गयाजी के अल्पसंख्यक कॉलेज की नई बिल्डिंग की बुनियाद रखी:हेड मास्टर ने किया शिलान्यास, कहा- ये बिहार का इकलौता माइनॉरिटी कॉलेज

गयाजी के अल्पसंख्यक कॉलेज की नई बिल्डिंग की बुनियाद रखी:हेड मास्टर ने किया शिलान्यास, कहा- ये बिहार का इकलौता माइनॉरिटी कॉलेज

गयाजी के अल्पसंख्यक तालीमी इदारे मिर्जा ग़ालिब कॉलेज में तरक़्क़ी का नया सफर शुरू हो गया है। सालों पुरानी जर्जर इमारत को डिमॉलिश कर दिया गया। उसी जगह शुक्रवार को नई, आलीशान और मॉडर्न बिल्डिंग की बुनियाद रखी गई। इस अहम मौके पर कॉलेज के प्रिंसिपल, शासी निकाय के सदर प्रोफेसर हफ़िजूर रहमान व सचिव शबी आरफीन शमशी ने शिलान्यास किया। कार्यक्रम के बाद पूरे कैंपस में खुशी का माहौल दिखा। कॉलेज इंतेजामिया का कहना है कि यह सिर्फ इमारत नहीं, बल्कि आने वाले कल की मजबूत बुनियाद है। नई बिल्डिंग में तालीम के तमाम आधुनिक साधन मुहैया कराए जाएंगे। स्मार्ट क्लास, बेहतर क्लासरूम और टेक्निकल सुविधाएं छात्रों को मिलेंगी। इससे पढ़ाई का माहौल और बेहतर होगा। प्रबंधन ने बताया कि मिर्जा ग़ालिब कॉलेज की बुनियाद 1969 में रखी गई थी। शहर के मशहूर शिक्षाविदों और समाज के जिम्मेदार लोगों की कोशिशों से यह इदारा खड़ा हुआ। शुरुआती दौर में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन कॉलेज ने हर मुश्किल को पार करते हुए अपनी एक अलग पहचान बनाई। आज यह मगध विश्वविद्यालय के बेहतरीन कॉलेजों में शुमार है। बिहार का इकलौता माइनॉरिटी कॉलेज कॉलेज में 18 स्नातक और 18 स्नातकोत्तर कोर्स चल रहे हैं। खास बात यह है कि यह बिहार का इकलौता माइनॉरिटी कॉलेज है, जहां तमाम विषयों में पीजी की पढ़ाई होती है। करीब 10 हजार छात्र-छात्राएं यहां तालीम हासिल कर रहे हैं। कॉलेज के स्टूडेंट्स लगातार यूनिवर्सिटी में टॉपर बनते रहे हैं। पिछले कुछ सालों में कॉलेज ने तेज़ी से तरक़्क़ी की है। 2018 में मगध विश्वविद्यालय के करीब 2.87 एकड़ जमीन खरीदी गई। NAAC से ग्रेड-B की मान्यता मिली। 2022 में नया वोकेशनल भवन तैयार हुआ। पूरा सिस्टम कैशलेस किया गया। डिजिटल लाइब्रेरी और मॉडर्न लैब भी स्थापित की गई। कॉलेज में 60 क्लासरूम और 7 स्मार्ट क्लास मौजूद हैं। 25 हजार से ज्यादा किताबों से लैस डिजिटल लाइब्रेरी छात्रों के लिए उपलब्ध है। वोकेशनल और स्किल बेस्ड कोर्स पर खास तवज्जो दी जा रही है। ताकि छात्रों को रोजगार के बेहतर मौके मिल सकें। कॉलेज इंतेजामिया का कहना है कि नई बिल्डिंग बनने से इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत होगा। डिजिटल कैंपस का ख्वाब भी जल्द पूरा होगा। इस मौके पर अल्लामा गालिब की कालेज कैम्पस में एक अदना सा भी स्टैच्यू नहीं होने से जुड़े सवाल के जवाब में प्रबंधन ने कहा कि पूर्व में हमारे पास जगह नहीं थी। लेकिन अब हमें जगह मिली है। निश्चित तौर पर देश की हसीन शख्सियत मिर्जा गालिब का स्टैच्यू होगा। क्योंकि कालेज ही उनके नाम से है। इंतेजामिया को उम्मीद है कि यह नया कदम कॉलेज को कामयाबी की नई बुलंदियों तक ले जाएगा। नई इमारत को उसी दिशा में एक अहम मील का पत्थर माना जा रहा है। गयाजी के अल्पसंख्यक तालीमी इदारे मिर्जा ग़ालिब कॉलेज में तरक़्क़ी का नया सफर शुरू हो गया है। सालों पुरानी जर्जर इमारत को डिमॉलिश कर दिया गया। उसी जगह शुक्रवार को नई, आलीशान और मॉडर्न बिल्डिंग की बुनियाद रखी गई। इस अहम मौके पर कॉलेज के प्रिंसिपल, शासी निकाय के सदर प्रोफेसर हफ़िजूर रहमान व सचिव शबी आरफीन शमशी ने शिलान्यास किया। कार्यक्रम के बाद पूरे कैंपस में खुशी का माहौल दिखा। कॉलेज इंतेजामिया का कहना है कि यह सिर्फ इमारत नहीं, बल्कि आने वाले कल की मजबूत बुनियाद है। नई बिल्डिंग में तालीम के तमाम आधुनिक साधन मुहैया कराए जाएंगे। स्मार्ट क्लास, बेहतर क्लासरूम और टेक्निकल सुविधाएं छात्रों को मिलेंगी। इससे पढ़ाई का माहौल और बेहतर होगा। प्रबंधन ने बताया कि मिर्जा ग़ालिब कॉलेज की बुनियाद 1969 में रखी गई थी। शहर के मशहूर शिक्षाविदों और समाज के जिम्मेदार लोगों की कोशिशों से यह इदारा खड़ा हुआ। शुरुआती दौर में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन कॉलेज ने हर मुश्किल को पार करते हुए अपनी एक अलग पहचान बनाई। आज यह मगध विश्वविद्यालय के बेहतरीन कॉलेजों में शुमार है। बिहार का इकलौता माइनॉरिटी कॉलेज कॉलेज में 18 स्नातक और 18 स्नातकोत्तर कोर्स चल रहे हैं। खास बात यह है कि यह बिहार का इकलौता माइनॉरिटी कॉलेज है, जहां तमाम विषयों में पीजी की पढ़ाई होती है। करीब 10 हजार छात्र-छात्राएं यहां तालीम हासिल कर रहे हैं। कॉलेज के स्टूडेंट्स लगातार यूनिवर्सिटी में टॉपर बनते रहे हैं। पिछले कुछ सालों में कॉलेज ने तेज़ी से तरक़्क़ी की है। 2018 में मगध विश्वविद्यालय के करीब 2.87 एकड़ जमीन खरीदी गई। NAAC से ग्रेड-B की मान्यता मिली। 2022 में नया वोकेशनल भवन तैयार हुआ। पूरा सिस्टम कैशलेस किया गया। डिजिटल लाइब्रेरी और मॉडर्न लैब भी स्थापित की गई। कॉलेज में 60 क्लासरूम और 7 स्मार्ट क्लास मौजूद हैं। 25 हजार से ज्यादा किताबों से लैस डिजिटल लाइब्रेरी छात्रों के लिए उपलब्ध है। वोकेशनल और स्किल बेस्ड कोर्स पर खास तवज्जो दी जा रही है। ताकि छात्रों को रोजगार के बेहतर मौके मिल सकें। कॉलेज इंतेजामिया का कहना है कि नई बिल्डिंग बनने से इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत होगा। डिजिटल कैंपस का ख्वाब भी जल्द पूरा होगा। इस मौके पर अल्लामा गालिब की कालेज कैम्पस में एक अदना सा भी स्टैच्यू नहीं होने से जुड़े सवाल के जवाब में प्रबंधन ने कहा कि पूर्व में हमारे पास जगह नहीं थी। लेकिन अब हमें जगह मिली है। निश्चित तौर पर देश की हसीन शख्सियत मिर्जा गालिब का स्टैच्यू होगा। क्योंकि कालेज ही उनके नाम से है। इंतेजामिया को उम्मीद है कि यह नया कदम कॉलेज को कामयाबी की नई बुलंदियों तक ले जाएगा। नई इमारत को उसी दिशा में एक अहम मील का पत्थर माना जा रहा है।  

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