GST कलेक्शन घटा, क्या मंदी की ओर बढ़ा बिहार:महंगाई बढ़ी तो लोगों ने कम किया खर्च, 246 करोड़ घटी सरकार की कमाई

GST कलेक्शन घटा, क्या मंदी की ओर बढ़ा बिहार:महंगाई बढ़ी तो लोगों ने कम किया खर्च, 246 करोड़ घटी सरकार की कमाई

अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग शुरू हुए तीन महीने से अधिक हो गए। 3400 km दूर हो रही लड़ाई का असर बिहार पर पड़ रहा है। बाजार मंदी की ओर बढ़ता दिख रहा है। लड़ाई के चलते पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमत बढ़ी। इसके चलते सभी सामान के दाम बढ़ गए। आम आदमी की कमाई नहीं बढ़ी और सामान की कीमत बढ़ गई। इसका असर हुआ कि लोग कम खरीदारी कर रहे हैं। इससे सरकार की कमाई घटी है। इसे आंकड़ों में समझें तो अप्रैल 2025 की तुलना में अप्रैल 2026 में 285 करोड़ रुपए कम GST कलेक्शन हुआ। इसी तरह मई 2025 से मई 2026 में 246 करोड़ रुपए कम पैसे सरकार को मिले। भास्कर की स्पेशल रिपोर्ट में जानिए क्या बिहार मंदी की ओर बढ़ चला है? बिहार का बाजार सुस्त क्यों हुआ? सुस्त बाजार का संकेत दे रहा जीएसटी कलेक्शन बिहार का डोमेस्टिक GST कलेक्शन गिर रहा है। माना जा रहा है कि इसकी वजह डिमांड की कमी है। बिहार के लोगों की पर्चेजिंग पावर कम होने के संकेत हैं। सीनियर इकोनॉमिस्ट प्रो. नवल किशोर चौधरी ने कहा, ‘यह काफी दुखद है। अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं।’ इन 8 वजह से कम हुआ जीएसटी कलेक्शन 1. ईरान-इजराइल युद्ध: लड़ाई के चलते तेल और गैस संकट पैदा हुआ। पेट्रोल डीजल के दाम बढ़े। रसोई गैस की कीमत बढ़ी है। इसके चलते लोगों ने आना जाना कम किया है। लोग घर से बाहर कम निकल रहें हैं। रेस्टोरेंट में कम जा रहे हैं। बाजार-मॉल जाकर खरीददारी कम कर रहे हैं। 2. बढ़ती महंगाई: सामान और सेवाओं की कीमत बढ़ गई है। वहीं, आमदनी स्थिर है। इससे लोग गैर जरूरी खर्चों में कटौती कर रहे हैं। प्रो. नवल किशोर ने कहा, ‘लोगों की आमदनी स्थिर रहे या कम हो जाए और दूसरी ओर प्रोडक्ट और सर्विसेज महंगे तो लेन-देन सुस्त हो जाता है। देश का वर्तमान खुदरा महंगाई दर लगभग 3.4 फीसदी है, जबकि खाद्य महंगाई दर 4.2 प्रतिशत के आसपास दर्ज की गई है। वहीं दूसरी तरफ थोक महंगाई दर में उछाल देखा गया है और यह बढ़कर 8.30 फीसदी पहुंच गया है।’ 3. GST स्लैब में बदलाव: 22 सितंबर 2025 को हुई GST स्लैब में बदलाव के चलते भी टैक्स कलेक्शन कम हुआ है। 28% स्लैब वाले कई प्रोडक्ट्स को 18% के स्लैब में लाया गया। 18% GST स्लैब में आने वाले करीब 400 प्रोडक्ट्स पर GST घटाकर 5% या जीरो कर दिया गया। इसका असर बिहार जैसे उपभोक्ता राज्य पर पड़ा है। 4. बेमौसम बारीश ने घटाई किसानों की आमदनी: बेमौसम बारिश ने किसानों की फसल खराब की। सितंबर-अक्टूबर में भारी बारिश हुई, जिससे गेहूं समेत रबी सीजन की दूसरी फसलों को लगाने में देर हुई। इसके बाद मार्च-अप्रैल में जब गेहूं, सरसों और दूसरी फसलें तैयार थी तब बारिश ने नुकसान पहुंचाया। इससे किसानों की आमदनी घटी है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की खरीद क्षमता कम हुई है। जीविका दीदियों को मिले 10-10 हजार रुपए से ग्रामीण इलाके में बाजार को थोड़ा बढ़ावा मिला था। दूसरी किस्त अभी तक जारी नहीं हुई है। 5. सरकारी तंत्र और रिफंड सिस्टम: जीएसटी कलेक्शन में कमी की यह भी एक वजह है। इस दौरान सरकारी सिस्टम से रिफंड के मामले नहीं निपटाए होंगे। 6. कर चोरी और फर्जी बिलिंग: अनौपचारिक क्षेत्र में कर चोरी, फेक बिलिंग और बिना बिल के नकद लेनदेन की वजह से सरकारी खजाने में भारी नुकसान देखने को मिलता है। 7.औद्योगिक उत्पादन मे गिरावट: मांग घटने से औद्योगिक उत्पादन में गिरावट आती है। इससे टैक्स संग्रह घट जाता है। 8. रिफंड और इनपुट टैक्स क्रेडिट का समायोजन: कई बार निर्यातकों को समय पर टैक्स रिफंड या इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) जारी किए जाते हैं। इससे संबंधित माह के ‘नेट जीएसटी कलेक्शन’ के आंकड़ों में अस्थायी रूप से कमी दर्ज की जाती है। आम लोग खरीदारी कम कर रहे, इसलिए घटा राजस्व बिहार में GST कलेक्शन में आई कमी पर आर्थशास्त्री प्रो.नवल किशोर ने कहा, ‘इसकी वजह घरेलू खपत में कमी और सरकार द्वारा टैक्स दरों में कटौती करना है। जीएसटी एक उपभोग आधारित कर है। जब आम लोग खरीदारी कम करते हैं या सरकार आवश्यक वस्तुओं पर टैक्स कम कर देती है तो कुल राजस्व घट जाता है।’ खाने-पीने के खर्च में की कटौती बढ़ी हुई महंगाई को लेकर हमने कुछ महिलाओं से बात की। गृहिणी नीलू ने कहा, ‘पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ गई है। इससे महंगाई बढ़ी है। पहले मैं तकरीबन हर एक दो दिन पर बाजार निकल जाती थी। अब बाजार जाना कम कर दिया है। बहुत जरूरी होने पर ही मार्केट जाती हूं।’ अनामिका ने कहा बाजार में रौनक घटी है। बुटिक में पहले की तरह महिलाएं नहीं आ रही हैं। मैंने भी जाना कम किया है। बड़ी हुई महंगाई का असर है कि मैंने खाने-पीने पर खर्च में कटौती कर दी है। अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग शुरू हुए तीन महीने से अधिक हो गए। 3400 km दूर हो रही लड़ाई का असर बिहार पर पड़ रहा है। बाजार मंदी की ओर बढ़ता दिख रहा है। लड़ाई के चलते पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमत बढ़ी। इसके चलते सभी सामान के दाम बढ़ गए। आम आदमी की कमाई नहीं बढ़ी और सामान की कीमत बढ़ गई। इसका असर हुआ कि लोग कम खरीदारी कर रहे हैं। इससे सरकार की कमाई घटी है। इसे आंकड़ों में समझें तो अप्रैल 2025 की तुलना में अप्रैल 2026 में 285 करोड़ रुपए कम GST कलेक्शन हुआ। इसी तरह मई 2025 से मई 2026 में 246 करोड़ रुपए कम पैसे सरकार को मिले। भास्कर की स्पेशल रिपोर्ट में जानिए क्या बिहार मंदी की ओर बढ़ चला है? बिहार का बाजार सुस्त क्यों हुआ? सुस्त बाजार का संकेत दे रहा जीएसटी कलेक्शन बिहार का डोमेस्टिक GST कलेक्शन गिर रहा है। माना जा रहा है कि इसकी वजह डिमांड की कमी है। बिहार के लोगों की पर्चेजिंग पावर कम होने के संकेत हैं। सीनियर इकोनॉमिस्ट प्रो. नवल किशोर चौधरी ने कहा, ‘यह काफी दुखद है। अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं।’ इन 8 वजह से कम हुआ जीएसटी कलेक्शन 1. ईरान-इजराइल युद्ध: लड़ाई के चलते तेल और गैस संकट पैदा हुआ। पेट्रोल डीजल के दाम बढ़े। रसोई गैस की कीमत बढ़ी है। इसके चलते लोगों ने आना जाना कम किया है। लोग घर से बाहर कम निकल रहें हैं। रेस्टोरेंट में कम जा रहे हैं। बाजार-मॉल जाकर खरीददारी कम कर रहे हैं। 2. बढ़ती महंगाई: सामान और सेवाओं की कीमत बढ़ गई है। वहीं, आमदनी स्थिर है। इससे लोग गैर जरूरी खर्चों में कटौती कर रहे हैं। प्रो. नवल किशोर ने कहा, ‘लोगों की आमदनी स्थिर रहे या कम हो जाए और दूसरी ओर प्रोडक्ट और सर्विसेज महंगे तो लेन-देन सुस्त हो जाता है। देश का वर्तमान खुदरा महंगाई दर लगभग 3.4 फीसदी है, जबकि खाद्य महंगाई दर 4.2 प्रतिशत के आसपास दर्ज की गई है। वहीं दूसरी तरफ थोक महंगाई दर में उछाल देखा गया है और यह बढ़कर 8.30 फीसदी पहुंच गया है।’ 3. GST स्लैब में बदलाव: 22 सितंबर 2025 को हुई GST स्लैब में बदलाव के चलते भी टैक्स कलेक्शन कम हुआ है। 28% स्लैब वाले कई प्रोडक्ट्स को 18% के स्लैब में लाया गया। 18% GST स्लैब में आने वाले करीब 400 प्रोडक्ट्स पर GST घटाकर 5% या जीरो कर दिया गया। इसका असर बिहार जैसे उपभोक्ता राज्य पर पड़ा है। 4. बेमौसम बारीश ने घटाई किसानों की आमदनी: बेमौसम बारिश ने किसानों की फसल खराब की। सितंबर-अक्टूबर में भारी बारिश हुई, जिससे गेहूं समेत रबी सीजन की दूसरी फसलों को लगाने में देर हुई। इसके बाद मार्च-अप्रैल में जब गेहूं, सरसों और दूसरी फसलें तैयार थी तब बारिश ने नुकसान पहुंचाया। इससे किसानों की आमदनी घटी है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की खरीद क्षमता कम हुई है। जीविका दीदियों को मिले 10-10 हजार रुपए से ग्रामीण इलाके में बाजार को थोड़ा बढ़ावा मिला था। दूसरी किस्त अभी तक जारी नहीं हुई है। 5. सरकारी तंत्र और रिफंड सिस्टम: जीएसटी कलेक्शन में कमी की यह भी एक वजह है। इस दौरान सरकारी सिस्टम से रिफंड के मामले नहीं निपटाए होंगे। 6. कर चोरी और फर्जी बिलिंग: अनौपचारिक क्षेत्र में कर चोरी, फेक बिलिंग और बिना बिल के नकद लेनदेन की वजह से सरकारी खजाने में भारी नुकसान देखने को मिलता है। 7.औद्योगिक उत्पादन मे गिरावट: मांग घटने से औद्योगिक उत्पादन में गिरावट आती है। इससे टैक्स संग्रह घट जाता है। 8. रिफंड और इनपुट टैक्स क्रेडिट का समायोजन: कई बार निर्यातकों को समय पर टैक्स रिफंड या इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) जारी किए जाते हैं। इससे संबंधित माह के ‘नेट जीएसटी कलेक्शन’ के आंकड़ों में अस्थायी रूप से कमी दर्ज की जाती है। आम लोग खरीदारी कम कर रहे, इसलिए घटा राजस्व बिहार में GST कलेक्शन में आई कमी पर आर्थशास्त्री प्रो.नवल किशोर ने कहा, ‘इसकी वजह घरेलू खपत में कमी और सरकार द्वारा टैक्स दरों में कटौती करना है। जीएसटी एक उपभोग आधारित कर है। जब आम लोग खरीदारी कम करते हैं या सरकार आवश्यक वस्तुओं पर टैक्स कम कर देती है तो कुल राजस्व घट जाता है।’ खाने-पीने के खर्च में की कटौती बढ़ी हुई महंगाई को लेकर हमने कुछ महिलाओं से बात की। गृहिणी नीलू ने कहा, ‘पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ गई है। इससे महंगाई बढ़ी है। पहले मैं तकरीबन हर एक दो दिन पर बाजार निकल जाती थी। अब बाजार जाना कम कर दिया है। बहुत जरूरी होने पर ही मार्केट जाती हूं।’ अनामिका ने कहा बाजार में रौनक घटी है। बुटिक में पहले की तरह महिलाएं नहीं आ रही हैं। मैंने भी जाना कम किया है। बड़ी हुई महंगाई का असर है कि मैंने खाने-पीने पर खर्च में कटौती कर दी है।  

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