी लगाया गया कि बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शशिधर जगदीशन को इन लेनदेन की जानकारी थी। हालांकि एचडीएफसी बैंक ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया।
बैंक के प्रवक्ता ने कहा कि एचडीएफसी बैंक के पास मजबूत आंतरिक निगरानी, लेखा जांच और नियंत्रण प्रणाली मौजूद हैं। बैंक का कहना है कि हर मामले की समीक्षा स्थापित नियमों और प्रक्रियाओं के तहत की जाती हैं। बैंक ने यह भी कहा कि चुनिंदा जानकारियों के आधार पर किसी तरह की गलत गतिविधि का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं हैं।
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले ने बैंक के शेयरों पर पहले से बने दबाव को और बढ़ा दिया हैं। गौरतलब है कि 19 मार्च के बाद से एचडीएफसी बैंक के शेयरों में लगभग 9.5 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी हैं। इसी दौरान बैंक के अंशकालिक अध्यक्ष अतनु चक्रवर्ती ने अचानक इस्तीफा दिया था, जिसके बाद बैंक के संचालन और प्रशासनिक मानकों को लेकर सवाल उठने लगे थे।
हालांकि अतनु चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफे के समय किसी विशेष आरोप का जिक्र नहीं किया था, लेकिन उन्होंने कहा था कि बैंक की कुछ कार्यप्रणालियां उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिक मानकों के अनुरूप नहीं थीं।
बताया जा रहा है कि बैंक द्वारा नियुक्त कानूनी फर्मों ने अब तक जांच में किसी बड़े प्रक्रियागत उल्लंघन की पुष्टि नहीं की हैं। हालांकि अंतिम रिपोर्ट का इंतजार अभी भी किया जा रहा हैं।
इस बीच बैंक ने भारतीय रिजर्व बैंक के पास अभी तक शशिधर जगदीशन की दोबारा नियुक्ति के लिए आवेदन भी दाखिल नहीं किया हैं। उनका मौजूदा कार्यकाल अक्टूबर में समाप्त होने जा रहा हैं। ऐसे में आने वाले समय में बैंक के नेतृत्व और प्रबंधन को लेकर बाजार की नजर बनी रहने की संभावना हैं।


