GSVM में बनेगी 48.5 करोड़ की 11 मंजिला रिसर्च लैब:एम्स की तर्ज पर होंगे मेडिकल रिसर्च और ट्रायल; खून व पानी में भारी धातुओं की भी होगी जांच

GSVM में बनेगी 48.5 करोड़ की 11 मंजिला रिसर्च लैब:एम्स की तर्ज पर होंगे मेडिकल रिसर्च और ट्रायल; खून व पानी में भारी धातुओं की भी होगी जांच

शहर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल (जीएसवीएम) मेडिकल कॉलेज को चिकित्सा और शोध के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मिली है। शासन की ओर से कॉलेज में 48.5 करोड़ रुपए की लागत से अत्याधुनिक रिसर्च लैब बनाने के प्रस्ताव को हरी झंडी मिल गई है। एम्स (AIIMS) की तर्ज पर तैयार होने वाली इस लैब के शुरू होने से अब मेडिकल के छात्र-छात्राएं अपनी पढ़ाई के दौरान ही उच्च स्तरीय शोध कार्य कर सकेंगे। अब तक अलग रिसर्च लैब न होने के कारण कॉलेज में सीमित स्तर पर ही रिसर्च हो पाती थी, लेकिन इस नई व्यवस्था से शहर की स्वास्थ्य सेवाओं को एक नई दिशा मिलेगी। 3 हजार वर्ग मीटर में बनेगी 11 मंजिला इमारत चिकित्सा शिक्षा और शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस रिसर्च सेंटर को 3 हजार वर्ग मीटर जमीन पर तैयार किया जाएगा। यह विशाल रिसर्च सेंटर 11 मंजिला होगा, जहाँ आधुनिकतम तकनीक और उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। प्राचार्य प्रो. संजय काला के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस इस रिसर्च लैब में माइक्रोबायोलॉजी, पैथोलॉजी, कोशिका कल्चर लैब, एनिमल हाउस और वायरोलॉजी जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी। ये सभी सुविधाएं मानव कोशिकाओं पर शोध और नई दवाओं के सफल ट्रायल के लिए बेहद उपयोगी साबित होंगी। यहाँ दवाओं के प्रभाव और उनके संभावित दुष्प्रभावों का बारीक अध्ययन किया जा सकेगा। शहर में ही हो सकेगी हैवी मेटल्स की जांच, बीमारियों पर लगेगा अंकुश रिसर्च सेंटर के साथ-साथ कॉलेज में हैवी मेटल्स लैब की भी शुरुआत की जा रही है। अब तक शहर में भारी तत्वों की जांच की समुचित व्यवस्था नहीं थी। इस नई लैब के चालू होने से पीने के पानी और इंसान के खून में मिलने वाले सीसा, पारा जैसे हानिकारक भारी तत्वों (हैवी मेटल्स) की सटीक जांच कानपुर में ही संभव हो सकेगी। इससे जहरीले तत्वों के कारण बढ़ रही गंभीर बीमारियों के खतरों को समय रहते पहचाना और नियंत्रित किया जा सकेगा। अगले साल तक धरातल पर उतरेगी योजना
प्रशासन का प्रयास है,कि अगले साल तक इस बहुप्रतीक्षित रिसर्च लैब और हैवी मेटल लैब को पूरी तरह क्रियान्वित कर दिया जाए। शासन से दोनों महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति मिलने के बाद अब निर्माण और संसाधनों को जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इस नई व्यवस्था से न केवल मेडिकल छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव मिलेगा, बल्कि आम मरीजों के इलाज और नई चिकित्सा तकनीकों के विकास में भी यह मील का पत्थर साबित होगी।

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